प्रधानमंत्री मोदी की उज़्बेकिस्तान यात्रा

पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतरराष्ट्रीय सम्बन्ध

सन्दर्भ

  • प्रधानमंत्री मोदी ने उज़्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा की।

प्रमुख बिंदु

  • भारत और उज़्बेकिस्तान ने अपनी पारस्परिक रणनीतिक साझेदारी को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने की घोषणा की।
  • दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक 5 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य निर्धारित करने पर सहमति व्यक्त की, जो वर्तमान व्यापार का 5 गुना है।
  • अराल सागर क्षेत्र में वनीकरण के लिए 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान।
  • उज़्बेकिस्तान ने भारत को यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक रूपरेखा स्थापित करने तथा दुर्लभ मृदा खनिजों के खनन के स्थलों पर चर्चा करने पर भी सहमति व्यक्त की।
  • NPCI International Payments Ltd (NIPL) और National Interbank Processing Centre JSC (NIPC) के बीच वाणिज्यिक समझौता, जिसके तहत भारत के UPI ऐप्स उज़्बेकिस्तान में व्यापारी भुगतान करने के लिए राष्ट्रीय QR — UZQR को स्कैन कर सकेंगे।
  • वर्ष 2026-30 के लिए भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम।
  • उज़्बेकिस्तान के तेरमेज़ में स्थित प्राचीन बौद्ध स्थलों फयाज़ तेपा और कारा तेपा के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन के लिए आशय पत्र (Letter of Intent)।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदेशी नेताओं के लिए उज़्बेकिस्तान के सर्वोच्च पुरस्कार, अर्थात् “ओलिय दराजाली दोस्तलिक” (Oliy Darajali Do’stlik) ऑर्डर, से भी सम्मानित किया गया।

भारत-उज़्बेकिस्तान संबंधों का संक्षिप्त विवरण

  • संबंधों की स्थापना: दोनों देशों ने 1992 में राजनयिक संबंध स्थापित किए। भारत और उज़्बेकिस्तान ने 2011 में अपनी रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की।
  • द्विपक्षीय व्यापार और निवेश: भारत उज़्बेकिस्तान के शीर्ष 10 व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1.32 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो संभावित स्तर से काफी कम है।
  • उज़्बेकिस्तान में भारत का कुल निवेश लगभग 451 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। भारतीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश में फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और आवासीय भवन निर्माण शामिल हैं।
  • रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग: 2019 में रक्षा संबंधी संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) की स्थापना की गई। भारत और उज़्बेकिस्तान नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास “DUSTLIK” में भाग लेते हैं।
  • भारत-मध्य एशिया राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों/सुरक्षा परिषदों के सचिवों की तीसरी बैठक 2025 में आयोजित हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों की समीक्षा की गई तथा आतंकवाद-रोधी और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाया गया।
  • सांस्कृतिक सहयोग: भारतीय फिल्में, अभिनेता और गाने उज़्बेकिस्तान में बेहद लोकप्रिय हैं। योग भी अत्यधिक लोकप्रिय है और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में 2,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल होते हैं।
  • प्रवासी समुदाय एवं जन-से-जन संबंध: भारतीय समुदाय की संख्या लगभग 21,000 अनुमानित है, जिसमें विद्यार्थी, श्रमिक और व्यावसायिक पेशेवर शामिल हैं।
  • पहली भारत-उज़्बेकिस्तान कांसुलर वार्ता 2025 में आयोजित हुई, जिसमें वीज़ा प्रक्रियाओं, कांसुलर सहयोग और सुरक्षा मामलों पर चर्चा की गई।
  • बहुपक्षीय सहयोग: भारत और उज़्बेकिस्तान संयुक्त राष्ट्र (UN), G20, BRICS और SCO जैसे कई बहुपक्षीय मंचों पर निकटता से सहयोग करते हैं।

भारत के लिए उज़्बेकिस्तान का महत्व 

  • रणनीतिक स्थिति: उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया के केंद्र में रणनीतिक रूप से स्थित है, जो व्यापक यूरेशियाई क्षेत्र के साथ भारत के जुड़ाव तथा अन्य प्रमुख शक्तियों के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए इसे महत्वपूर्ण बनाता है।

मध्य एशिया

  • मध्य एशिया एशिया का एक स्थलरुद्ध केंद्रीय क्षेत्र है, जो पश्चिम में कैस्पियन सागर से लेकर पूर्व में पश्चिमी चीन की सीमा तक विस्तृत है।
  • इसकी सीमाएँ उत्तर में रूस तथा दक्षिण में ईरान, अफगानिस्तान और चीन से लगती हैं।
  • इस क्षेत्र में पूर्व सोवियत गणराज्य कजाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और तुर्कमेनिस्तान शामिल हैं।
  • मध्य एशिया की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति इसकी ऐतिहासिक “रेशम व्यापार मार्गों (Silk Trade Routes)” से जुड़ी हुई है और यह क्षेत्रीय तथा उससे आगे की भू-राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।

  • कनेक्टिविटी: मध्य एशिया के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने के भारत के प्रयासों में उज़्बेकिस्तान महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से चाबहार बंदरगाह और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के माध्यम से।
  • ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज: उज़्बेकिस्तान एक महत्वपूर्ण यूरेनियम उत्पादक है, जिसकी 2024 में वैश्विक उत्पादन में लगभग 6.6% हिस्सेदारी थी। इससे भारत के लिए अपनी ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने के अवसर पैदा होते हैं।
  • सुरक्षा सहयोग: दोनों देश आतंकवाद, उग्रवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और अफगानिस्तान में अस्थिरता को लेकर समान चिंताएँ साझा करते हैं। संयुक्त सैन्य अभ्यासों सहित रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा समन्वय को मजबूत करता है।
  • आर्थिक क्षमता: उज़्बेकिस्तान भारतीय निवेश और व्यापार के लिए फार्मास्यूटिकल्स, IT, कृषि, वस्त्र, खनन, ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में अवसर प्रदान करता है।
  • क्षेत्रीय कूटनीति: उज़्बेकिस्तान शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का एक प्रमुख सदस्य और भारत की कनेक्ट सेंट्रल एशिया नीति में एक महत्वपूर्ण साझेदार है।

चिंताएँ

  • सीमित द्विपक्षीय व्यापार: महत्वपूर्ण संभावनाओं के बावजूद, भौगोलिक दूरी, सीमित कनेक्टिविटी और उच्च परिवहन लागत के कारण भारत-उज़्बेकिस्तान व्यापार अपेक्षाकृत कम बना हुआ है।
  • कनेक्टिविटी संबंधी बाधाएँ: पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति के कारण भारत के पास मध्य एशिया तक सीधी स्थलीय पहुँच नहीं है। ईरान और अफगानिस्तान से होकर जाने वाले मार्गों पर निर्भरता कनेक्टिविटी को भू-राजनीतिक व्यवधानों के प्रति संवेदनशील बनाती है।
  • चीन का बढ़ता प्रभाव: बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के माध्यम से चीन उज़्बेकिस्तान के एक प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरा है, जिससे मध्य एशिया में भारत के आर्थिक और रणनीतिक विस्तार के लिए अधिक प्रतिस्पर्धा उत्पन्न हो रही है।

आगे की राह

  • कनेक्टिविटी को बढ़ाना: भौगोलिक बाधाओं को दूर करते हुए भारत और मध्य एशिया के बीच विश्वसनीय व्यापार मार्ग स्थापित करने के लिए चाबहार बंदरगाह और INSTC को मजबूत करना।
  • सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना: आतंकवाद-रोधी प्रयासों, खुफिया जानकारी साझा करने और रक्षा सहयोग का विस्तार करना तथा अफगानिस्तान से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों पर अधिक समन्वय करना।
  • क्षेत्रीय साझेदारियों का निर्माण: कनेक्टिविटी, आतंकवाद, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता के संबंध में समन्वय के लिए SCO और भारत-मध्य एशिया तंत्र जैसे मंचों का उपयोग करना।

स्रोत: PMO

 

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