केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में संवर्ग प्रबंधन एवं भारतीय पुलिस सेवा में प्रतिनियुक्ति पर विमर्श

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था और शासन

संदर्भ 

  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के अधिकारियों की सेवा-प्रगति एवं पदोन्नति से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे विवाद ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति, संगठित समूह ‘क’ सेवा का दर्जा तथा पदोन्नति में गतिरोध जैसे मुद्दों पर पुनः विमर्श को शुरू कर दिया है।

पृष्ठभूमि 

  • यह विवाद मुख्यतः पाँच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से संबंधित है—केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) तथा सशस्त्र सीमा बल (SSB)।
  • इनमें से प्रत्येक बल में समूह ‘क’ के कार्यकारी अधिकारियों का अपना संवर्ग है। इन अधिकारियों की सामान्यतः सहायक कमांडेंट के पद पर भर्ती होती है तथा वे पदानुक्रम में आगे बढ़ते हुए वरिष्ठ कमान पदों तक पहुँच सकते हैं।
    • हालाँकि, वरिष्ठ पदों को परंपरागत रूप से प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भी भरा जाता रहा है, विशेष रूप से भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों द्वारा।
    • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल अधिनियम, 2026 से पहले, भर्ती नियमों के अनुसार उप महानिरीक्षक (DIG) के 20% तथा महानिरीक्षक (IG) के 50% पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाने का प्रावधान था।
  • वर्ष 2019 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के समूह ‘क’ कार्यकारी संवर्ग के अधिकारियों को संगठित समूह ‘क’ सेवा (OGAS) का दर्जा तथा गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन (NFFU) प्रदान किया।
    • NFFU के अंतर्गत, यदि पर्याप्त रिक्तियों के अभाव में नियमित पदोन्नति में विलंब होता है, तो पात्र अधिकारियों को उच्चतर ग्रेड के वित्तीय लाभ प्रदान किए जा सकते हैं।

सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय

  • संजय प्रकाश एवं अन्य बनाम भारत संघ, 2025 मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि—
    • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के समूह ‘क’ अधिकारियों को सभी उद्देश्यों के लिए “संगठित सेवाओं” के रूप में माना जाए।
    • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (SAG) के पदों अर्थात् महानिरीक्षक (IG) के पद तक भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को अधिकतम दो वर्ष की बाह्य समय-सीमा के भीतर क्रमशः कम किया जाए।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026

  • यह अधिनियम पाँचों केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के समूह ‘क’ अधिकारियों के लिए एक समेकित विधिक ढाँचा स्थापित करता है तथा केंद्र सरकार को भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति एवं सेवा-शर्तों को विनियमित करने हेतु नियम बनाने का अधिकार प्रदान करता है।
  • प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाने वाले पद: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में निम्नलिखित पद भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों द्वारा प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाने होंगे—
    • महानिरीक्षक के 50% पद।
    • अतिरिक्त महानिदेशक के न्यूनतम 67% पद।
    • महानिदेशक तथा विशेष महानिदेशक के सभी पद।
    • अन्य विधियों पर अधिभावी प्रभाव
  • यदि इस अधिनियम के किसी प्रावधान और किसी अन्य विधि के बीच असंगति उत्पन्न होती है, तो इस अधिनियम के प्रावधान प्रभावी होंगे।

गृह मंत्रालय की भूमिका

  • गृह मंत्रालय (MHA) भारतीय पुलिस सेवा तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, दोनों के लिए प्रशासनिक प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है।
  • गृह मंत्रालय ने परंपरागत रूप से भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को निम्नलिखित आधारों पर उचित ठहराया है—
    • पुलिसिंग संबंधी अनुभव का समावेश: राज्य संवर्गों से पुलिसिंग का अनुभव रखने वाले अधिकारियों को लाकर केंद्रीय बलों की क्षमता को सुदृढ़ करना।
    • नेतृत्व में एकरूपता: सभी बलों में नेतृत्व के समान मानक बनाए रखना।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों की नियुक्ति से संबंधित चिंताएँ

  • सेवा-प्रगति में गतिरोध: वरिष्ठ पदों पर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए उच्च स्तर के आरक्षण, जैसे महानिरीक्षक के 50% पद, के कारण केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के संवर्गीय अधिकारियों के लिए पदोन्नति के अवसर सीमित हो जाते हैं।
    • औसतन, एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल अधिकारी को कमांडेंट के पद तक पहुँचने में 25 वर्ष लगते हैं, जबकि आदर्श रूप से यह पद 13 वर्षों में प्राप्त हो जाना चाहिए।
  • संगठनात्मक अखंडता का ह्रास: भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की निरंतर प्रतिनियुक्ति से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की संस्थागत स्वायत्तता प्रभावित होती है तथा विशिष्ट एवं पेशेवर बलों के रूप में इनके दीर्घकालिक व्यावसायीकरण में बाधा उत्पन्न होती है।
  • प्राकृतिक न्याय एवं समानता के सिद्धांत का प्रश्न: अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) तथा अनुच्छेद 16 (लोक नियोजन में अवसर की समानता) के प्रावधान इस संदर्भ में प्रासंगिक हो जाते हैं, क्योंकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के संवर्गीय अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की तुलना में समान पदोन्नति के अवसर प्राप्त नहीं होते।

आगे की राह 

  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के संवर्ग प्रबंधन और भारतीय पुलिस सेवा की प्रतिनियुक्ति से संबंधित विमर्श केवल व्यक्तिगत पदोन्नति के विवाद तक सीमित नहीं है।
  • यह बलों के व्यावसायीकरण, संस्थागत निरंतरता, परिचालन दक्षता तथा भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की संरचना से संबंधित व्यापक प्रश्न है।
  • एक टिकाऊ व्यवस्था में सीमित प्रतिनियुक्ति के परिचालन लाभों तथा स्थायी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल संवर्गों के लिए सार्थक सेवा-प्रगति के अवसरों के बीच संतुलन स्थापित किया जाना चाहिए। साथ ही, भर्ती, पदोन्नति एवं वरिष्ठ कमान से संबंधित नियम स्पष्ट, सुसंगत तथा संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होने चाहिए।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF)

  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल भारत के गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत केंद्रीय पुलिस संगठनों के लिए सामूहिक रूप से प्रयुक्त नाम है।
  • ये बल आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने तथा देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में निम्नलिखित संगठन सम्मिलित हैं—
    • असम राइफल्स (AR): यह एक केंद्रीय पुलिस एवं अर्धसैनिक संगठन है, जो पूर्वोत्तर भारत में सीमा सुरक्षा, उग्रवाद-रोधी अभियानों तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उत्तरदायी है।
    • सीमा सुरक्षा बल (BSF): यह मुख्यतः पाकिस्तान एवं बांग्लादेश की सीमाओं पर तैनात किया जाता है। वर्ष 2009 से इसे वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों में भी तैनात किया जा रहा है।
    • भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP): यह भारत-चीन सीमा पर सीमा सुरक्षा के लिए तैनात की जाती है।
    • सशस्त्र सीमा बल (SSB): यह भारत-नेपाल तथा भारत-भूटान सीमाओं की सुरक्षा करता है।
    • राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG): यह गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत आतंकवाद-रोधी बल है। इसके सभी कार्मिक अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तथा भारतीय सेना से प्रतिनियुक्ति पर आते हैं।
    • केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF): यह मुख्यतः आंतरिक सुरक्षा संबंधी दायित्वों के लिए तैनात किया जाता है तथा पूर्वोत्तर, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों और जम्मू-कश्मीर में इसकी व्यापक तैनाती रहती है।
    • केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF): यह विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), महत्त्वपूर्ण आधारभूत संरचना प्रतिष्ठानों तथा देश के प्रमुख हवाई अड्डों को सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, यह निर्वाचन ड्यूटी, अन्य आंतरिक सुरक्षा दायित्वों तथा अति विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा में भी तैनात किया जाता है।

स्रोत: IE

 

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