पाठ्यक्रम: जीएस-2/ शासन
चर्चा में क्यों?
- भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) विधेयक, 2026 संसद में प्रस्तुत किया गया है।
भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) की पृष्ठभूमि
- स्थापना: भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) की स्थापना दिसंबर 1931 में कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज की सांख्यिकी प्रयोगशाला में एक विद्वत् संस्था (Learned Society) के रूप में की गई थी।
- इसकी स्थापना प्रख्यात सांख्यिकीविद् पी. सी. महालनोबिस ने की थी।
- इसे 1932 में सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत तथा बाद में पश्चिम बंगाल सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1961 के अंतर्गत पंजीकृत किया गया।
- मुख्यालय एवं संचालित पाठ्यक्रम: इसका मुख्यालय कोलकाता में है तथा इसके केंद्र दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और तेज़पुर में स्थित हैं।
- यह सांख्यिकी एवं गणित सहित विभिन्न विषयों में पाठ्यक्रम संचालित करता है तथा इसके अंतर्गत कई अनुसंधान प्रभाग कार्यरत हैं।
- निर्णय लेने वाला निकाय: इसका सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय 33 सदस्यीय परिषद (Council) है, जिसमें एक निर्वाचित अध्यक्ष, केंद्र सरकार के छह प्रतिनिधि तथा संस्थान में कार्यरत न रहने वाले वैज्ञानिक शामिल होते हैं।
- केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI), वित्त मंत्रालय तथा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
- संस्थान के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक प्रमुख निदेशक (Director) की नियुक्ति परिषद द्वारा की जाती है।
- राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा: वर्ष 1959 में संसद के एक अधिनियम के माध्यम से इसे राष्ट्रीय महत्व का संस्थान (Institution of National Importance) घोषित किया गया, जिससे इसे डिग्री प्रदान करने की शक्ति प्राप्त हुई तथा यह केंद्रीय अनुदान और लेखा-परीक्षा (Audit) के लिए पात्र बन गया। इसके बावजूद यह एक सोसाइटी के रूप में कार्य करता रहा।
भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) विधेयक, 2026
- इसे सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 को निरस्त करने के लिए प्रस्तुत किया गया है।
- इसका उद्देश्य संस्थान को पंजीकृत सोसाइटी से परिवर्तित कर आईआईटी (IITs) और आईआईएम (IIMs) की तर्ज पर एक वैधानिक निगमित निकाय (Statutory Body Corporate) बनाकर उसके शासन तंत्र को सुदृढ़ करना है।
प्रमुख विशेषताएँ
- शासी निकाय (Governing Bodies): विधेयक में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (Board of Governors) का प्रावधान किया गया है, जो केंद्र सरकार के प्रति उत्तरदायी संस्थान का प्रमुख कार्यकारी एवं नीति-निर्माण निकाय होगा।
- निदेशक (Director) की अध्यक्षता में एक शैक्षणिक परिषद (Academic Council) होगी, जो शैक्षणिक विषयों पर बोर्ड को सलाह देगी तथा पाठ्यक्रम, परीक्षाओं, शैक्षणिक मानकों और अंतर्विषयी अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए उत्तरदायी होगी।
- विधेयक में भारत के राष्ट्रपति को संस्थान का विज़िटर (Visitor) बनाए जाने का प्रावधान किया गया है।
- संरचना एवं नियुक्ति (Composition and Appointment):बोर्ड में 11 सदस्य होंगे, जिनमें राष्ट्रपति द्वारा केंद्र सरकार की सिफारिश पर नियुक्त अध्यक्ष, सरकार द्वारा नामित सदस्य, प्रतिष्ठित विशेषज्ञ तथा संस्थान के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- निदेशक की नियुक्ति सरकार-नेतृत्व वाली चयन प्रक्रिया के माध्यम से की जाएगी तथा विज़िटर को निदेशक को पद से हटाने एवं जाँच के आदेश देने का अधिकार होगा।
- संपत्तियों का हस्तांतरण (Transfer of Assets):विधेयक में वर्तमान आईएसआई की सभी संपत्तियों, देनदारियों, कर्मचारियों तथा शैक्षणिक कार्यक्रमों को नई वैधानिक संस्था में स्थानांतरित करने का प्रावधान है, जिससे कर्मचारियों की सेवा शर्तों तथा शैक्षणिक निरंतरता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
आलोचनाएँ (Criticism)
- इस विधेयक से संस्थान के शासन-प्रबंधन पर केंद्र सरकार का नियंत्रण बढ़ जाएगा, जिससे संस्थान की स्वायत्तता (Autonomy) कमजोर हो सकती है।
- संकाय सदस्यों, छात्रों और शोधकर्ताओं का दावा है कि प्रस्तावित बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में सरकार द्वारा नामित सदस्यों का वर्चस्व है।
- निदेशक की नियुक्ति, समीक्षा और पद से हटाने जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों में केंद्र सरकार की भूमिका अधिक हो जाएगी।
- आलोचकों का यह भी कहना है कि इस विधेयक का मसौदा हितधारकों से पर्याप्त परामर्श किए बिना तैयार किया गया।
- उनका मानना है कि निदेशक व्यवहारतः (De facto) केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी बन जाएगा, जिससे आईएसआई की शैक्षणिक एवं संस्थागत स्वतंत्रता प्रभावित होगी।
- एक अन्य विवाद आईएसआई के मुख्यालय के स्थान को लेकर है। नया विधेयक, 1959 के अधिनियम के विपरीत, कोलकाता को मुख्यालय के रूप में उल्लेखित नहीं करता, जिससे मुख्यालय स्थानांतरित किए जाने की आशंकाएँ उत्पन्न हुई हैं।
सरकार का पक्ष
- सरकार का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था, जिसमें प्रमुख निर्णय 1,000 से अधिक सदस्यों वाली महासभा (General Body) से अनुमोदित होते हैं, संस्थागत सुधारों और आधुनिकीकरण में बाधा बन रही है।
- सरकार के अनुसार, यह विधेयक चार समीक्षा समितियों (Review Committees) की सिफारिशों पर आधारित है, जिन्होंने आईएसआई परिषद के आकार को कम करने तथा चुनाव-आधारित व्यवस्था के स्थान पर योग्यता-आधारित नियुक्तियों (Merit-based Appointments) को बढ़ावा देने की अनुशंसा की थी।
- सरकार ने यह भी कहा कि हितधारकों से व्यापक परामर्श किया गया, जिसमें वर्ष 2025 में आयोजित एक विचार-मंथन सत्र (Brainstorming Session) तथा पूर्व-विधायी परामर्श नीति (Pre-legislative Consultation Policy) के अंतर्गत सार्वजनिक टिप्पणियाँ शामिल थीं।
- सरकार ने संस्थान के मुख्यालय को कोलकाता से स्थानांतरित किए जाने की किसी भी संभावना से इनकार किया है।
निष्कर्ष एवं आगे की राह
- भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) विधेयक, 2026 का उद्देश्य आईएसआई को अन्य राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के समकक्ष लाकर उसके शासन-प्रबंधन का आधुनिकीकरण करना तथा प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करना है।
- किंतु संस्थागत स्वायत्तता, शैक्षणिक स्वतंत्रता तथा सरकार के बढ़ते प्रभाव को लेकर उठी चिंताएँ इस बात की ओर संकेत करती हैं कि सुधारों के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
- इन सुधारों की सफलता पारदर्शी शासन, शैक्षणिक विशेषज्ञों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व, संस्थागत स्वायत्तता के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों तथा समय-समय पर स्वतंत्र समीक्षा पर निर्भर करेगी।
स्रोत-TH