संक्षिप्त समाचार 06-08-2026

उज्बेकिस्तान

पाठ्यक्रम: जीएस-1/भूगोल 

सन्दर्भ

  • भारत और उज़्बेकिस्तान ने अपनी रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) का विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की है।

उज्बेकिस्तान का परिचय

  • उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है, जिसकी जनसंख्या लगभग 3.08 करोड़ (30.8 मिलियन) है।
  • इसकी सीमाएँ कज़ाख़स्तान, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान तथा अफ़ग़ानिस्तान से लगती हैं।
  • लिकटेंस्टाइन के साथ यह विश्व के केवल दो द्वि-स्थलबद्ध (Doubly Landlocked) देशों में से एक है, अर्थात् इसके सभी पड़ोसी देश भी स्थल से घिरे हुए (Landlocked) हैं।
  • इसकी अर्थव्यवस्था मुख्यतः वस्तु (Commodity) निर्यात पर निर्भर है, जिसके कारण यह वैश्विक वस्तु कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील रहती है।
  • ताशकंद (Tashkent) इसकी राजधानी एवं सबसे बड़ा शहर है।
  • प्रमुख नदियाँ: अमू दरिया (Amu Darya) तथा सिर दरिया (Syr Darya)।
उज्बेकिस्तान

स्रोत: AIR

वाहन-से-वाहन (V2V) संचार

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ सरकारी पहल; जीएस-3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

सन्दर्भ

  • सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने अक्टूबर 2028 से नए वाहनों में वाहन-से-वाहन (Vehicle-to-Vehicle–V2V) संचार प्रणाली को अनिवार्य बनाने हेतु मसौदा नियम जारी किए हैं।

V2V संचार क्या है?

  • V2V संचार के माध्यम से निकटवर्ती वाहन वास्तविक समय (Real-time) में अपनी गति, स्थिति, दिशा, त्वरण (Acceleration) आदि जैसी जानकारी का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
  • यह जानकारी सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण परिस्थितियों, जैसे अचानक ब्रेक लगाना,आगे टक्कर का जोखिम,असुरक्षित लेन परिवर्तन, तथा आपातकालीन वाहनों के निकट आने की स्थिति में,चालक या वाहन प्रणाली को पूर्व चेतावनी (Advance Warning) प्रदान कर सकती है।
  • पारंपरिक वाहन सुरक्षा प्रणालियों के विपरीत, जो मुख्यतः वाहन में लगे सेंसर तथा चालक की प्रतिक्रिया पर निर्भर करती हैं, V2V संचार चालक की सीधी दृष्टि (Line of Sight) से परे की जानकारी भी उपलब्ध करा सकता है।
  • इसलिए, यह उन्नत चालक सहायता प्रणाली (ADAS) का पूरक बनने तथा सक्रिय दुर्घटना रोकथाम, कनेक्टेड मोबिलिटी और भविष्य की इंटेलिजेंट परिवहन प्रणालियों को समर्थन देने की अपेक्षा रखता है।

क्या आप जानते हैं ?

  •  वर्ष 2023 में भारत में 4,80,583 सड़क दुर्घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें 1,72,890 लोगों की मृत्यु हुई।

स्रोत: PIB

बैंकर्स बुक्स साक्ष्य विधेयक, 2026

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ अर्थव्यवस्था

सन्दर्भ

  • बैंकर्स बुक्स साक्ष्य विधेयक, 2026 लोकसभा द्वारा पारित किया गया।

परिचय

  • यह विधेयक बैंकर्स बुक्स साक्ष्य अधिनियम, 1891 को निरस्त कर उसके स्थान पर नया कानून लाने का प्रयास करता है।
  • वर्तमान अधिनियम के अनुसार, बैंक अभिलेखों (Bank Records) की प्रमाणित प्रतियाँ मूल अभिलेख प्रस्तुत किए बिना ही न्यायिक कार्यवाहियों में साक्ष्य के रूप में स्वीकार की जा सकती हैं।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

  • इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की ग्राह्यता (Admissibility of Electronic Records)
  • विधेयक के अनुसार, बैंकर्स बुक का इलेक्ट्रॉनिक अथवा डिजिटल अभिलेख कुछ निर्धारित शर्तों के अधीन साक्ष्य के रूप में ग्राह्य, वैध तथा विधिक रूप से प्रवर्तनीय (Legally Enforceable) होगा।

इनमें निम्नलिखित शर्तें शामिल हैं—

  • प्रस्तुत की गई प्रति संबंधित प्रविष्टि अथवा सूचना की सही एवं वास्तविक प्रति हो तथा अभिलेखों का सही प्रतिनिधित्व करती हो अथवा उनसे उचित रूप से प्राप्त की गई हो।
  • डेटा में किसी भी प्रकार के अनधिकृत परिवर्तन का पता न चला हो।
  • प्रणाली के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ (Tampering) अथवा ऐसी कोई अन्य घटना न हुई हो, जो अभिलेखों की अखंडता (Integrity) एवं शुद्धता (Accuracy) को प्रभावित करती हो।

वित्तीय क्षेत्र की अन्य संस्थाओं पर लागू होना

  • वर्तमान अधिनियम बैंकिंग व्यवसाय से संबंधित संस्थाओं, डाकघर बचत बैंक तथा मनी ऑर्डर कार्यालयों पर लागू होता है। विधेयक इस व्यवस्था को यथावत बनाए रखता है।
  • इसके अतिरिक्त, यह विधेयक केंद्र सरकार को अधिसूचना द्वारा वित्तीय क्षेत्र में कार्यरत किसी भी संस्था अथवा संस्थाओं के वर्ग पर इसके प्रावधान लागू करने का अधिकार प्रदान करता है।

स्रोत: IE, PRS

एमएसएमई सतत (ज़ीरो डिफेक्ट, ज़ीरो इफेक्ट – ZED) प्रमाणन योजना

पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था 

चर्चा में क्यों?

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), एमएसएमई सतत (ज़ीरो डिफेक्ट, ज़ीरो इफेक्ट – ZED) प्रमाणन योजना के माध्यम से गुणवत्ता-आधारित एवं पर्यावरणीय रूप से सतत विनिर्माण को बढ़ावा दे रहा है।

एमएसएमई सतत (ZED) प्रमाणन योजना

  • यह योजना एमएसएमई को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का निर्माण करने के साथ-साथ उनके पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
  • यह उद्यमों को गुणवत्ता, उत्पादकता एवं सततता बढ़ाने के लिए अपनी प्रौद्योगिकी, प्रणालियों एवं विनिर्माण प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार करने में सहायता प्रदान करती है।
  • एमएसएमई मंत्रालय (MoMSME) के उद्यम (UDYAM) पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकृत सभी एमएसएमई एमएसएमई सतत (ZED) प्रमाणन में भाग लेने तथा इससे संबंधित लाभ एवं प्रोत्साहनों का लाभ उठाने के पात्र हैं।

लाभ

  • यह योजना कांस्य (Bronze), रजत (Silver) एवं स्वर्ण (Gold) स्तर के प्रमाणन प्रदान करती है, जिससे एमएसएमई चरणबद्ध तरीके से अपने गुणवत्ता एवं सततता मानकों में सुधार कर सकते हैं।

पात्र उद्यम निम्नलिखित वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं—

  • परीक्षण, प्रणाली अथवा उत्पाद प्रमाणन की लागत का 75% तक (अधिकतम ₹50,000)।
  • परामर्श एवं मार्गदर्शन (Consultancy and Handholding Support) के लिए ₹2 लाख।
  • स्वच्छ प्रौद्योगिकियों, प्रदूषण नियंत्रण उपायों एवं ज़ीरो इफेक्ट समाधानों को अपनाने के लिए ₹3 लाख।
  • यह योजना महिला उद्यमियों को भी प्रोत्साहित कर रही है। नवंबर 2023 से सरकार महिलाओं के स्वामित्व वाले एमएसएमई के लिए ZED प्रमाणन लागत पर 100% अनुदान (Subsidy) प्रदान कर रही है।

स्रोत: DD

यूपीआई लेन-देन पर व्यापारी छूट दर (MDR)

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ भारतीय अर्थव्यवस्था

सन्दर्भ

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर ने कहा कि वर्तमान में व्यापारियों एवं ग्राहकों के लिए निःशुल्क यूपीआई (UPI) लेन-देन की लागत का भुगतान किसी न किसी को करना होगा।

व्यापारी छूट दर (Merchant Discount Rate–MDR) क्या है?

  • व्यापारी छूट दर (MDR) वह शुल्क है, जो व्यापारी डिजिटल भुगतान लेन-देन के लिए बैंकों एवं भुगतान सेवा प्रदाताओं को भुगतान करते हैं।
  • यह सामान्यतः लेन-देन के मूल्य के प्रतिशत के रूप में निर्धारित किया जाता है तथा इसका वितरण बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं एवं भुगतान नेटवर्क के बीच किया जाता है।
  • डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जनवरी 2020 से यूपीआई एवं रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड लेन-देन पर शून्य एमडीआर (Zero MDR) की व्यवस्था लागू की।

यूपीआई पर एमडीआर लागू करने पर विचार क्यों किया जा रहा है?

  • यूपीआई विश्व की सबसे बड़ी रियल टाइम भुगतान प्रणाली बन चुका है, जिसके कारण इसके परिचालन व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

बैंकों एवं भुगतान सेवा प्रदाताओं को निम्नलिखित मदों पर लागत वहन करनी पड़ती है—

  • भुगतान प्रसंस्करण (Processing) एवं निपटान (Settlement)।
  • साइबर सुरक्षा एवं धोखाधड़ी प्रबंधन।
  • नेटवर्क एवं सर्वर अवसंरचना का रखरखाव।
  • नवाचार एवं प्रौद्योगिकी उन्नयन।
  • वर्तमान व्यवस्था वित्तीय दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इन लागतों का केवल लगभग आधा भाग ही सरकारी प्रोत्साहन भुगतानों द्वारा पूरा किया जाता है।
  • वर्तमान में यूपीआई मंच के संचालन एवं रखरखाव की लागत लगभग ₹0.4–1 प्रति लेन-देन है, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 24,161.69 करोड़ यूपीआई लेन-देन किए गए।

स्रोत: TH

भारत की क्रिएटर अर्थव्यवस्था (Creators Economy)

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ अर्थव्यवस्था

सन्दर्भ

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के पास रचनात्मक प्रतिभाओं (Creative Talent) का असाधारण भंडार है, जिसका उपयोग देश को वैश्विक कंटेंट निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए किया जा सकता है।

क्रिएटर अर्थव्यवस्था क्या है? 

  • क्रिएटर अर्थव्यवस्था (ऑरेंज अर्थव्यवस्था)  उस पारिस्थितिकी तंत्र को संदर्भित करती है, जिसमें प्रायः पारंपरिक मध्यस्थों के बिना व्यक्ति (कंटेंट क्रिएटर) डिजिटल मंचों का उपयोग करके सामग्री (Content), कौशल या प्रभाव (Influence) का सृजन, वितरण तथा प्रत्यक्ष रूप से दर्शकों के बीच उसका मुद्रीकरण करते हैं।
  • क्रिएटर अर्थव्यवस्था के प्रमुख घटक: 
    • क्रिएटर (Creators): यूट्यूबर, पॉडकास्टर, ब्लॉगर, इन्फ्लुएंसर, शिक्षक, गेमर एवं कलाकार।
    • डिजिटल मंच : यूट्यूब (YouTube), इंस्टाग्राम (Instagram), एक्स (X) आदि।
    • मुद्रीकरण के साधन: विज्ञापन, ब्रांड प्रायोजन (Brand Sponsorships), सदस्यता (Subscriptions), टिप्स, एनएफटी (NFTs), मर्चेंडाइज आदि।
    • दर्शक/समुदाय: फॉलोअर्स, सब्सक्राइबर एवं विशिष्ट रुचि वाले समुदाय।
    • सहायक तंत्र (Enablers): भुगतान गेटवे, विश्लेषण (Analytics) उपकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उपकरण एवं क्रिएटर प्रबंधन एजेंसियाँ।

रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने हेतु सरकार द्वारा उठाए गए कदम

  • विश्व ऑडियो-विजुअल एवं मनोरंजन शिखर सम्मेलन (WAVES) 2025: इसका मुख्य उद्देश्य कंटेंट, रचनात्मकता एवं संस्कृति को आर्थिक विकास तथा वैश्विक प्रभाव के एक संगठित इंजन के रूप में विकसित कर भारत की ऑरेंज अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना था।
  • भारतीय सृजनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Creative Technologies–IICT): कौशल विकास एवं नवाचार को संस्थागत रूप देने के लिए सरकार ने मुंबई में IICT की स्थापना एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स एवं विस्तारित वास्तविकता (AVGC-XR) के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (National Centre of Excellence) के रूप में की है।
  • क्रिएटर्स एवं डिजिटल प्रतिभाओं का रणनीतिक एकीकरण: प्रसार भारती अधिक समावेशी डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल क्रिएटर्स को सार्वजनिक सेवा प्रसारण से सक्रिय रूप से जोड़ रहा है।
  • क्रिएटर्स कॉर्नर (Creator’s Corner)”, जिसका प्रसारण डीडी न्यूज़ एवं डीडी नेशनल पर किया जाता है, सूक्ष्म इन्फ्लुएंसर्स (Micro-Influencers) तथा उभरती प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्रदान करता है।

स्रोत: AIR, PIB 

क्लाउडेड लेपर्ड संरक्षण कार्ययोजना (CAP)

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ पर्यावरण

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय क्लाउडेड लेपर्ड दिवस (4 अगस्त) के अवसर पर क्लाउडेड लेपर्ड संरक्षण कार्ययोजना (CAP) का शुभारंभ किया गया।

क्लाउडेड लेपर्ड (Neofelis nebulosa)

  • विशेषताएँ:  यह मध्यम आकार की, अत्यधिक वृक्षवासी (Arboreal) जंगली बिल्ली है, जो अपने बादलों के आकार जैसे बड़े धब्बों, लंबे कैनाइन दाँतों तथा असाधारण रूप से लंबी पूँछ के लिए प्रसिद्ध है।
  • यह एक निशाचर शिकारी है, जो हिरण, प्राइमेट्स (वानर), साही, पैंगोलिन तथा गिलहरी सहित वृक्षों एवं भूमि पर रहने वाले विभिन्न जीवों का शिकार करता है।
  • आवास एवं वितरण: यह मुख्यतः प्राथमिक उष्णकटिबंधीय वनों में पाया जाता है, किंतु द्वितीयक वनों, शुष्क वनों, मैंग्रोव वनों तथा हिमालय में 3,500 मीटर से अधिक ऊँचाई तक भी पाया जाता है।
  • इसका वितरण नेपाल की हिमालयी तराई से लेकर मुख्यभूमि दक्षिण-पूर्व एशिया एवं चीन तक फैला हुआ है।
  • ताइवान में यह विलुप्त हो चुका है, जबकि वियतनाम, चीन एवं बांग्लादेश में इसकी आबादी अत्यंत कम है और स्थानीय स्तर पर विलुप्ति के कगार पर है।
  • खतरे: तीव्र वनों की कटाई एवं अवसंरचना विकास के कारण आवास का विनाश एवं विखंडन।
  • अवैध वन्यजीव व्यापार के लिए अवैध शिकार एवं फंदे (Snaring) इसके संरक्षण के लिए सबसे बड़े खतरे हैं।
  • संरक्षण की स्थिति:  इसे वन्य जीव एवं वनस्पतियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (CITES) के परिशिष्ट-I में शामिल किया गया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में इसे सुभेद्य (Vulnerable) श्रेणी में रखा गया है।

क्लाउडेड लेपर्ड संरक्षण कार्ययोजना (CAP) 

  • यह कार्ययोजना भारत सरकार–वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF)–संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की पहल के अंतर्गत तैयार की गई है।
  • यह प्रजाति के संरक्षण के लिए आवासों की सुरक्षा, वन संपर्क की पुनर्स्थापना, वैज्ञानिक निगरानी को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने हेतु एक व्यापक रूपरेखा प्रदान करती है।
  • इस कार्ययोजना में पूर्वोत्तर भारत के 14 प्राथमिक संरक्षण परिदृश्यों की पहचान की गई है। साथ ही, वन संपर्क को मजबूत करने के लिए परिदृश्य-स्तरीय आवास पुनर्स्थापना एवं वन्यजीव गलियारों के संरक्षण पर बल दिया गया है।

स्रोत: PIB

 

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