पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतरराष्ट्रीय सम्बन्ध
सन्दर्भ
- केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने भारत में जापानी निवेश को गति देने के उद्देश्य से जापान की अपनी आधिकारिक यात्रा संपन्न की।
प्रमुख बिंदु
- उद्देश्य: अगले दशक में भारत में 10 ट्रिलियन जापानी येन के जापानी निजी निवेश के लक्ष्य को आगे बढ़ाना, जिस पर 2025 में प्रधानमंत्री की जापान यात्रा के दौरान सहमति बनी थी।
- निवेश को गति देने, औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करने और आर्थिक सहयोग को गहरा करने के लिए जापानी सरकार के नेताओं, वित्तीय संस्थानों और व्यापारिक अधिकारियों के साथ उच्च-स्तरीय बैठकों की एक श्रृंखला आयोजित की गई।
- भारत ने छह-स्तंभ वाली रणनीति प्रस्तुत की, जिसमें चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर मशीनरी और सामग्री, फैब्रिकेशन, ATMP/OSAT, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा विकास शामिल हैं।
- इस यात्रा से भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को नई गति मिली, जिसमें व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और लचीली आपूर्ति शृंखलाओं से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत-जापान संबंधों का संक्षिप्त विवरण
- संबंधों की स्थापना: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत ने जापान के साथ एक अलग शांति संधि का विकल्प चुना, जिस पर 1952 में हस्ताक्षर हुए। इसने औपचारिक राजनयिक संबंधों की शुरुआत को चिह्नित किया।
- भारत और जापान ने 2018 से 2+2 विदेश एवं रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक की व्यवस्था स्थापित की है। अब तक 2+2 विदेश एवं रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक के तीन दौर आयोजित किए जा चुके हैं।
- द्विपक्षीय संबंधों में वृद्धि: भारत-जापान द्विपक्षीय संबंधों को 2000 में वैश्विक साझेदारी, 2006 में रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी तथा 2014 में विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया।
- रणनीतिक तालमेल: भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI), जापान की स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक (FOIP) नीति के साथ घनिष्ठ रूप से संरेखित हैं।
- द्विपक्षीय व्यापार: भारत-जापान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) 2011 में लागू हुआ। वित्त वर्ष 2025-26 में जापान के साथ भारत का कुल व्यापार 27.48 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें निर्यात 6.04 बिलियन अमेरिकी डॉलर और आयात 21.44 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
- 2024-25 में जापान के कुल व्यापार में भारत का स्थान 18वाँ रहा, जिसमें भारत की हिस्सेदारी 1.4% थी, जबकि भारत के कुल व्यापार में जापान 17वें स्थान पर रहा, जिसकी हिस्सेदारी 2.1% थी।
- वैश्विक पहलों पर सहयोग: जापान और भारत अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), आपदा-रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन (CDRI) और उद्योग संक्रमण के लिए नेतृत्व समूह (LeadIT) जैसी पहलों में सहयोग करते हैं।
- दोनों देश जापान-ऑस्ट्रेलिया-भारत-अमेरिका क्वाड और भारत-जापान-ऑस्ट्रेलिया आपूर्ति शृंखला लचीलापन पहल (SCRI) जैसे बहुपक्षीय ढाँचों में भी मिलकर कार्य करते हैं।
- रक्षा एवं सुरक्षा: सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा (2008), रक्षा सहयोग एवं आदान-प्रदान समझौता ज्ञापन (2014), सूचना संरक्षण समझौता (2015), पारस्परिक आपूर्ति एवं सेवाओं के प्रावधान संबंधी समझौता (2020) और UNICORN नौसैनिक मस्तूल का सह-विकास (2024) प्रमुख रक्षा सहयोग पहल हैं।
- अभ्यास: मालाबार (अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ), मिलन (बहुपक्षीय नौसैनिक), JIMEX (द्विपक्षीय समुद्री), धर्म गार्जियन (थल सेना) तथा तटरक्षक सहयोग नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं।
- वर्ष 2024-25 में भारत और जापान में सेवा प्रमुखों की भागीदारी देखी गई, जिससे अंतर-संचालन क्षमता (Interoperability) मजबूत हुई।
- विकास और अवसंरचना सहयोग: 1958 से जापान भारत का सबसे बड़ा आधिकारिक विकास सहायता (ODA) दाता रहा है, जो महत्वपूर्ण अवसंरचना और मानव विकास परियोजनाओं को समर्थन देता है। 2024-25 में भारत को जापान की ODA सहायता लगभग 440 बिलियन जापानी येन रही।
- मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल उन्नत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और कौशल विकास का प्रतीक प्रमुख परियोजना है।
- निवेश: 2000 से 2026 तक भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) इक्विटी प्रवाह लगभग 48.14 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा है। FDI स्रोत देशों में जापान पाँचवें स्थान पर है और भारत में कुल FDI में इसकी हिस्सेदारी 6% है।
- भारत में जापानी FDI मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, विद्युत उपकरण, दूरसंचार, रसायन, वित्तीय (बीमा) और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्रों में रहा है।
- भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम: 2017 में स्थापित, इसका उद्देश्य भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” और जापान के “स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के विज़न” के तहत भारत-जापान सहयोग के लिए एक मंच प्रदान करना है।
- अंतरिक्ष सहयोग: ISRO और JAXA एक्स-रे खगोल विज्ञान, उपग्रह नेविगेशन, चंद्र अन्वेषण और एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय अंतरिक्ष एजेंसी फोरम (APRSAF) में सहयोग करते हैं।
- वर्ष 2016 में दोनों ने शांतिपूर्ण अंतरिक्ष अन्वेषण और उपयोग के लिए सहयोग ज्ञापन (MoC) पर हस्ताक्षर किए।
- दोनों पक्ष चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण मिशन पर सहयोग कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र का अन्वेषण करना है। इसका प्रक्षेपण 2026-27 के लिए निर्धारित है।
- पर्यटन: 2023-24 को पर्यटन आदान-प्रदान वर्ष के रूप में मनाया गया, जिसकी थीम “हिमालय को माउंट फ़ूजी से जोड़ना” थी।
- प्रवासी समुदाय: लगभग 54,000 भारतीय जापान में रहते हैं, जिनमें मुख्यतः IT पेशेवर और इंजीनियर शामिल हैं।
- उभरते हुए प्रमुख क्षेत्र: डिजिटल सहयोग (सेमीकंडक्टर, स्टार्टअप), स्वच्छ ऊर्जा, आपूर्ति शृंखला लचीलापन, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और कौशल विकास।
चिंताएँ
- व्यापार असंतुलन: महत्वपूर्ण व्यापार असंतुलन है, जिसमें जापान भारत को भारत द्वारा जापान को किए जाने वाले निर्यात की तुलना में अधिक निर्यात करता है। इससे बेहतर पारस्परिक व्यापार की आवश्यकता उत्पन्न होती है।
- सांस्कृतिक और भाषाई बाधाएँ: मजबूत संबंधों के बावजूद, भाषा, संस्कृति और व्यावसायिक प्रथाओं में अंतर गहरे एकीकरण के लिए चुनौतियाँ उत्पन्न करते हैं।
- सीमित जन-से-जन आदान-प्रदान: जन-से-जन संपर्क का स्तर अभी भी सीमित है, जिससे आपसी समझ को और गहरा करने की क्षमता प्रभावित होती है।
- अवसंरचनात्मक बाधाएँ: सुधारों के बावजूद, भारत के कुछ क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जापानी निवेश को प्रभावी ढंग से समर्थन देने के लिए आवश्यक अवसंरचना का अभी भी अभाव है।
- अलग-अलग आर्थिक प्राथमिकताएँ: भारत का तीव्र आर्थिक विकास पर ध्यान कभी-कभी जापान के सतत विकास और प्रौद्योगिकी पर जोर के विपरीत हो सकता है।
आगे की राह
- व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना: जापान को भारतीय निर्यात बढ़ाकर व्यापार असंतुलन को कम करने तथा भारत के विनिर्माण और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में जापानी निवेश को प्रोत्साहित करने पर ध्यान देना।
- जन-से-जन संपर्क को बढ़ावा देना: आपसी समझ को गहरा करने के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन और शैक्षिक सहयोग को बढ़ाना।
- प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी: प्रौद्योगिकी में जापान की विशेषज्ञता और भारत के बढ़ते डिजिटल क्षेत्र का लाभ उठाते हुए AI, रोबोटिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और अंतरिक्ष अन्वेषण में सहयोग करना।
- पर्यावरण संबंधी चिंताओं का समाधान: दोनों देशों के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को समर्थन देने के लिए पर्यावरणीय स्थिरता, जलवायु परिवर्तन और आपदा लचीलापन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना।
स्रोत: DD
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