- हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मृत्युदंड के निष्पादन की एक विधि के रूप में फाँसी की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। न्यायालय ने माना कि यह विधि संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत गरिमा के अधिकार का उल्लंघन नहीं करती।
- औपनिवेशिक काल की दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के समय से ही भारत में फाँसी मृत्युदंड के निष्पादन की प्रमुख वैधानिक विधि रही है।
- वर्तमान में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 393(5) में प्रावधान है कि मृत्युदंड के आदेश में यह निर्देश दिया जाएगा कि संबंधित व्यक्ति को “गर्दन से तब तक फाँसी पर लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।” Read More
भारत में संवैधानिक रूप से निष्पादन की विधि के रूप में फाँसी
संदर्भ
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