परिपूर्ण पीड़ित(perfect victim)’ या ‘आदर्श पीड़ित(ideal victim)’ की अवधारणा
पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन
संदर्भ
- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 2021 में ट्रायल कोर्ट द्वारा तरुण तेजपाल को बरी किए जाने के निर्णय को निरस्त कर दिया।
- उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट इस धारणा से प्रभावित हो गया था कि यौन उत्पीड़न की शिकायतकर्ता को एक ‘परिपूर्ण पीड़ित’ की तरह व्यवहार करना चाहिए और विश्वसनीय प्रतीत होने के लिए एक निश्चित तरीके से आचरण करना चाहिए।
‘परिपूर्ण पीड़ित’ या ‘आदर्श पीड़ित’ की अवधारणा
- ‘परिपूर्ण पीड़ित’ (Perfect Victim) या ‘आदर्श पीड़ित’ (Ideal Victim) की अवधारणा का सिद्धांत नॉर्वे के अपराधशास्त्री निल्स क्रिस्टी ने वर्ष 1986 में प्रस्तुत किया था।
- उनके अनुसार, ‘परिपूर्ण पीड़ित’ में पाँच प्रमुख विशेषताएँ होती हैं:
- वह प्रायः महिला, दिव्यांग, बहुत कम आयु का अथवा बहुत वृद्ध व्यक्ति होता है और इसलिए अपराधी की तुलना में कमजोर स्थिति में होता है।
- वह “सम्मानजनक गतिविधियों” में संलग्न होता है।
- अपराध के समय वह जिस स्थान पर उपस्थित होता था, वहाँ होने के लिए उसे तर्कसंगत रूप से दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
- वह अपराधी को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता होता।
- उस पर ऐसा अपराधी हमला करता है, जिसे “शक्तिशाली और दुष्ट” माना जाता है।
- पीड़ित होने की यह एकरूप एवं सीमित अवधारणा मीडिया, सोशल मीडिया, फिल्मों और व्यापक समाज द्वारा बड़े स्तर पर प्रचारित की जाती है।
- ‘आदर्श पीड़ित’ की यह संकीर्ण धारणा पीड़ितीकरण की एक श्रेणीबद्ध व्यवस्था निर्मित करती है।
- जिन लोगों को “अयोग्य” या “सहानुभूति के योग्य नहीं” माना जाता है, उनके बारे में यह धारणा भी बना दी जाती है कि उन्होंने स्वयं उस परिस्थिति में योगदान दिया था।
- परिणामस्वरूप, उन्हें कम या बिल्कुल भी सहानुभूति प्राप्त नहीं होती।
- उच्च न्यायालय का दृष्टिकोण: उच्च न्यायालय ने सत्र न्यायालय की आलोचना करते हुए कहा कि उसने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों के बजाय शिकायतकर्ता के आचरण, प्रतिक्रियाओं और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि पर अधिक ध्यान केंद्रित किया।
- हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक लेखन में अधिक लैंगिक संवेदनशीलता अपनाने की सिफारिश करते हुए एक रिपोर्ट जारी की।
- इसमें न्यायाधीशों को आगाह किया गया कि वे रिपोर्ट दर्ज कराने में देरी, शारीरिक चोटों का अभाव, गवाही में असंगतियाँ अथवा पीड़िता/उत्तरजीवी के हाव-भाव के आधार पर प्रतिकूल निष्कर्ष न निकालें, क्योंकि आघात प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करता है।
स्रोत: TH
कोकिंग कोयला (Coking Coal)
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- ऑस्ट्रेलिया और चीन में आपूर्ति संबंधी व्यवधानों तथा ईरान युद्ध के कारण कोकिंग कोयले की कीमतों में वृद्धि हो रही है। इससे इस्पात उत्पादन की लागत बढ़ने के कारण भारतीय इस्पात मिलों के लाभ मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है।
कोकिंग कोयले के बारे में
- भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक है और अपनी कोकिंग कोयले की आवश्यकताओं का लगभग 90% आयात के माध्यम से पूरा करता है। इन आयातों में ऑस्ट्रेलिया की हिस्सेदारी कम-से-कम 50% है।
- इस्पात निर्माण में कोयले को कोक में परिवर्तित किया जाता है। यह उच्च-कार्बन ईंधन है, जो ब्लास्ट फर्नेस में आवश्यक अत्यधिक ताप उत्पन्न करता है तथा लौह अयस्क से लोहा निकालने में सहायता करता है।
- कोकिंग कोयला इस्पात उत्पादन की कुल लागत का लगभग 40% हिस्सा होता है।
- कोकिंग कोयले में उपयुक्त गुण और अपेक्षाकृत कम राख की मात्रा होती है, जिससे ब्लास्ट फर्नेस में आवश्यक सुदृढ़ कोक का उत्पादन किया जा सकता है।
- इसके विपरीत, गैर-कोकिंग कोयला में अपेक्षाकृत अधिक राख होने के बावजूद यह बॉयलर और टर्बाइनों को संचालित करने के लिए पर्याप्त ऊष्मा उत्पन्न कर सकता है। इसलिए यह मुख्यतः विद्युत उत्पादन के लिए उपयुक्त है।
पहल
- मिशन कोकिंग कोल (2021): इसका उद्देश्य घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन को बढ़ाकर 140 मिलियन टन (MT) करना और वर्ष 2030 तक इस्पात निर्माण में घरेलू कोयले के मिश्रण की हिस्सेदारी 10% से बढ़ाकर 30% करना है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
- महत्त्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज: सरकार ने घरेलू अन्वेषण और उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) के अंतर्गत कोकिंग कोयले को महत्त्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज के रूप में अधिसूचित किया है।
स्रोत: IE
न्यू डेवलपमेंट बैंक
पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध; GS3/अर्थव्यवस्था
चर्चा में
- ईरान ने BRICS देशों के साथ मौद्रिक, वित्तीय और बैंकिंग सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) में शामिल होने का निर्णय लिया है।
न्यू डेवलपमेंट बैंक के बारे में
- न्यू डेवलपमेंट बैंक एक बहुपक्षीय विकास बैंक है, जिसकी स्थापना ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका (BRICS) द्वारा की गई थी।
- इसकी स्थापना 2015 में हुई थी। इसकी सदस्यता संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के साथ-साथ उधार लेने वाले और गैर-उधार लेने वाले देशों के लिए खुली है।
- इसका उद्देश्य उभरते बाजारों और विकासशील देशों में बुनियादी ढाँचे तथा सतत विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाना है।
सदस्य
- NDB के सदस्यों में वर्तमान में:
- भारत
- ब्राजील
- रूस
- चीन
- दक्षिण अफ्रीका
- बांग्लादेश
- संयुक्त अरब अमीरात
- मिस्र
- अल्जीरिया शामिल हैं।
- उज़्बेकिस्तान न्यू डेवलपमेंट बैंक का दसवाँ सदस्य तथा संस्था में शामिल होने वाला प्रथम मध्य एशियाई देश बना।
- मुख्य क्षेत्र:
| BRICS यह विश्व के ग्यारह प्रमुख उभरते बाजारों एवं विकासशील देशों को एक साथ लाता है: ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात।यह वैश्विक एवं क्षेत्रीय महत्त्व वाले समसामयिक मुद्दों तथा वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक शासन से संबंधित विषयों पर परामर्श एवं सहयोग के लिए एक उपयोगी मंच के रूप में कार्य करता है।यह समूह 11 सदस्य देशों से मिलकर बना है। |
स्रोत: Reuters
हेलिकेज(Helicase): DNA को पृथक करने वाला एंजाइम
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- हाल ही में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया है कि कोशिकाएँ यह कैसे सुनिश्चित करती हैं कि वे सही समय पर ही DNA की प्रतिकृति बनाना शुरू करें।
हेलिकेज के बारे में
- हेलिकेज (Helicase) एक एंजाइम है, जो DNA की दो शृंखलाओं को खोलता और अलग करता है, ताकि कोशिका उनमें संग्रहीत आनुवंशिक सूचना की प्रतिलिपि बना सके।
- DNA सामान्यतः एक द्विकुंडलित संरचना (Double Helix) में पाया जाता है। इसमें दो लंबी शृंखलाएँ होती हैं, जो प्रत्येक शृंखला के क्षारकों (Bases) के बीच बनने वाले बंधों द्वारा एक-दूसरे से जुड़ी रहती हैं और परस्पर सर्पिलाकार रूप में लिपटी होती हैं।
- जब कोई कोशिका विभाजित होती है, तो उसे DNA की एक प्रतिलिपि बनानी होती है। इसके लिए DNA की दोनों शृंखलाओं को एक-दूसरे से अलग करना आवश्यक होता है।

- हेलिकेज DNA के एक विशिष्ट क्षेत्र से जुड़ता है और DNA अणु के साथ आगे बढ़ता है।
- यह ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) से ऊर्जा प्राप्त करता है। ATP कोशिका में रासायनिक ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। हेलिकेज इस ऊर्जा का उपयोग अपनी संरचना में परिवर्तन करने तथा DNA की दोनों शृंखलाओं को एक-दूसरे से अलग करने के लिए करता है।
- इसके परिणामस्वरूप Y-आकार का एक क्षेत्र बनता है, जिसे प्रतिकृति फोर्क कहा जाता है। इस स्थान पर DNA की दोनों शृंखलाएँ खुली अवस्था में होती हैं।
- टोपोआइसोमेरेज़ नामक अन्य एंजाइम DNA में उत्पन्न घुमाव और तनाव को कम करते हैं तथा DNA को उलझने या टूटने से बचाते हैं।
- एक बार हेलिकेज द्वारा DNA की दोनों शृंखलाओं को अलग कर दिए जाने के बाद, अन्य प्रतिकृति तंत्र इन खुली हुई शृंखलाओं में से प्रत्येक का उपयोग टेम्पलेट के रूप में करके नई DNA शृंखला का निर्माण कर सकते हैं।
स्रोत: TH
रायचूर मियावाकी वन
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
संदर्भ
- विगत एक वर्ष के दौरान मियावाकी पद्धति लगातार चर्चा में रही है। इसके उदाहरणों में कर्नाटक के रायचूर स्थित यकलासपुरा डंपसाइट का वन में रूपांतरण, गुजरात के राजकोट स्थित नकरावाड़ी लैंडफिल का रूपांतरण तथा मुंबई में चलाए जा रहे शहरी वनीकरण अभियान शामिल हैं।
मियावाकी पद्धति क्या है?
- मियावाकी पद्धति एक वनीकरण तकनीक है, जिसके माध्यम से बहुत कम समय में घने, देशज और बहु-स्तरीय वन विकसित किए जाते हैं। इसका उपयोग बहुत छोटे शहरी क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।
- इस पद्धति का विकास 1970 के दशक में जापानी वनस्पति विज्ञानी और पादप पारिस्थितिकीविद् डॉ. अकीरा मियावाकी ने किया था।
- उन्होंने इस पद्धति को “संभावित प्राकृतिक वनस्पति ” की अवधारणा पर आधारित किया। इसका अर्थ उस वनस्पति से है, जो किसी क्षेत्र में मानव हस्तक्षेप के अभाव में प्राकृतिक रूप से विकसित होती।
- इस पद्धति का मूल विचार यह है कि कुछ पेड़ों को दूर-दूर लगाकर दशकों तक वन बनने की प्रतीक्षा करने के बजाय, अनेक देशज प्रजातियों को बहुत कम दूरी पर एक साथ लगाया जाए, ताकि वे सूर्य के प्रकाश और पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा करें तथा तीव्रता से विकसित होकर घना वन तैयार करें।

स्रोत: TH
अमेजन वर्षावन
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
संदर्भ
- ग्लोबल चेंज बायोलॉजी में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि अमेजन वर्षावन के वनों की कटाई से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्जनन में केवल 15–25 वृक्ष प्रजातियाँ प्रमुख भूमिका निभाती हैं।
अमेजन वर्षावन के बारे में
- अमेजन वर्षावन को प्रायः “पृथ्वी के फेफड़े” कहा जाता है। यह ज्ञात सभी पादप और पशु प्रजातियों में से लगभग 10% का आवास है। इसके अतिरिक्त, यहाँ ऐसी असंख्य प्रजातियाँ भी हो सकती हैं, जिनकी अभी तक खोज नहीं हुई है।
- अमेजन वर्षावन 8 देशों और एक विदेशी क्षेत्र में फैला हुआ है। ये देश हैं:
- ब्राजील
- बोलीविया
- कोलंबिया
- इक्वाडोर
- गुयाना
- पेरू
- सूरीनाम
- वेनेजुएला
- इसके अतिरिक्त, फ्रेंच गयाना, जो फ्रांस का एक विदेशी क्षेत्र है, भी अमेजन क्षेत्र में शामिल है।
- अमेजन वर्षावन में लगभग 250–300 अरब टन कार्बन संचित है, जो वैश्विक स्तर पर 15–20 वर्षों के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के बराबर है।
- यह वर्षा उत्पन्न करने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो विश्व के कुछ सबसे बड़े शहरों तथा प्रमुख कृषि क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करती है।
- अमेजन क्षेत्र में 4.7 करोड़ से अधिक लोग निवास करते हैं, जिनमें लगभग 22 लाख स्वदेशी एवं पारंपरिक समुदायों के लोग शामिल हैं। इन समुदायों की संस्कृति और आजीविका का वन से गहरा संबंध है।

स्रोत: TH
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संक्षिप्त समाचार 20-08-2026