पाठ्यक्रम: GS3/बुनियादी ढांचा, परिवहन और लॉजिस्टिक्स
संदर्भ
- भारतीय रेलवे बहुपटरीकरण के माध्यम से उच्च घनत्व वाले रेल मार्गों (HDNs) पर भीड़भाड़ कम करने और अतिरिक्त समर्पित माल ढुलाई गलियारों (DFCs) के विकास में तीव्रता लाकर अपनी माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
माल ढुलाई का महत्व
- माल ढुलाई से होने वाली आय भारतीय रेलवे की कुल आय में 65% से अधिक का योगदान देती है, जिससे यात्री सेवाओं को रियायती दरों पर उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है।
- भारत के कुल माल परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी लगभग 27% है और वर्ष 2025–26 में रेलवे ने 1,670 मिलियन टन माल का परिवहन किया।
- सड़क परिवहन की तुलना में रेल द्वारा माल ढुलाई अपेक्षाकृत सस्ती है और इससे उत्सर्जन भी कम होता है, लेकिन रेल नेटवर्क पर भीड़भाड़ और कमजोर अंतिम छोर तक संपर्क इसकी प्रतिस्पर्धात्मकता को सीमित करते हैं।
- भारतीय रेलवे का लक्ष्य वर्ष 2030 तक माल ढुलाई को बढ़ाकर 3,000 मिलियन टन करना है।
उच्च घनत्व वाले रेल मार्ग (HDNs) के बारे में
- HDNs ऐसे अत्यधिक उपयोग किए जाने वाले यात्री और माल परिवहन मार्ग हैं, जहाँ रेलगाड़ियों की आवाजाही प्रायः निर्धारित रेल लाइन क्षमता के करीब पहुँच जाती है या उसे पार कर जाती है।
- 11,051 किलोमीटर लंबे HDN की लंबाई रेलवे नेटवर्क का केवल लगभग 16% है, लेकिन इस पर रेलवे के कुल यातायात का 40% से अधिक संचालित होता है। इसलिए यह पूरे रेल नेटवर्क के सुचारु संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- सात प्रमुख HDNs हावड़ा–दिल्ली, हावड़ा–मुंबई, मुंबई–दिल्ली, दिल्ली–गुवाहाटी, दिल्ली–चेन्नई, हावड़ा–चेन्नई और मुंबई–चेन्नई को जोड़ते हैं।
- सुचारु रेल परिचालन के लिए लगभग 70–80% नेटवर्क उपयोग स्तर को उपयुक्त माना जाता है।
- हालाँकि, HDN का केवल 4.6% हिस्सा 80% से कम क्षमता पर संचालित होता है, जबकि इसके बड़े हिस्से में क्षमता का उपयोग 100–120%, 120–150% और 150% से अधिक तक पहुँच जाता है।
- भीड़भाड़ का विशेष प्रभाव मालगाड़ियों पर पड़ता है, जिसके कारण मालगाड़ियों की औसत गति लगभग 25 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित रह जाती है।
क्षमता बढ़ाने के लिए बहुपटरीकरण
- बहुपटरीकरण में अत्यधिक उपयोग किए जाने वाले रेल मार्गों पर अतिरिक्त रेल पटरियाँ बिछाई जाती हैं, ताकि यात्री और मालगाड़ी सेवाओं का अधिक लचीले ढंग से संचालन किया जा सके।
- रेलवे सातों HDNs को चार-पटरी वाला बनाने का प्रयास कर रहा है, जिसका उद्देश्य अत्यधिक भार वाले मार्गों को पर्याप्त अतिरिक्त क्षमता वाले मार्गों में परिवर्तित करना है।
- महत्व:
- अतिरिक्त रेल पटरियाँ यात्री और मालगाड़ी सेवाओं के बीच होने वाले परिचालन संबंधी टकराव को कम कर सकती हैं और इस प्रकार पारगमन में होने वाली देरी को घटा सकती हैं।
- कम पारगमन समय से माल की आवाजाही के दौरान होने वाली बर्बादी, क्षति और रख-रखाव से संबंधित हानि को भी कम किया जा सकता है।
- रेल मंत्रालय के अनुसार, रेल द्वारा माल परिवहन की अनुमानित लागत लगभग ₹1.60 प्रति टन-किलोमीटर है, जबकि सड़क परिवहन में यह लगभग ₹3.60 प्रति टन-किलोमीटर है। इससे अधिक मात्रा में माल को सड़क से रेल परिवहन की ओर स्थानांतरित करने की संभावनाएँ स्पष्ट होती हैं।
समर्पित माल ढुलाई गलियारे (DFCs)
- समर्पित माल ढुलाई गलियारे मुख्य रूप से मालगाड़ियों के लिए बनाए गए विशेष रेल मार्ग हैं। इनके माध्यम से यात्री सेवाओं के साथ क्षमता के लिए सीधे प्रतिस्पर्धा किए बिना माल यातायात संचालित किया जा सकता है।
- ये वर्तमान रेल मार्गों के समानांतर बनाए जा सकते हैं या भीड़भाड़ वाले यात्री टर्मिनलों और रेल खंडों से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों से होकर गुजर सकते हैं।
- पूर्वी और पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे: पूर्वी समर्पित माल ढुलाई गलियारा (EDFC) लुधियाना से सोननगर तक और पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारा (WDFC) जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (JNPT) से दादरी तक है।

चुनौतियाँ क्या हैं?
- अपर्याप्त अंतिम छोर तक संपर्क व्यवस्था से माल की ढुलाई में लगने वाला समय और लागत बढ़ जाती है। यह समस्या विशेष रूप से तब होती है, जब रेलवे टर्मिनल औद्योगिक समूहों, बंदरगाहों, खदानों और उपभोग केंद्रों से सीधे जुड़े नहीं होते।
- भीड़भाड़ वाले टर्मिनल और माल लदान की सुविधाएँ मुख्य रेल नेटवर्क पर तेज आवाजाही से होने वाली समय की बचत को कम कर सकती हैं।
- कोयले जैसी थोक वस्तुओं पर निर्भरता रेलवे के माल परिवहन को कंटेनर, वाहन, कृषि उत्पाद और अन्य अधिक मूल्य वाली वस्तुओं तक विविधीकृत करने की क्षमता को सीमित करती है।
निष्कर्ष
- माल ढुलाई की क्षमता का विस्तार केवल प्रथम कदम है। इसका वास्तविक आर्थिक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि विस्तारित रेल नेटवर्क को व्यापक परिवहन एवं रसद व्यवस्था के साथ कितनी कुशलता से एकीकृत किया जाता है।
- एक सुदृढ़ रेल माल परिवहन नेटवर्क भारत को कम रसद लागत, अधिक विश्वसनीय आपूर्ति शृंखलाएँ और टिकाऊ माल परिवहन की दिशा में अधिक प्रभावी बदलाव प्राप्त करने में सहायता कर सकता है।
स्रोत: IE
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