पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त मंत्रालय के उस प्रस्ताव को स्वीकृति दी है, जिसके अंतर्गत लघु एवं मध्यम उद्यम (SME) विकास निधि की स्थापना के लिए केंद्र सरकार द्वारा ₹10,000 करोड़ की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
SME विकास निधि (SGF) के बारे में
- SME विकास निधि (SGF) का उद्देश्य भारत के SMEs के लिए विकासोन्मुख पूंजी को प्रोत्साहित करना तथा विनिर्माण, सेवाओं, प्रौद्योगिकी, नवाचार-आधारित क्षेत्रों और रणनीतिक मूल्य शृंखलाओं में अग्रणी भारतीय उद्यमों के उद्भव को सक्षम बनाना है।
- इस निधि का प्रथम बार उल्लेख केंद्रीय बजट 2026 में किया गया था।

- SME विकास निधि को प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश निधि के रूप में तैयार किया गया है और यह SGF ढाँचे के अंतर्गत स्थापित वैकल्पिक निवेश कोष के रूप में कार्य करेगी।
- AIF भारत में स्थापित एक निजी रूप से संकलित निवेश कोष है, जो निवेशकों से धन जुटाता है और एक निर्धारित निवेश नीति के अनुसार उसका निवेश करता है।
- यह निधि व्यावसायिक व्यवहार्यता और विस्तार-क्षमता प्रदर्शित करने वाले उच्च-संभावना वाले SMEs को दीर्घकालिक इक्विटी पूंजी उपलब्ध कराएगी।
SME विकास निधि का रणनीतिक फोकस
- विनिर्माण को केंद्र में रखना : SME विकास निधि के आवंटन का एक बड़ा हिस्सा लघु एवं मध्यम विनिर्माण-केंद्रित उद्यमों को प्रदान किया जाएगा।
- इस निधि का उद्देश्य उन कंपनियों को सहायता देना है, जो विनिर्माण क्षमता का विस्तार, उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने, उत्पादकता में सुधार तथा निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य कर रही हैं।
- औद्योगिक क्लस्टरों तक विकास का विस्तार: यह निधि टियर-II और टियर-III शहरों में स्थित औद्योगिक क्लस्टरों में कार्यरत SMEs पर भी विचार करेगी।
- इससे संतुलित क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने, स्थानीय आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करने तथा गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर सृजित होने की अपेक्षा है।

समर्पित विकास निधि की आवश्यकता
- SMEs के लिए पूंजी: अर्थव्यवस्था में MSMEs की व्यापक उपस्थिति के बावजूद, वर्तमान इक्विटी फंड मुख्यतः प्रारंभिक चरण के उद्यमों पर केंद्रित हैं, जिनमें सूक्ष्म उद्यम भी शामिल हैं।
- इससे लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए विकासोन्मुख इक्विटी पूंजी तक पहुंच को और विस्तारित करने की पर्याप्त संभावना उत्पन्न होती है।
- दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराकर यह पहल भारतीय SMEs को अपने परिचालन का विस्तार करने, प्रौद्योगिकी एवं विनिर्माण क्षमता में निवेश करने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश बढ़ाने तथा वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकृत होने में सक्षम बनाएगी।
- टियर-II और टियर-III शहरों सहित विभिन्न औद्योगिक क्लस्टरों में निवेश से संतुलित क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को समर्थन मिलेगा, स्थानीय आपूर्ति शृंखलाएँ सुदृढ़ होंगी और उच्च-गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
- इससे राष्ट्रीय महत्व वाले क्षेत्रों में कार्यरत उद्यमों को भी सहायता मिलने की अपेक्षा है।
निष्कर्ष
- SME विकास निधि सुधारों, डिजिटलीकरण, ऋण सहायता और व्यवसाय सुगमता से संबंधित उपायों के माध्यम से SME क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे वर्तमान प्रयासों का पूरक है।
- निवेश को प्रोत्साहित करके यह निधि नवाचार-आधारित औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देगी तथा आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगी।
- छोटे उद्यमों के लिए यह सहायता भारत के विकास को अधिक समावेशी बनाने के व्यापक प्रयास को दर्शाती है, जिसमें देशभर के उद्यमों के लिए विकास के अवसर उपलब्ध कराने पर बल दिया गया है।
SMEs का वर्गीकरण
- उद्यमों का वर्गीकरण संयंत्र एवं मशीनरी या उपकरणों में निवेश तथा वार्षिक कारोबार के आधार पर सूक्ष्म, लघु या मध्यम उद्यम के रूप में किया जाता है।
- नवीनतम मानदंडों के अनुसार, किसी लघु उद्यम में निवेश की सीमा ₹25 करोड़ तक तथा वार्षिक कारोबार की सीमा ₹100 करोड़ तक है।
- किसी मध्यम उद्यम में निवेश की सीमा ₹125 करोड़ तक तथा वार्षिक कारोबार की सीमा ₹500 करोड़ तक है।
भारत का MSME पारिस्थितिकी तंत्र
- अर्थव्यवस्था में योगदान : आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, MSMEs का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 31.1%, विनिर्माण उत्पादन में 35.4% और निर्यात में 48.58% योगदान है।
- औपचारिक MSME आधार का विस्तार : वर्ष 2026 में उद्यम पंजीकरण और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म (UAP) के अंतर्गत कुल MSME पंजीकरण लगभग 9.78 करोड़ तक पहुंच गए। पंजीकृत MSMEs ने लगभग 43.28 करोड़ रोजगार अवसरों की भी सूचना दी है।
- MSMEs में महिलाओं की भागीदारी: महिला-स्वामित्व वाले उद्यम कुल पंजीकरण का 37.6% हैं।
- प्रमुख आर्थिक गतिविधियों में MSMEs : पंजीकृत MSMEs का आधार व्यापार, सेवाओं और विनिर्माण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में फैला हुआ है।
- व्यापार क्षेत्र में लगभग 4.08 करोड़ पंजीकरण हैं, जिसके बाद सेवा क्षेत्र में लगभग 3.77 करोड़ और विनिर्माण क्षेत्र में लगभग 1.93 करोड़ पंजीकरण हैं।
स्रोत: TH
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