उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘पूर्वव्यापी’ पर्यावरणीय स्वीकृतियों पर प्रतिबंध

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

संदर्भ

  • उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2021 के उस कार्यालय ज्ञापन को निरस्त कर दिया, जिसके माध्यम से आधारभूत संरचना परियोजनाओं को पूर्वव्यापी पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान करने की अनुमति दी गई थी।

परिचय

  • वर्ष 2021 के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार उन परियोजनाओं को पूर्वव्यापी स्वीकृति प्रदान की जा सकती थी, जिन्होंने पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त किए बिना ही निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया था।
  • उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पूर्वव्यापी पर्यावरणीय स्वीकृति केवल कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से प्रदान नहीं की जा सकती।
  • हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्वीकार किया कि सरकार असाधारण परिस्थितियों तथा जनहित में, प्रत्यायोजित विधायी शक्तियों के अंतर्गत जारी सांविधिक अधिसूचना के माध्यम से ऐसी व्यवस्था कर सकती है।
  • इस निर्णय के माध्यम से न्यायालय ने पर्यावरणीय न्यायशास्त्र में संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्यपालिका की शक्तियों के स्रोत तथा परियोजनाओं के नियमितीकरण की सीमाओं के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित किया।

कार्यालय ज्ञापन एवं सांविधिक अधिसूचना

  • कार्यालय ज्ञापन किसी मंत्रालय अथवा विभाग द्वारा जारी प्रशासनिक निर्देश होता है तथा इसे विधिक बल प्राप्त नहीं होता।
  • इसके विपरीत, सांविधिक अधिसूचना किसी अधिनियम द्वारा प्रदत्त अधिकारों के अंतर्गत जारी की जाती है। वर्तमान संदर्भ में यह पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत जारी की जाती है तथा इसका प्रकाशन राजपत्र में किया जाता है।

पर्यावरण प्रभाव आकलन

  • पर्यावरण प्रभाव आकलन किसी प्रस्तावित गतिविधि अथवा परियोजना के पर्यावरण पर संभावित प्रभावों का पूर्वानुमान लगाने की वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
  • इसके माध्यम से परियोजना के लाभकारी तथा प्रतिकूल दोनों प्रकार के प्रभावों का व्यवस्थित मूल्यांकन किया जाता है तथा परियोजना के अभिकल्पन के समय उन्हें ध्यान में रखा जाता है।
    • साथ ही, पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए उपयुक्त शमन उपाय भी सुझाए जाते हैं।
  • महत्त्व:
    • पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना।
    • प्राकृतिक संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग।
    • परियोजना की समय एवं लागत में बचत।
    • जनसहभागिता को बढ़ावा देकर संभावित विवादों को कम करना।
    • निर्णय-निर्माताओं को वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराना।
    • पर्यावरण की दृष्टि से सतत एवं उत्तरदायी परियोजनाओं की आधारशिला तैयार करना।

भारत में पर्यावरण प्रभाव आकलन

  • वर्ष 1994: पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत प्रथम बार पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य किया।
  • वर्ष 2006 की व्यवस्था: वर्ष 2006 की अधिसूचना उद्योगों की स्थापना अथवा विस्तार के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान करने का प्रमुख विधिक आधार है।
    • इसके अंतर्गत खनन, तापीय विद्युत संयंत्र, नदी घाटी परियोजनाएँ, आधारभूत संरचना तथा विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति अनिवार्य कर दी गई।
    • वर्ष 1994 की अधिसूचना की तुलना में, वर्ष 2006 की व्यवस्था में परियोजनाओं के आकार एवं क्षमता के आधार पर स्वीकृति प्रदान करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों को भी सौंपी गई।

विधिक एवं संस्थागत ढाँचा

  • पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचनाएँ: इन्हें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी किया जाता है।
  • परियोजनाओं का वर्गीकरण:
    • श्रेणी ‘क’: राष्ट्रीय स्तर की वे परियोजनाएँ जिनका पर्यावरण पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना होती है, जैसे— बड़े बाँध तथा प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग।
    • श्रेणी ‘ख-1’: मध्यम आकार की ऐसी परियोजनाएँ जिनका प्रभाव क्षेत्रीय स्तर पर पड़ता है।
    • श्रेणी ‘ख-2’: अपेक्षाकृत छोटे स्तर की परियोजनाएँ, जिनका पर्यावरणीय प्रभाव सीमित होता है।
  • संस्थागत प्राधिकरण:
    • केंद्रीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति — श्रेणी ‘क’ की परियोजनाओं का मूल्यांकन करती है।
    • राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियाँ — श्रेणी ‘ख’ की परियोजनाओं का मूल्यांकन करती हैं।
    • राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण — राज्य स्तर पर पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान करते हैं।

प्रमुख चिंताएँ

  • वर्ष 2006 की अधिसूचना का एक सकारात्मक पक्ष इसकी गतिशीलता है, जिसके कारण समय की आवश्यकताओं के अनुरूप इसके प्रावधानों एवं प्रक्रियाओं में संशोधन संभव हुआ।
  • किंतु इस विशेषता का अनेक अवसरों पर दुरुपयोग भी किया गया।
  • मात्र पाँच वर्षों में 110 से अधिक संशोधन किए गए, जिनमें से अधिकांश बिना सार्वजनिक परामर्श के किए गए।
  • इस अत्यधिक लचीलेपन के कारण अनेक उद्योगों को पर्यावरणीय क्षति पहुँचाने अथवा प्रदूषण फैलाने के बावजूद स्वीकृतियाँ प्राप्त हो गईं।

पर्यावरण प्रभाव आकलन प्रक्रिया में सुधार हेतु सर्वोत्तम उपाय

  • हितों के टकराव से बचने के लिए एक स्वतंत्र पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण की स्थापना की जाए।
  • विशेष रूप से स्थानीय भाषाओं में जनपरामर्श प्रक्रिया को अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाया जाए।
  • आधारभूत पर्यावरणीय आँकड़ों को वैज्ञानिक, अद्यतन तथा पूर्णतः पारदर्शी बनाया जाए।
  • पर्यावरणीय आवश्यकताओं के अनुरूप समय-समय पर स्वीकृति से मुक्त परियोजनाओं की सूची की समीक्षा एवं अद्यतन किया जाए।

स्रोत: TH

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/शासन संदर्भ 2 अगस्त से यूरोपीय संघ ने ऑनलाइन पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा निर्मित सामग्री पर अनिवार्य लेबल लगाने का प्रावधान लागू किया है। परिचय उद्देश्य: पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा मानव उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन परिवर्तित अथवा कृत्रिम रूप से निर्मित सामग्री की पहचान करने में सक्षम बनाना। यह प्रावधान यूरोपीय...
Read More

पाठ्यक्रम: GS2/शासन; कल्याणकारी योजनाएँ संदर्भ प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक समान एवं समावेशी पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छात्रों को बिना संपार्श्विक (गिरवी) तथा बिना जमानत शिक्षा ऋण उपलब्ध कराने के साथ-साथ ब्याज सहायता भी प्रदान कर रही है। प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना यह नवंबर 2024 में अनुमोदित केंद्र सरकार की एक योजना...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था  संदर्भ भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर ने कहा है कि भारतीय रुपया नाममात्र प्रभावी विनिमय दर तथा वास्तविक प्रभावी विनिमय दर दोनों के संदर्भ में अवमूल्यित है। परिचय भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर ने स्पष्ट किया कि बैंक किसी विशिष्ट विनिमय दर को लक्ष्य नहीं बनाता। भारतीय रिज़र्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था संदर्भ हाल ही में भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण ने बीमा उद्योग के आधुनिकीकरण, सुशासन को सुदृढ़ करने, पॉलिसीधारकों के संरक्षण को सशक्त बनाने तथा बीमा के प्रसार में तीव्रता लाने के उद्देश्य से अनेक सुधारों को अनुमोदित किया है। ये सुधार ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025’ के...
Read More

पाठ्यक्रम:GS3/रक्षा संदर्भ भारत थिएटरकरण (एकीकृत थिएटर कमान व्यवस्था) की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के निकट है, जिसके अंतर्गत थल सेना, नौसेना तथा वायु सेना को संयुक्त थिएटर कमानों के अधीन संगठित किया जाएगा। थिएटरकरण (एकीकृत थिएटर कमान व्यवस्था) थिएटरकरण से अभिप्राय थल सेना, वायु सेना तथा नौसेना की कमान संरचनाओं का एकीकरण करना है,...
Read More

रूस के व्यापारिक साझेदारों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने संबंधी विधेयक को संयुक्त राज्य अमेरिका में त्वरित स्वीकृति प्रक्रिया पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध संदर्भ संयुक्त राज्य अमेरिका की सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस एवं ईरान प्रतिबंध अधिनियम, 2026’ को त्वरित स्वीकृति प्रक्रिया के अंतर्गत आगे बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया है।...
Read More
scroll to top