इस वर्ष विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में बहुपक्षीय समझौतों के विरोध के बाद, भारत ने WTO में सुधारों को लेकर अपना प्रस्ताव प्रस्तुत किया। यह प्रस्ताव WTO के ढाँचे में बहुपक्षीय समझौतों को शामिल करने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
पृष्ठभूमि
भारत ने चीन समर्थित विकास के लिए निवेश सुविधा संबंधी बहुपक्षीय समझौते को WTO की नियम-पुस्तिका में शामिल किए जाने का विरोध किया था।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और चीन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत के दृष्टिकोण में बदलाव आया।
भारत ने पाकिस्तान और चीन द्वारा गठित सीमा संयुक्त आयोग को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि अवैध नियन्त्रण वाले भारतीय क्षेत्र से संबंधित व्यवस्थाओं पर निर्णय लेने के लिए इस निकाय का कोई कानूनी आधार नहीं है।
पृष्ठभूमि
पाकिस्तान और चीन ने वर्ष 1963 में एक सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके अंतर्गत पाकिस्तान ने कथित रूप से शक्सगाम घाटी के लगभग 5,800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को चीन को सौंप दिया था।
नवगठित पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग की प्रथम बैठक इस्लामाबाद में आयोजित की गई।
भारतीय रेलवे बहुपटरीकरण के माध्यम से उच्च घनत्व वाले रेल मार्गों (HDNs) पर भीड़भाड़ कम करने और अतिरिक्त समर्पित माल ढुलाई गलियारों (DFCs) के विकास में तीव्रता लाकर अपनी माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
माल ढुलाई का महत्व
माल ढुलाई से होने वाली आय भारतीय रेलवे की कुल आय में 65% से अधिक का योगदान देती है, जिससे यात्री सेवाओं को रियायती दरों पर उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है।
भारत के कुल माल परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी लगभग 27% है और वर्ष 2025–26 में रेलवे ने 1,670 मिलियन टन माल का परिवहन किया।
भारत में E20 पेट्रोल को तीव्रता से अपनाए जाने के कारण ईंधन दक्षता, घरेलू व्यय, उत्सर्जन, खाद्य सुरक्षा और इथेनॉल मिश्रण से होने वाली विदेशी मुद्रा बचत को लेकर परिचर्चा पुनः तीव्र हो गई है।
E20 क्या है?
E20 पेट्रोल में 20% निर्जल इथेनॉल और 80% मोटर गैसोलीन होता है। भारत ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2023 में चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर E20 की खुदरा बिक्री शुरू की।
इस नीति का उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, घरेलू जैव ईंधन उत्पादन को बढ़ावा देना, किसानों को समर्थन देना और परिवहन क्षेत्र की कार्बन तीव्रता को कम करना है।
विश्व आर्थिक मंच द्वारा जारी वैश्विक लैंगिक अंतर सूचकांक 2026 में भारत ने 131वाँ स्थान बरकरार रखा है। भारत से नीचे केवल 14 अर्थव्यवस्थाएँ हैं।
परिचय
वर्ष 2006 में शुरू किए गए इस सूचकांक के माध्यम से चार आयामों में लैंगिक समानता की दिशा में हुई प्रगति का आकलन किया जाता है: आर्थिक भागीदारी और अवसर, शैक्षिक उपलब्धि, स्वास्थ्य एवं जीवन-रक्षा तथा राजनीतिक सशक्तीकरण।
सूचकांक में 0 से 1 तक के पैमाने का उपयोग किया जाता है, जिसमें 1 पूर्ण लैंगिक समानता को दर्शाता है।