पाठ्यक्रम:GS3/रक्षा
संदर्भ
- भारत थिएटरकरण (एकीकृत थिएटर कमान व्यवस्था) की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के निकट है, जिसके अंतर्गत थल सेना, नौसेना तथा वायु सेना को संयुक्त थिएटर कमानों के अधीन संगठित किया जाएगा।
थिएटरकरण (एकीकृत थिएटर कमान व्यवस्था)
- थिएटरकरण से अभिप्राय थल सेना, वायु सेना तथा नौसेना की कमान संरचनाओं का एकीकरण करना है, ताकि युद्ध एवं सैन्य अभियानों के दौरान निर्णय-निर्माण तथा संसाधनों के उपयोग को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
- इसके अंतर्गत तीनों सेनाओं के संसाधनों को एक एकल कमांडर के अधीन लाकर निर्बाध समन्वय सुनिश्चित किया जाता है।
- वर्तमान में भारत में थल सेना की सात कमानें, वायु सेना की सात कमानें तथा नौसेना की तीन कमानें कार्यरत हैं। इनके अतिरिक्त दो त्रि-सेवा कमानें—अंडमान एवं निकोबार कमान तथा सामरिक बल कमान—भी विद्यमान हैं।
- एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय उच्च स्तरीय रक्षा समन्वय को सुदृढ़ करने में सहायक भूमिका निभा रहा है।
भारत में थिएटरकरण की आवश्यकता
- परिवर्तित सुरक्षा परिदृश्य: भारत की पारंपरिक सैन्य कमान संरचना, चीन एवं पाकिस्तान से उत्पन्न नई सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो सकी है।
- इसलिए अधिक समन्वित एवं एकीकृत सैन्य संरचना की आवश्यकता अनुभव की जा रही है।
- वर्ष 2020 का गलवान संघर्ष तथा वर्ष 2025 का ऑपरेशन सिंदूर तीनों सेनाओं के बीच बेहतर संयुक्त संचालन की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
- संयुक्तता का अभाव: वर्तमान में थल सेना, नौसेना एवं वायु सेना पृथक-पृथक सेवा-आधारित कमानों के माध्यम से कार्य करती हैं।
- इससे समन्वय, संयुक्त योजना तथा परिचालनात्मक सामंजस्य सीमित रहता है।
- वैश्विक सर्वोत्तम अभ्यास: भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम तथा चीन जैसे देशों की भाँति संयुक्त थिएटर कमान व्यवस्था की दिशा में अग्रसर है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका की थिएटर कमान व्यवस्था से यह सिद्ध हुआ है कि त्रि-सेवा एकीकृत कमान आधुनिक युद्ध में परिचालन दक्षता, कमान की एकता तथा अभियान की सफलता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाती है।
- सामरिक महत्त्व: थिएटर कमानों की स्थापना से भारत संयुक्त बहु-क्षेत्रीय युद्ध क्षमता विकसित कर सकेगा।
- इससे भविष्य के युद्धों के लिए तैयारी सुदृढ़ होगी तथा देश की समग्र रक्षा क्षमता में वृद्धि होगी।
- यह संयुक्त योजना, प्रशिक्षण, रसद, खुफिया सूचना साझाकरण तथा परिचालन दक्षता को सुदृढ़ करेगा, जिससे सैन्य संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव होगा।
प्रस्तावित थिएटर कमानें
- भारत ने चीन, पाकिस्तान तथा समुद्री क्षेत्र पर केंद्रित तीन एकीकृत थिएटर कमानों की संरचना लगभग अंतिम रूप दे दी है।
- पश्चिमी थिएटर कमान (पाकिस्तान): इसका नेतृत्व भारतीय वायु सेना का एक वरिष्ठ अधिकारी करेगा।
- ऑपरेशन सिंदूर (2025) के दौरान वायु शक्ति तथा लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता के महत्त्व को देखते हुए यह व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।
- मुख्यालय: जयपुर
- उत्तरी थिएटर कमान (चीन): इसका नेतृत्व थल सेना का एक वरिष्ठ अधिकारी करेगा।
- हिमालयी सीमा पर थल सेना की प्रमुख भूमिका को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है।
- मुख्यालय: लखनऊ
- समुद्री थिएटर कमान: इसका नेतृत्व भारतीय नौसेना का एक वरिष्ठ अधिकारी करेगा।
- इसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।
- संगठनात्मक संरचना: एक चार-स्टार अधिकारी को नया उप रक्षा प्रमुख नियुक्त किया जाएगा, जो दैनिक संयुक्त परिचालन संबंधी विषयों का दायित्व संभालेगा।
- रक्षा प्रमुख संयुक्त सेनाध्यक्ष समिति के अध्यक्ष होंगे तथा सैन्य कार्य विभाग के सचिव के रूप में अपनी भूमिका निभाते हुए सामरिक नेतृत्व प्रदान करेंगे।
- प्रत्येक थिएटर कमान में अन्य सेवा से एक उप कमांडर नियुक्त किया जाएगा, जिससे तीनों सेनाओं के बीच बेहतर एकीकरण सुनिश्चित हो सके।
- पश्चिमी थिएटर कमान (पाकिस्तान): इसका नेतृत्व भारतीय वायु सेना का एक वरिष्ठ अधिकारी करेगा।
वर्तमान स्थिति
- प्रस्ताव वर्तमान में सशस्त्र बलों के अंदर अंतिम स्तर के आंतरिक विचार-विमर्श से गुजर रहा है।
- इसके पश्चात इसे रक्षा मंत्रालय को समीक्षा एवं देश के सर्वोच्च नेतृत्व की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
- वर्ष 2021 से अब तक इस सुधार प्रस्ताव में कई संशोधन किए गए हैं, जो सशस्त्र बलों के भीतर एकीकरण की सीमा एवं संरचना को लेकर विभिन्न दृष्टिकोणों को प्रतिबिंबित करते हैं।
प्रमुख चुनौतियाँ
- ज्ञान एवं विशेषज्ञता का अंतर: थिएटर कमांडरों को तीनों सेनाओं की संयुक्त कमान संभालनी होगी।
- ऐसे में उनके लिए उन क्षेत्रों का गहन परिचालन ज्ञान सीमित हो सकता है, जिनसे वे पूर्व में प्रत्यक्ष रूप से संबद्ध नहीं रहे हैं।
- इससे संकट की स्थिति में निर्णय-निर्माण प्रभावित हो सकता है।
- सेवा संस्कृति एवं कैरियर संबंधी मुद्दे: तीनों सेनाओं की संगठनात्मक संस्कृति, पदानुक्रम तथा पदोन्नति प्रणाली में अंतर मनोबल एवं कार्यकुशलता को प्रभावित कर सकता है।
- निर्णय-निर्माण में संभावित विलंब: उप रक्षा प्रमुख के पद के जुड़ने से कमान श्रृंखला में एक अतिरिक्त स्तर उत्पन्न होगा।
- इससे संघर्ष की स्थिति में त्वरित परिचालन निर्णय लेने में विलंब हो सकता है।
- संक्रमणकालीन जोखिम: साझा रसद, संचार प्रणाली तथा पारस्परिक परिचालन क्षमता से संबंधित कमियाँ वास्तविक सैन्य अभियानों के दौरान ही स्पष्ट हो सकती हैं।
- सामरिक चिंताएँ: भारत को चीन एवं पाकिस्तान दोनों से एक साथ सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- ऐसे में संक्रमण काल के दौरान परिचालन क्षमता में संभावित कमी एक गंभीर चिंता का विषय है।
सुझाव
- ऐसा सैन्य तत्परता ढाँचा विकसित किया जाए, जो केवल संसाधनों के बजाय वास्तविक परिचालन क्षमता पर आधारित हो।
- युद्धक क्षमता के मूल्यांकन हेतु स्पष्ट मानक एवं तत्परता मापदंड निर्धारित किए जाएँ।
- रक्षा तत्परता परिषद तथा सैन्य तत्परता समिति जैसी संस्थागत निगरानी व्यवस्थाओं की स्थापना की जाए।
- संक्रमण काल के दौरान आरक्षित बलों को नई थिएटर संरचना से पृथक रखा जाए तथा बाह्य दबावों को कम करने के लिए कूटनीतिक उपायों का प्रभावी उपयोग किया जाए।
निष्कर्ष
- थिएटरकरण का उद्देश्य संयुक्त योजना, त्वरित निर्णय-निर्माण, एकीकृत सैन्य संचालन तथा संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है।
- यह चीन एवं पाकिस्तान से संभावित द्वि-मोर्चीय चुनौती के लिए भारत की सैन्य तैयारी को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
- थिएटरकरण भारत की सैन्य व्यवस्था के आधुनिकीकरण तथा संयुक्त युद्धक क्षमता के विकास की दिशा में एक आवश्यक सुधार है।
- तथापि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संक्रमण काल के दौरान परिचालन तत्परता में संभावित अस्थायी कमी का समाधान सुनियोजित क्रियान्वयन, संस्थागत निगरानी तथा चरणबद्ध कार्यान्वयन के माध्यम से किस प्रकार किया जाता है, ताकि भारत किसी भी संभावित संघर्ष के लिए सदैव तैयार रह सके।
स्रोत:TH