पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- स्विट्ज़रलैंड के राष्ट्रपति भारत की 3 दिवसीय राजकीय यात्रा पर हैं।
प्रमुख बिंदु
- भारत और स्विट्ज़रलैंड ने पाँच समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं तथा द्विपक्षीय सहयोग को अधिक बेहतर करने पर सहमति व्यक्त की है।
- प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी (MMP) पर समझौता ज्ञापन: इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य समान व्यवहार के सिद्धांतों के आधार पर प्रवासन एवं गतिशीलता के क्षेत्र में सहयोग को विकसित करना है।
- इसके अंतर्गत 5 वर्ष तक की बहु-प्रवेश वीज़ा सुविधा का प्रावधान है, जिसमें प्रत्येक यात्रा के दौरान अधिकतम 6 माह तक ठहरने की अनुमति होगी। साथ ही, नवीकरणीय 1 वर्ष की छात्र अनुमति (Student Permit) का भी प्रावधान है।
- युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान पर समझौता (YPS): इसके अंतर्गत प्रत्येक देश से प्रतिवर्ष 300 व्यक्तियों का आदान-प्रदान किया जाएगा, जिसे बढ़ाकर 500 व्यक्तियों तक किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीयता/निवास स्थिति के सत्यापन के लिए 30/90 दिनों की समय-सीमा सहित अन्य प्रावधान भी शामिल हैं।
- परिवहन प्रौद्योगिकियों, गतिशीलता प्रणालियों और चिन्हित क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे के संवर्धन एवं सहयोग पर समझौता ज्ञापन।
- वैज्ञानिक सहयोग पर समझौता ज्ञापन: इसका उद्देश्य खोजपरक वैज्ञानिक सहयोग को समर्थन प्रदान करके भारतीय और स्विस अनुसंधान समुदायों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
- कार्यान्वयन व्यवस्था (IA): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज़ के बीच नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता के क्षेत्र में सहयोग के लिए यह व्यवस्था की गई है।
भारत–स्विट्ज़रलैंड द्विपक्षीय संबंध
- राजनयिक संबंध: स्विट्ज़रलैंड के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना 1948 में मैत्री संधि पर हस्ताक्षर के साथ हुई।
- वर्ष 2023 में दोनों देशों ने मैत्री संधि की 75वीं वर्षगाँठ मनाई।
- संस्थागत तंत्र: सचिव-स्तरीय विदेश कार्यालय परामर्श (FOC) संवाद की स्थापना 1996 में हुई।
- संयुक्त आर्थिक आयोग की स्थापना 1959 में की गई।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर संयुक्त समिति भी द्विपक्षीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण संस्थागत तंत्र है।
- व्यापार संबंध: कुल 23.27 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के साथ, वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्विट्ज़रलैंड भारत का 15वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। स्विट्ज़रलैंड विश्व के प्रमुख सोना परिशोधन केंद्रों में से एक है।
- भारत और EFTA देशों—आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्ज़रलैंड—के बीच ऐतिहासिक व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) 1 अक्टूबर 2025 को लागू हुआ।
- स्विट्ज़रलैंड और अन्य EFTA देश भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) संपन्न करने वाले पहले यूरोपीय साझेदार बने।
- वर्ष 2000 से 2025 के बीच स्विट्ज़रलैंड से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 10.87 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसके आधार पर स्विट्ज़रलैंड वैश्विक स्तर पर 12वें स्थान पर रहा।
- वर्ष 2015-2023 के दौरान भारत में स्विस FDI में 53% की वृद्धि हुई।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए अंतर-सरकारी समझौते पर 2003 में हस्ताक्षर किए गए। इसके अंतर्गत संयुक्त अनुसंधान, नवाचार, उन्नत प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जाता है।
- भारतीय प्रवासी समुदाय: स्विट्ज़रलैंड में 29,248 से अधिक भारतीय निवास करते हैं, जिनमें लगभग 9,662 भारतीय मूल के व्यक्ति शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स तथा पैरामेडिकल एवं नर्सिंग क्षेत्रों में कार्यरत है।
भारत के लिए स्विट्ज़रलैंड का महत्व
- व्यापार एवं बाजार तक पहुँच: भारत–EFTA व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) भारत को EFTA के बाजारों तक अधिक व्यापक पहुँच प्रदान करता है तथा वस्तुओं और सेवाओं में व्यापार के विस्तार का लक्ष्य रखता है।
- प्रमुख निवेश प्रतिबद्धता: TEPA के अंतर्गत EFTA ने आगामी 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को बढ़ावा देने तथा 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने में सहायता करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। इससे भारत के विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में नए अवसर उत्पन्न होने की संभावना है।
- प्रौद्योगिकी एवं नवाचार: स्विट्ज़रलैंड को सूक्ष्म अभियांत्रिकी, फार्मास्यूटिकल्स, उन्नत विनिर्माण, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त है। सहयोग से भारत को प्रौद्योगिकी, अनुसंधान क्षमताओं और विशिष्ट कौशल तक पहुँच प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है।
- बहुपक्षीय एवं राजनयिक महत्व: स्विट्ज़रलैंड की तटस्थता, सुदृढ़ बहुपक्षीय सहभागिता तथा जिनेवा में स्थित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका उसे भारत के राजनयिक एवं बहुपक्षीय हितों के लिए प्रासंगिक बनाती है।
निष्कर्ष
- भारत–स्विट्ज़रलैंड संबंध पारंपरिक मैत्री से आगे बढ़कर एक बहुआयामी आर्थिक, तकनीकी एवं रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हुए हैं। TEPA दोनों देशों के बीच गंभीर आर्थिक जुड़ाव के लिए एक महत्वपूर्ण नई आधारशिला प्रदान करता है।
स्रोत: TH
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