शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन हेतु पाँच नए उत्कृष्टता केंद्र
पाठ्यक्रम: GS1/ संस्कृति; GS2/ शिक्षा
संदर्भ
- शिक्षा मंत्रालय ने शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन हेतु पाँच उत्कृष्टता केंद्र (CoE) स्थापित करने को स्वीकृति प्रदान की है।
समाचार के बारे में अधिक जानकारी
- स्वीकृत उत्कृष्टता केंद्र शास्त्रीय असमिया, शास्त्रीय बंगाली, शास्त्रीय मराठी, शास्त्रीय पाली और शास्त्रीय प्राकृत के अध्ययन के लिए स्थापित किए जाएंगे।
- इनकी स्थापना क्रमशः असम के तेजपुर विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल के विश्वभारती विश्वविद्यालय, पुणे के डेक्कन कॉलेज पोस्ट-ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात में की जाएगी।
- यह पहल उन्नत शैक्षणिक अनुसंधान, भाषाई एवं साहित्यिक विरासत के संरक्षण और डिजिटलीकरण तथा इन शास्त्रीय भाषाओं से संबंधित ज्ञान के व्यापक प्रसार के लिए समर्पित संस्थागत सहयोग प्रदान करेगी।
शास्त्रीय भाषाएँ
- भारत में 11 शास्त्रीय भाषाएँ हैं—तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ओडिया, मराठी, असमिया, बंगाली (बांग्ला), पाली और प्राकृत।
- तमिल को वर्ष 2004, संस्कृत को 2005, कन्नड़ को 2008, तेलुगु को 2008, मलयालम को 2013 तथा ओडिया को 2014 में शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया था।

- मानदंड: किसी भाषा को शास्त्रीय भाषा के रूप में वर्गीकृत करने के लिए निम्नलिखित मानदंड निर्धारित हैं:
- इसके प्रारंभिक ग्रंथों या अभिलिखित इतिहास की उच्च प्राचीनता, जो लगभग 1,500–2,000 वर्षों की अवधि तक विस्तृत हो।
- प्राचीन साहित्य या ग्रंथों का ऐसा समृद्ध भंडार, जिसे उस भाषा को बोलने वाली पीढ़ियों द्वारा विरासत के रूप में स्वीकार किया गया हो।
- काव्य के साथ-साथ ज्ञानपरक ग्रंथ, विशेषकर गद्य रचनाएँ, तथा पुरालेखीय एवं अभिलेखीय प्रमाण उपलब्ध हों।
- शास्त्रीय भाषा और उसका साहित्य अपने वर्तमान स्वरूप से भिन्न हो सकता है अथवा मूल भाषा से विकसित बाद के रूपों के साथ इसमें विच्छिन्नता दिखाई दे सकती है।
स्रोत: AIR
फॉर्म 6 विवाद
पाठ्यक्रम: GS2/ राजव्यवस्था
संदर्भ
- भारत के मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्म 6 के किसी संशोधित संस्करण को सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकृति प्रदान नहीं की है।
फॉर्म 6
- फॉर्म 6 भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा जारी किया जाता है।
- यह नए मतदाता पंजीकरण के लिए आवेदन-पत्र है।
- यह उन मतदाताओं के लिए भी वही आवेदन-पत्र है, जिनका नाम मतदाता सूची से हट गया है और जो नए सिरे से पंजीकरण के लिए आवेदन करना चाहते हैं।
- इस फॉर्म में व्यक्तिगत विवरण, आयु और सामान्य निवास का प्रमाण तथा नागरिकता से संबंधित घोषणा और यह घोषणा माँगी जाती है कि आवेदक का नाम किसी अन्य स्थान पर पहले से पंजीकृत है या नहीं।

नया फॉर्म 6
- जुलाई में प्रकाशित नए फॉर्म 6 में आवेदकों को निम्नलिखित तीन कथनों में से एक का चयन करने के लिए कहा गया है:
- क्या 2000 के दशक के प्रारंभ में हुए विगत SIR के दौरान उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज था।
- क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी में से किसी का नाम उस मतदाता सूची में दर्ज था।
- क्या न तो उनका नाम और न ही उनके माता-पिता का नाम उस मतदाता सूची में दर्ज था।
- यद्यपि नई घोषणा को अनिवार्य के रूप में चिह्नित नहीं किया गया है, लेकिन इसे भरे बिना आवेदक ऑनलाइन फॉर्म जमा नहीं कर सकते।
- इसके अतिरिक्त, दिशा-निर्देशों में चेतावनी दी गई है कि इसमें झूठी घोषणा करना जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के अंतर्गत दंडनीय है।
स्रोत: TH
रूस में प्लेग का प्रकोप
पाठ्यक्रम: GS2/ स्वास्थ्य
संदर्भ
- रूस के साइबेरिया में न्यूमोनिक प्लेग के संदिग्ध प्रकोप के बाद संगरोध और एहतियाती उपाय लागू किए गए हैं। यह घटनाक्रम एक एंटी-प्लेग अनुसंधान संस्थान में कार्यरत प्रयोगशाला कर्मी की मृत्यु के बाद सामने आया।
परिचय
- प्लेग एक संक्रामक रोग है, जो येर्सिनिया पेस्टिस नामक जीवाणु के कारण होता है। यह जीवाणु सामान्यतः छोटे स्तनधारियों और उनके पिस्सुओं में पाया जाता है। यह रोग ओशिनिया को छोड़कर सभी महाद्वीपों में पाया जाता है।
- यह रोग पिस्सुओं के माध्यम से जानवरों के बीच फैलता है। मनुष्य संक्रमित वाहक पिस्सू के काटने, संक्रमित शारीरिक द्रवों या दूषित पदार्थों के असुरक्षित संपर्क अथवा न्यूमोनिक प्लेग से संक्रमित व्यक्ति के श्वसन कणों के साँस के माध्यम से शरीर में प्रवेश करने पर संक्रमित हो सकता है।
प्लेग के प्रकार
- इसके तीन प्रमुख नैदानिक प्रकार हैं:
- ब्यूबोनिक प्लेग : यह सामान्यतः संक्रमित पिस्सू के काटने के बाद होता है और इसमें ब्यूबोज (Buboes) नामक दर्दनाक एवं सूजे हुए लसीका ग्रंथि-समूह उत्पन्न होते हैं।
- सेप्टीसीमिक प्लेग : यह तब होता है जब वाई. पेस्टिस रक्तप्रवाह को संक्रमित कर देता है।
- न्यूमोनिक प्लेग : यह फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह तब विकसित हो सकता है जब प्लेग शरीर के किसी अन्य रूप से फेफड़ों तक फैल जाए अथवा संक्रमित व्यक्ति या पशु से निकली संक्रामक श्वसन बूंदों को साँस के माध्यम से ग्रहण किया जाए।
- लक्षण: तीव्र बुखार, ठंड लगना, गंभीर सिरदर्द और कमजोरी के बाद साँस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द तथा खाँसी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
- मृत्यु दर: यदि उपचार न किया जाए तो इसकी केस-फेटैलिटी दर 30% से 100% तक हो सकती है।
- उपचार: प्लेग का उपचार एंटीबायोटिक्स जैसे जेंटामाइसिन, सिप्रोफ्लॉक्सासिन अथवा डॉक्सीसाइक्लिन से किया जा सकता है। इसलिए रोग की शीघ्र पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
स्रोत: IE
डेजर्ट नेशनल पार्क
पाठ्यक्रम: GS3/ पर्यावरण
संदर्भ
- केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने राजस्थान के डेजर्ट नेशनल पार्क में दो ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) अर्थात गोडावण को छोड़ा।
डेजर्ट नेशनल पार्क के बारे में
- अवस्थिति: डेजर्ट नेशनल पार्क राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में थार मरुस्थल के अंतर्गत स्थित है।
- इसे वर्ष 1980 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत थार के विशिष्ट एवं संवेदनशील मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए स्थापित किया गया था।
- पृष्ठभूमि: थार के विशिष्ट सहारा–थार मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण तथा मरुस्थलीकरण से निपटने के उद्देश्य से इसे वर्ष 1980 में संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था।
- जलवायु: यह अत्यंत उष्ण और शुष्क क्षेत्र में स्थित है। पार्क के कुछ हिस्सों में वार्षिक वर्षा 100 मिमी से भी कम होती है।
- भू-दृश्य: यहाँ बरखान एवं अनुदैर्ध्य रेत के टीले, बजरी के मैदान, चट्टानी क्षेत्र तथा टीलों के बीच स्थित निम्न भू-भाग पाए जाते हैं।
- वनस्पति: वनस्पति विरल है, जिसमें खुले घास के मैदान, काँटेदार झाड़ियाँ तथा मरुस्थलीय परिस्थितियों के अनुकूल पौधे शामिल हैं।
- खेजड़ी (प्रोसोपिस सिनेरिया) थार के पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण देशज वृक्ष है, जिसका बिश्नोई समुदाय द्वारा पारंपरिक रूप से संरक्षण किया जाता है।
- जैव-विविधता: यह ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवासों में से एक है। गोडावण एक गंभीर रूप से संकटग्रस्त घासभूमि पक्षी है।
- यहाँ चिंकारा, मरुस्थलीय बिल्ली, मरुस्थलीय खरगोश, लंबे कान वाला हेजहॉग, सॉ-स्केल्ड वाइपर, फारसी गेको तथा टोड-हेडेड अगामा जैसे जीव भी पाए जाते हैं।
स्रोत: TH
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संक्षिप्त समाचार 06-10-2026