- सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में विधायी विशेषाधिकार और वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच टकराव से संबंधित दो दशक से अधिक पुराने विवाद का निपटारा किया।
- यह मामला वर्ष 2003 में तमिलनाडु विधान सभा द्वारा पत्रकारों के विरुद्ध पारित एक प्रस्ताव से उत्पन्न हुआ था। यह प्रस्ताव राज्य सरकार और तत्कालीन मुख्यमंत्री की आलोचना करने वाली समाचार रिपोर्टों तथा एक संपादकीय के प्रकाशन के संबंध में था।
- विधान सभा ने उक्त प्रकाशन को विशेषाधिकार का उल्लंघन माना और पाँच पत्रकारों को 15 दिनों के कारावास की सजा देने का आदेश दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा दी थी। Read More
विधायी विशेषाधिकार बनाम वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
संदर्भ
पृष्ठभूमि