नीले आसमान के लिए स्वच्छ वायु का अंतर्राष्ट्रीय दिवस

पाठ्यक्रम: जीएस-3/पर्यावरण

सन्दर्भ

  • नीले आसमान के लिए स्वच्छ वायु का अंतर्राष्ट्रीय दिवस विश्व स्तर पर 7 सितंबर को मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वायु प्रदूषण के विरुद्ध वैश्विक कार्रवाई को मजबूत करने के लिए 2019 में इस दिवस को नामित किया था।

वायु प्रदूषण

  • वायु प्रदूषण तब होता है जब हानिकारक पदार्थ वायुमंडल में ऐसी सांद्रता में जमा हो जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को प्रभावित कर सकते हैं।
  • प्रदूषक गैसों, तरल बूंदों या ठोस कणों के रूप में मौजूद हो सकते हैं और प्राकृतिक प्रक्रियाओं के साथ-साथ मानवीय गतिविधियों से भी उत्पन्न हो सकते हैं।
  • सामान्य वायु प्रदूषकों में कणिकीय पदार्थ (PM), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂), सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), ओजोन (O₃), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs), सीसा आदि शामिल हैं।
  • कणिकीय पदार्थ (PM) वायुमंडल में निलंबित अत्यंत छोटे ठोस या तरल कण होते हैं, जिन्हें सामान्यतः PM10 और PM2.5 के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
  • PM10 कणों का व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम, जबकि PM2.5 कणों का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है।
  • इनका छोटा आकार सूक्ष्म कणों को श्वसन तंत्र में अधिक गहराई तक प्रवेश करने में सक्षम बनाता है, जिनमें से कुछ संभावित रूप से रक्तप्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं।

भारत में वायु प्रदूषण (विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2025)

  • भारत दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में छठे स्थान पर रहा, जहाँ राष्ट्रीय औसत PM2.5 सांद्रता 48.9 µg/m³ थी।
  • यह WHO की 5 µg/m³ की सुरक्षित सीमा से लगभग दस गुना अधिक है।
  • दुनिया के शीर्ष 25 सबसे प्रदूषित शहरों में से सभी या तो पाकिस्तान, भारत या चीन में स्थित थे।
  • गाजियाबाद का लोनी 2025 में दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहाँ वार्षिक औसत PM2.5 112.5 µg/m³ दर्ज किया गया। इसके ठीक पीछे मेघालय का बर्नीहाट रहा, जो वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर था, जबकि दिल्ली चौथे स्थान पर रही।

भारत में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सरकारी पहल

  • राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (NAMP): केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी (NAAQM) कार्यक्रम शुरू किया था। बाद में इसका नाम बदलकर NAMP कर दिया गया।
  • इसके उद्देश्यों में समय-समय पर वायु प्रदूषण का मूल्यांकन करना, शहरी क्षेत्रों में परिवेशी वायु गुणवत्ता की स्थिति और प्रवृत्ति निर्धारित करना तथा भविष्य में होने वाले परिवर्तनों का अनुमान लगाना शामिल है।
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP): 2019 में शुरू किया गया NCAP भारत के चिन्हित शहरों और क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से एक व्यापक पहल है।
  • यह कार्यक्रम वायु गुणवत्ता निगरानी में सुधार, अधिक कड़े उत्सर्जन मानकों को लागू करने और जन-जागरूकता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
  • भारत स्टेज VI (BS-VI) उत्सर्जन मानक: सरकार ने 2020 में देशभर में वाहनों के लिए BS-VI उत्सर्जन मानक लागू किए।
  • इन मानकों का उद्देश्य स्वच्छ ईंधन के उपयोग और अधिक उन्नत उत्सर्जन नियंत्रण तकनीकों को अनिवार्य करके वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है।
  • स्वच्छ वायु सर्वेक्षण: यह NCAP के तहत 130 शहरों का वार्षिक मूल्यांकन है। इसे 2022-23 में शुरू किया गया था और यह MoEFCC की पहल है।
  • इस मूल्यांकन में प्रमुख प्रदूषण स्रोतों से निपटने के उपायों और शहर-विशिष्ट स्वच्छ वायु कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन को शामिल किया जाता है।
  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY): PMUY योजना का उद्देश्य पारंपरिक बायोमास-आधारित खाना पकाने के तरीकों के विकल्प के रूप में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) के उपयोग को बढ़ावा देकर परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराना है।
  • FAME (हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना और उनका विनिर्माण) योजना: FAME योजना वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देती है।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए निर्माताओं और उपभोक्ताओं दोनों को प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।
  • सतत आवास के लिए हरित पहल (GRIHA): GRIHA इमारतों के निर्माण और संचालन में सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देने की एक पहल है।
  • यह प्रदूषण को कम करने के लिए ऊर्जा-कुशल तकनीकों और सामग्रियों के उपयोग को प्रोत्साहित करती है।
  • अपशिष्ट प्रबंधन कार्यक्रम: उचित अपशिष्ट प्रबंधन कचरे को जलाने से रोकने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कचरा जलाना वायु प्रदूषण में योगदान देता है।
  • स्वच्छ भारत अभियान सहित विभिन्न अपशिष्ट प्रबंधन पहलों का उद्देश्य ठोस अपशिष्ट की समस्याओं का समाधान करना और अधिक स्वच्छ निपटान विधियों को बढ़ावा देना है।
  • वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM): राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए इस आयोग की स्थापना की गई है, ताकि वायु गुणवत्ता सूचकांक से संबंधित समस्याओं के बेहतर समन्वय, अनुसंधान, पहचान और समाधान को सुनिश्चित किया जा सके।
  • वनीकरण कार्यक्रम: ग्रीन इंडिया मिशन जैसी पहलों का उद्देश्य वृक्ष आवरण को बढ़ाना है, जो प्रदूषकों को अवशोषित करने और वायु गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकता है।

आगे की राह

  • भारत के स्वच्छ वायु प्रयासों का ध्यान लगातार दीर्घकालिक, स्रोत-विशिष्ट और विज्ञान-आधारित हस्तक्षेपों पर केंद्रित होता जाएगा।
  • वायु गुणवत्ता की निगरानी को और मजबूत करने से प्रदूषण के स्रोतों और उभरते प्रदूषण हॉटस्पॉट की बेहतर पहचान संभव होगी।
  • राज्य, शहर और जिला प्रशासन राष्ट्रीय कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर मापनीय सुधारों में बदलने में केंद्रीय भूमिका निभाते रहेंगे।
  • निरंतर नवाचार स्वच्छ तकनीकों और अधिक प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों को सक्षम बना सकता है।
  • सहयोगात्मक शासन और मापनीय परिणामों पर भारत का निरंतर ध्यान स्वच्छ वायु और स्वस्थ समुदायों की दिशा में प्रगति को तेज कर सकता है।

स्रोत: PIB

 

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