त्रि-आयामी (3D) मुद्रण प्रौद्योगिकी 

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • आंध्र प्रदेश ने प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) पहल के अंतर्गत 3D कंक्रीट प्रिंटिंग (3DCP) का उपयोग करके ग्रामीण आवासों के निर्माण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक पायलट परियोजना शुरू की है।

3D मुद्रण के बारे में

  • 3D मुद्रण एक विनिर्माण प्रक्रिया है, जिसमें कंप्यूटर द्वारा निर्मित डिज़ाइन का उपयोग करके त्रि-आयामी वस्तुओं का निर्माण परत-दर-परत किया जाता है। इसका आविष्कार 1980 के दशक में चार्ल्स डब्ल्यू. हल ने किया था।
  • यह एक एडिटिव विनिर्माण प्रक्रिया है, जिसमें प्लास्टिक, मिश्रित पदार्थ या जैव-सामग्री जैसे पदार्थों की परतों को एक के ऊपर एक जोड़कर विभिन्न आकार, आयाम, कठोरता और रंग वाली वस्तुओं का निर्माण किया जाता है।
    • 3D कंक्रीट प्रिंटिंग में कंप्यूटर-नियंत्रित प्रिंटर विशेष रूप से तैयार किए गए कंक्रीट या सीमेंट-आधारित पदार्थ को परत-दर-परत जमा करके भवन के घटकों अथवा पूरी संरचनाओं का निर्माण करता है।
    • एक रोबोटिक प्रिंटर डिजिटल बिल्डिंग इन्फॉर्मेशन मॉडलिंग (BIM) डिज़ाइन को सीधे भौतिक संरचना में परिवर्तित करता है। इसके लिए विशेष रूप से तैयार किए गए सीमेंट-आधारित पदार्थों को नोज़ल के माध्यम से क्रमिक क्षैतिज परतों में बाहर निकाला जाता है।

3D मुद्रण में भारत की प्रगति

  • वर्ष 2021 में IIT मद्रास और स्टार्ट-अप Tvasta ने भारत के प्रथम 3D-मुद्रित घर का विकास एवं अनावरण किया।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने वर्ष 2022 में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर राष्ट्रीय रणनीति जारी की।
    • इसका उद्देश्य 3D प्रिंटर, सामग्री, प्रक्रियाओं, सॉफ्टवेयर, उत्पादों, अनुसंधान तथा कुशल मानव संसाधन को समाहित करते हुए एक स्वदेशी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना था।
  • वर्ष 2025 में भारतीय सेना ने सिक्किम तथा उससे सटे अग्रिम क्षेत्रों में त्रिशक्ति कोर द्वारा स्थल पर 3D कंक्रीट प्रिंटिंग प्रौद्योगिकी का उपयोग किया है।

3D मुद्रण के अनुप्रयोग

  • स्वास्थ्य सेवा: 3D मुद्रण के माध्यम से रोगी-विशिष्ट कृत्रिम अंग, प्रत्यारोपण, शल्य चिकित्सा संबंधी मार्गदर्शक उपकरण तथा दंत चिकित्सा उपकरणों का निर्माण किया जा सकता है।
    • चिकित्सकीय प्रत्यारोपणों को मानकीकृत आकारों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय किसी व्यक्ति की शारीरिक संरचना के अनुरूप डिज़ाइन किया जा सकता है।
  • रक्षा: 3D मुद्रण उपयोग के स्थान के निकट अनुकूलित घटकों के निर्माण में सहायता कर सकता है, जिससे लंबी आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भरता संभावित रूप से कम हो सकती है।
  • ऑटोमोबाइल क्षेत्र: निर्माता प्रत्येक डिज़ाइन के लिए महँगे पारंपरिक साँचों का निर्माण किए बिना कई डिज़ाइनों का तीव्रता से परीक्षण कर सकते हैं।
  • शिक्षा एवं अनुसंधान: शैक्षणिक संस्थान कार्यशील मॉडल, प्रोटोटाइप तथा प्रयोगात्मक घटकों के निर्माण के लिए 3D प्रिंटर का उपयोग करते हैं।

3D मुद्रण के लाभ

  • त्वरित प्रोटोटाइप निर्माण: डिज़ाइनर डिजिटल मॉडल से भौतिक प्रोटोटाइप तक तीव्रता से पहुँच सकते हैं। इससे पारंपरिक उपकरण निर्माण में लगने वाली देरी के बिना बार-बार परीक्षण और संशोधन संभव होता है।
  • जटिल डिज़ाइन: एडिटिव विनिर्माण के माध्यम से आंतरिक चैनल, जालीदार संरचनाएँ तथा अन्य जटिल ज्यामितीय आकृतियाँ निर्मित की जा सकती हैं, जिन्हें पारंपरिक प्रक्रियाओं से बनाना कठिन होता है।
  • सामग्री की कम बर्बादी: सामग्री केवल आवश्यक स्थानों पर जोड़ी जाती है। इसलिए कई सब्ट्रैक्टिव विनिर्माण तकनीकों की तुलना में अपशिष्ट कम हो सकता है।
  • विकेंद्रीकृत उत्पादन: डिजिटल डिज़ाइनों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से स्थानांतरित करके संभावित रूप से उस स्थान के निकट निर्मित किया जा सकता है, जहाँ उत्पाद की आवश्यकता हो।
    • यह विशेष रूप से स्पेयर पार्ट्स, दूरस्थ क्षेत्रों और आपातकालीन परिस्थितियों में उपयोगी है।
  • टूलिंग पर कम निर्भरता: पारंपरिक बड़े पैमाने के उत्पादन में प्रायः महँगे साँचे, डाई तथा विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है।
    • 3D मुद्रण विशेष रूप से प्रोटोटाइप, अनुकूलित उत्पादों तथा कम मात्रा वाले उत्पादन में ऐसी आवश्यकताओं को कम कर सकता है।

3D मुद्रण की सीमाएँ

  • उच्च प्रारंभिक लागत: उन्नत औद्योगिक प्रिंटर, विशेष प्रकार की सामग्री तथा संबंधित सॉफ्टवेयर महँगे हो सकते हैं।
  • सामग्री संबंधी सीमाएँ: वर्तमान में प्रत्येक सामग्री को आवश्यक सुदृढ़ता, टिकाऊपन, सटीकता और विश्वसनीयता के साथ मुद्रित करना संभव नहीं है।
  • गुणवत्ता एवं एकरूपता: मुद्रित घटक परतों के बीच उचित जुड़ाव, दोष, छिद्रता, तापीय तनाव तथा मुद्रण परिस्थितियों में होने वाले बदलावों से प्रभावित हो सकते हैं।
  • कुशल मानव संसाधन:उन्नत एडिटिव विनिर्माण के लिए पदार्थ विज्ञान, यांत्रिक अभियांत्रिकी, CAD, सॉफ्टवेयर, रोबोटिक्स तथा प्रक्रिया नियंत्रण में विशेषज्ञता आवश्यक होती है।
  • साइबर सुरक्षा: उत्पाद सीधे डिजिटल फाइलों से निर्मित होते हैं। डिजिटल डिज़ाइनों में अनधिकृत संशोधन या उनकी अनधिकृत प्रतिलिपि सुरक्षा तथा कानूनी संबंधी चिंताएँ उत्पन्न कर सकती है।
  • नियामकीय चुनौतियाँ: सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों के लिए कठोर परीक्षण, प्रमाणीकरण, मानकीकरण तथा गुणवत्ता आश्वासन आवश्यक हैं।
    • यह विशेष रूप से विमान के घटकों, चिकित्सकीय प्रत्यारोपणों, ऑटोमोबाइल तथा संरचनात्मक घटकों के लिए महत्वपूर्ण है।

आगे की राह

  • 3D मुद्रण बड़े पैमाने पर उत्पादन से हटकर लचीले, डिजिटल तथा बढ़ते हुए अनुकूलन योग्य विनिर्माण की दिशा में एक मौलिक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है।
  • इसे केवल एक वैकल्पिक उत्पादन प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि भारत के इंडस्ट्री 4.0 और उन्नत विनिर्माण की दिशा में संक्रमण की एक आवश्यक आधारशिला के रूप में देखा जाना चाहिए।

स्रोत: TH

 

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