पाठ्यक्रम: जीएस-3/अंतरिक्ष
चर्चा में क्यों?
- मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (MAHE), ISRO, अंतरिक्ष विभाग और अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने सौर ज्वालाओं (Solar Flares) के अध्ययन के लिए आदित्य-L1 के डेटा का उपयोग किया है।

आदित्य एल-1
- आदित्य-L1 अंतरिक्ष यान को 2023 में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC), श्रीहरिकोटा से PSLV-C57 के माध्यम से PSLV-XL कॉन्फ़िगरेशन में प्रक्षेपित किया गया।
- यह सूर्य का अध्ययन करने वाला भारत का पहला अंतरिक्ष-आधारित वेधशाला-श्रेणी का सौर मिशन है।
- इसे सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंज बिंदु 1 (L1) के चारों ओर हेलो कक्षा में स्थापित किया गया है, जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर है।
सौर ज्वालाएँ (Solar Flares)
- सौर ज्वालाएँ सूर्य से निकलने वाले विद्युतचुंबकीय विकिरण के अचानक और तीव्र विस्फोट हैं।
- ऐसा माना जाता है कि ये चुंबकीय ऊर्जा के मुक्त होने के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती हैं।
- सौर ज्वालाएँ अक्सर कोरोनल मास इजेक्शन (CME) नामक सौर चुंबकीय तूफानों के साथ होती हैं।
- सौर ज्वालाएँ लगभग हर 11 वर्ष के आसपास अधिक बार घटित होती हैं।

- क्षेत्रों (fields) को सक्रिय करना, जिससे बड़ी सौर ज्वालाएँ उत्पन्न होती हैं।
- यह सौर ज्वालाओं के निर्माण की समझ को बेहतर करता है।
- यह अधिक विश्वसनीय सौर ज्वाला और अंतरिक्ष-मौसम पूर्वानुमान में योगदान दे सकता है, जिससे उपग्रहों, अंतरिक्ष यात्रियों, संचार प्रणालियों और अन्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों की सुरक्षा में मदद मिलेगी।
स्रोत :TH
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संक्षिप्त समाचार 31-08-2026