पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतरराष्ट्रीय संबंध/जीएस-3/अर्थव्यवस्था
चर्चा में क्यों?
वित्त मंत्रालय ने मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) की समीक्षा पूरी कर ली है और इसे मंत्रिमंडल सचिवालय को भेज दिया है।
द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT)
- यह दो सरकारों के बीच एक पारस्परिक समझौता है, जिसका उद्देश्य एक देश के निवेशकों द्वारा दूसरे देश में किए गए निजी निवेश को प्रोत्साहित करना और उसकी सुरक्षा करना है।
- यह विदेशी निवेश के साथ व्यवहार के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित करती है, जैसे निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यवहार (FET), अवैध अधिग्रहण के विरुद्ध सुरक्षा, तथा निवेशक-राज्य विवाद निपटान (ISDS) तंत्र, जो निवेशकों को उनके अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का सहारा लेने की अनुमति देता है।
भारत की मौजूदा वर्ष 2015 मॉडल BIT
- भारत सरकार दिसंबर 2015 में स्वीकृत और जनवरी 2016 में अपनाए गए BIT मॉडल का पालन करती है।
- वाइट इंडस्ट्रीज ऑस्ट्रेलिया लिमिटेड (White Industries Australia Limited) बनाम भारत गणराज्य (2011) के महंगे मध्यस्थता निर्णय के बाद, सरकार ने एक सतर्क दृष्टिकोण अपनाया, जिसे इस प्रकार तैयार किया गया था कि नियमन करने की उसकी संप्रभु क्षमता बनी रहे।
- इस मॉडल की विभिन्न क्षेत्रों से आलोचना हुई है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि इसमें यह अनिवार्य किया गया था कि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का सहारा लेने से पहले विवादों को सुलझाने के लिए पाँच वर्षों तक घरेलू कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाए।
मुद्दे
- स्थानीय उपायों की समाप्ति (ELR): सबसे विवादास्पद प्रावधान विदेशी निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय संधि मध्यस्थता का सहारा लेने से पहले कम-से-कम पाँच वर्षों तक भारतीय न्यायालयों में स्थानीय कानूनी और प्रशासनिक उपायों को समाप्त करने के लिए बाध्य करता है।
- एमएफएन (MFN) का बहिष्कार और सीमित दायरा: 2015 के मॉडल में सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (MFN) खंड का अभाव था, “निवेश” की बहुत संकीर्ण परिभाषा थी और कराधान नीतियों को मध्यस्थता से पूरी तरह बाहर रखा गया था।
- वार्ता में गतिरोध: विकसित देशों ने इस मॉडल को अत्यधिक निर्देशात्मक पाया।
- परिणामस्वरूप, भारत को नए समझौतों में प्रवेश करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। 70 से अधिक देशों ने अपने मौजूदा BIT को समाप्त कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप निवेश-संरक्षण में एक महत्वपूर्ण अंतर उत्पन्न हुआ है।
नवीनतम घटनाक्रम और भारत का दृष्टिकोण
- 2015 के मॉडल के एक दशक पूरे होने के बाद भारत अपने मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) की समीक्षा कर रहा है, क्योंकि केंद्रीय बजट 2025-26 में सतत विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए अधिक निवेशक-अनुकूल संरचना का प्रस्ताव किया गया है।
- वित्त मंत्रालय ने मूल्यांकन पूरा कर लिया है और संशोधित मॉडल को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल सचिवालय को भेज दिया है।
- नए ढाँचे से कनाडा सहित 4-5 देशों के साथ BIT पर वार्ता पूरी होने की उम्मीद है।
- यह बदलाव कमजोर FDI रुझानों के बीच हो रहा है, जिसमें 2026 की पहली छमाही में शुद्ध FDI प्रवाह 12 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।
- नए दृष्टिकोण से निवेशकों की सुरक्षा और भारत के नियामक उद्देश्यों के बीच संतुलन स्थापित होने की उम्मीद है।
क्या आप जानते हैं?
- भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), उज्बेकिस्तान और इज़राइल के साथ नई पीढ़ी के निवेश समझौते संपन्न किए हैं।
- भारत-UAE BIT में स्थानीय उपायों को अपनाने के लिए पाँच वर्ष के बजाय तीन वर्ष का प्रावधान है, जो 2015 के मॉडल में पाँच वर्ष था।
- भारत-इज़राइल द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA), जो जुलाई 2026 में लागू हुआ, उसमें भी स्थानीय उपायों को अपनाने के लिए तीन वर्ष का प्रावधान है।
- ये समझौते वर्ष 2015 के बाद भारत की संधि-प्रथा में अधिक लचीलेपन का संकेत देते हैं।
नए मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि के लिए सिफारिशें
- सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (MFN) खंड पर स्पष्टीकरण: MFN खंड, जो ऐतिहासिक रूप से अधिकांश भारतीय संधियों का हिस्सा नहीं रहा है, निवेशकों को अन्य संधियों में उपलब्ध बेहतर सुरक्षा का लाभ लेने की अनुमति देता है।
- यदि इसे नए मॉडल में शामिल किया जाता है, तो इसके दायरे को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाना चाहिए।
- MFN खंडों की अस्पष्टता का उपयोग निवेशकों द्वारा स्थानीय न्यायालयों के मानदंडों से बचने के लिए किया जा सकता है, जैसा कि एमिलियो अगुस्तीन माफेज़िनी (Emilio Agustín Maffezini) बनाम किंगडम ऑफ स्पेन (Kingdom of Spain) मामले में देखा गया था।
- इसलिए, नए मॉडल में किसी भी एमएफएन खंड के अंतर्गत विवाद-निपटान प्रक्रियाओं को स्पष्ट रूप से बाहर रखा जाना चाहिए।
निष्कर्ष
- वैश्विक निवेश व्यवस्था पारंपरिक निवेशक संरक्षण और निवेशक-राज्य विवाद निपटान (ISDS) से हटकर निवेश सुविधा, सहयोग, सतत विकास और स्पष्ट रूप से परिभाषित निवेशक अधिकारों की ओर बढ़ रही है। UNCITRAL स्थायी न्यायाधिकरण, अपीलीय तंत्र, क्षतिपूर्ति से संबंधित नियमों और अधिक मजबूत विवाद-निवारण जैसे सुधारों की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
- इस बदलते परिवेश में भारत का नया मॉडल BIT केवल 2015 की व्यवस्था का संशोधन नहीं है, बल्कि वैश्विक निवेश प्रणाली में भारत का एक रणनीतिक समायोजन है।
- इसलिए, लक्ष्य एक ऐसा स्पष्ट, संतुलित और व्यावहारिक ढाँचा तैयार करना होना चाहिए, जो वास्तविक निवेशक हितों की सुरक्षा करे और साथ ही भारत के नियामक क्षेत्र की रक्षा करे, पिछले एक दशक के अनुभवों से सीख ले तथा अलग-अलग संधि वार्ताओं में लचीलापन बनाए रखे।
| मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न प्रश्न: भारत द्वारा अपने मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) को संशोधित करने का प्रयास विदेशी निवेश आकर्षित करने और राज्य की नियामक स्वायत्तता को बनाए रखने के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता को दर्शाता है। आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। |
स्रोत: TH