ब्रॉड पीक हिमस्खलन
पाठ्यक्रम: GS1/भूगोल
समाचार में
- काराकोरम पर्वतमाला में स्थित ब्रॉड पीक की ढलानों पर 10 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण दल हिमस्खलन से प्रभावित हो गया।
परिचय
- ब्रॉड पीक (स्थानीय नाम: फालचन कांगड़ी) विश्व का 12वाँ सबसे ऊँचा पर्वत है, जिसकी ऊँचाई 8,051 मीटर है।
- यह काराकोरम पर्वतमाला में गिलगित-बाल्टिस्तान (पाकिस्तान) तथा शिनजियांग (चीन) की सीमा पर स्थित है।
- यह के-2 से लगभग 8 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में गैशरब्रुम पर्वत समूह के अंतर्गत स्थित है।
- वर्ष 1892 में सर मार्टिन कॉनवे ने इसकी असामान्य रूप से विस्तृत शिखर-शृंखला, जो स्विट्ज़रलैंड के ब्रेइथॉर्न पर्वत से मिलती-जुलती है, के आधार पर इसका नाम ब्रॉड पीक रखा।
- इस पर्वत पर प्रथम सफल चढ़ाई वर्ष 1957 में चार सदस्यीय ऑस्ट्रियाई दल द्वारा बिना अनुपूरक ऑक्सीजन के की गई थी।
- इसका निर्माण इंडो-ऑस्ट्रेलियाई तथा यूरेशियन विवर्तनिक प्लेटों के परस्पर टकराव के परिणामस्वरूप हुआ है।
- यह गॉडविन-ऑस्टिन हिमनद तथा बाल्टोरो हिमनद को पोषित करता है।
स्रोत:India Today
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पुनर्गठित ‘खेलो इंडिया’ योजना को स्वीकृति प्रदान
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए पुनर्गठित ‘खेलो इंडिया’ योजना तथा राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता (ANSFs) को सुदृढ़ करने हेतु ₹36,441 करोड़ के संयुक्त परिव्यय को स्वीकृति प्रदान की है।
परिचय
- ‘खेलो इंडिया – राष्ट्रीय खेल विकास कार्यक्रम’ का शुभारंभ वर्ष 2016-17 में देशभर में जनभागीदारी बढ़ाने तथा खेल उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के द्वैध उद्देश्य के साथ किया गया था।
- पुनर्गठित योजना का उद्देश्य प्रत्येक प्रतिभाशाली युवा भारतीय के लिए विद्यालयी खेल मैदानों एवं ग्रामीण खेल स्थलों से लेकर ओलंपिक पदक मंच तक एक निर्बाध खेल विकास मार्ग उपलब्ध कराना है।
- यह योजना खेलो भारत नीति, 2025 तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अनुरूप तैयार की गई है।
- इसके अंतर्गत निम्नलिखित संस्थानों को सम्मिलित करते हुए एक एकीकृत राष्ट्रीय खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाएगा—
- राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCOEs)
- खेलो इंडिया उत्कृष्टता केंद्र (KICoEs)
- भारतीय खेल प्राधिकरण प्रशिक्षण केंद्र (STCs)
- खेलो इंडिया मान्यता प्राप्त अकादमियाँ (KIAAs)
- खेलो इंडिया केंद्र (KICs)
- सशस्त्र बलों की युवा खेल कंपनियाँ (YSCs)
- ये संस्थान देशभर में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, खेल विज्ञान संबंधी सहयोग तथा आधुनिक खेल अवसंरचना उपलब्ध कराएँगे।
- उभरते खेलो इंडिया खिलाड़ी (E-KIAs): योजना के अंतर्गत उभरते खेलो इंडिया खिलाड़ी (E-KIAs) नामक नई श्रेणी का सृजन किया गया है।
- इसके माध्यम से संरचित खिलाड़ी विकास पारिस्थितिकी तंत्र का लगभग दस गुना विस्तार किया जाएगा।
- फिट इंडिया आंदोलन का विस्तार: फिट इंडिया आंदोलन का व्यापक विस्तार किया जाएगा ताकि विशेष रूप से युवाओं के बीच फिटनेस को राष्ट्रीय जनआंदोलन के रूप में स्थापित किया जा सके।
- राष्ट्रीय प्रशिक्षक प्रत्यायन बोर्ड (NCAB): सरकार राष्ट्रीय प्रशिक्षक प्रत्यायन बोर्ड (NCAB) की स्थापना करेगी।
- इसका उद्देश्य प्रशिक्षकों की योग्यता का मानकीकरण, व्यावसायिक मानकों में सुधार तथा देशभर में प्रशिक्षकों एवं सहयोगी कर्मियों की क्षमता को सुदृढ़ करना है।
- राष्ट्रीय खेल महासंघों को सुदृढ़ सहायता (ANSF): वर्ष 2026-31 की अवधि के लिए राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता (ANSF) योजना को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
- इस योजना के माध्यम से भारतीय खिलाड़ियों एवं टीमों को निम्नलिखित क्षेत्रों में वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी—
- प्रशिक्षण
- खेल विज्ञान
- आधुनिक खेल उपकरण
- अंतरराष्ट्रीय अनुभव
- प्रशिक्षण शिविर
- विदेशी विशेषज्ञों की सेवाएँ
- प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सहभागिता
- यह योजना ग्लोबल साउथ के देशों के साथ खेल सहयोग को बढ़ावा देगी तथा भारत के स्वदेशी खेलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करेगी।
- इस योजना के माध्यम से भारतीय खिलाड़ियों एवं टीमों को निम्नलिखित क्षेत्रों में वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी—
स्रोत: AIR
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY)
पाठ्यक्रम: GS3/नवीकरणीय ऊर्जा
संदर्भ
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY)’ को स्वीकृति प्रदान की है।
परिचय
- यह योजना ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (ESS) सहित तैरती सौर फोटोवोल्टिक (FSPV) परियोजनाओं के विकास के लिए प्रारंभ की गई है।
- योजना का कुल परिव्यय ₹5,070 करोड़ निर्धारित किया गया है।
- इसके अंतर्गत 5,000 मेगावाट क्षमता की तैरती सौर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं का विकास किया जाएगा, जिनके साथ न्यूनतम दो घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता, अर्थात 10,000 मेगावाट-घंटा (MWh) वाले सह-स्थित ऊर्जा भंडारण तंत्र स्थापित किए जाएंगे।
- इन परियोजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 के दौरान स्वीकृत किया जाएगा, जबकि वित्तीय सहायता का वितरण वित्तीय वर्ष 2032-33 तक जारी रहेगा।
- पात्र तैरती सौर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं के सफलतापूर्वक कमीशनिंग होने के पश्चात प्रति मेगावाट ₹1 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) प्रदान की जाएगी।
- इसके अतिरिक्त, व्यवहार्यता अध्ययन के लिए प्रति परियोजना ₹50 लाख तक की केंद्रीय वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
महत्त्व
- यह योजना देश में तैरती सौर फोटोवोल्टिक क्षमता को वर्तमान लगभग 700 मेगावाट से बढ़ाकर 5,000 मेगावाट तक पहुँचाने में सहायक होगी।
- इसके माध्यम से वर्तमान जलाशयों एवं औद्योगिक तालाबों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा तथा सीमित भूमि संसाधनों पर प्रतिस्पर्धा में कमी आएगी।
- ऊर्जा भंडारण प्रणाली के एकीकरण से विद्युत ग्रिड की विश्वसनीयता में वृद्धि होगी।
- इस योजना के परिणामस्वरूप प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।
- इससे लगभग 16,000–17,000 पूर्णकालिक समतुल्य रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
तैरती सौर फोटोवोल्टिक (FSPV)
- इसे “फ्लोटोवोल्टाइक” भी कहा जाता है। यह ऐसी तकनीक है, जिसमें जलाशयों, झीलों, बाँधों एवं अन्य जल निकायों की सतह पर तैरने वाली संरचनाओं पर सौर पैनल स्थापित किए जाते हैं।

- वर्ष 2024 तक वैश्विक स्तर पर तैरती सौर क्षमता लगभग 9.6 गीगावाट (GW) तक पहुँच चुकी थी, जिसमें से लगभग 90% क्षमता एशिया में स्थापित है।
- चीन इस क्षेत्र में अग्रणी है। वहाँ पोयांग झील स्थित मत्स्य पालन क्षेत्र पर 120 मेगावाट क्षमता का तैरता सौर संयंत्र स्थापित किया गया है।
- नीदरलैंड यूरोप की कुल तैरती सौर क्षमता का लगभग तीन-चौथाई भाग रखता है, जहाँ अधिकांश परियोजनाएँ खदानों से निर्मित झीलों पर विकसित की गई हैं।
- भारत की प्रमुख परियोजना मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी पर स्थित ओंकारेश्वर तैरता सौर पार्क है, जिसकी वर्तमान क्षमता 278 मेगावाट है तथा इसे बढ़ाकर 600 मेगावाट करने की योजना है।
स्रोत: PIB
ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉण्ड सूचकांक
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- ब्लूमबर्ग इंडेक्स सर्विसेज लिमिटेड (BISL) ने एक बार पुनः भारतीय सरकारी बॉण्डों को ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉण्ड सूचकांक में शामिल करने के निर्णय को स्थगित कर दिया है।
ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉण्ड सूचकांक के बारे में
- यह ब्लूमबर्ग का प्रमुख वैश्विक निवेश-ग्रेड बॉण्ड सूचकांक है।
- यह विकसित एवं उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सरकारी बॉण्ड, कॉर्पोरेट बॉण्ड तथा प्रतिभूतिकृत बॉण्ड के प्रदर्शन का अनुश्रवण करता है।
- यह वैश्विक निश्चित आय निवेशकों तथा निष्क्रिय निवेश निधियों के लिए एक प्रमुख मानक सूचकांक के रूप में कार्य करता है।
- जिन देशों के बॉण्ड इस सूचकांक में शामिल होते हैं, उन्हें सामान्यतः अपने बॉण्ड बाजारों में अधिक विदेशी निवेश प्राप्त होता है।
भारत का समावेशन क्यों स्थगित किया गया?
- ब्लूमबर्ग इंडेक्स सर्विसेज लिमिटेड (BISL) के अनुसार—
- भारत ने वैश्विक मानकों को पूरा करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। तथापि, निवेशक निम्नलिखित क्षेत्रों में और सुधार चाहते हैं—
- स्वचालित व्यापार प्रणाली का व्यापक कार्यान्वयन;
- विदेशी निवेशकों के लिए खाता खोलने एवं ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को अधिक सरल एवं सुगम बनाना; तथा
- हाल के सुधारों के व्यवहारिक क्रियान्वयन के प्रभावी एवं सफल संचालन के पर्याप्त प्रमाण।
- भारत ने वैश्विक मानकों को पूरा करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। तथापि, निवेशक निम्नलिखित क्षेत्रों में और सुधार चाहते हैं—
स्रोत: IE
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संक्षिप्त समाचार 01-08-2026