रूस के व्यापारिक साझेदारों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने संबंधी विधेयक को संयुक्त राज्य अमेरिका में त्वरित स्वीकृति प्रक्रिया
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- संयुक्त राज्य अमेरिका की सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस एवं ईरान प्रतिबंध अधिनियम, 2026’ को त्वरित स्वीकृति प्रक्रिया के अंतर्गत आगे बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया है।
परिचय
- यह विधेयक संयुक्त राज्य अमेरिका को रूस से कच्चा तेल अथवा प्राकृतिक गैस खरीदने वाले विश्व के शीर्ष पाँच आयातक देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का अधिकार प्रदान करता है। इनमें भारत एवं चीन भी शामिल हैं।
- चीन एवं भारत के अतिरिक्त रूस से तेल खरीदने वाले अन्य प्रमुख देश स्लोवाकिया, हंगरी तथा अज़रबैजान हैं।
- विधेयक के अनुसार संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि प्रत्येक 180 दिनों में रूस से तेल एवं प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पाँच देशों की सूची की पुनः समीक्षा करेगा तथा खरीद व्यवहार में परिवर्तन के आधार पर शुल्क दरों में संशोधन करेगा।
- जिन देशों की प्राकृतिक गैस आयात में रूस की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से कम है तथा जो रूसी आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कदम उठा रहे हैं, उन्हें इस प्रावधान से छूट प्रदान की जाएगी।
- ईरान के संबंध में यह विधेयक ईरान प्रतिबंध अधिनियम की अवधि को अतिरिक्त पाँच वर्ष के लिए बढ़ाकर वर्ष 2031 तक प्रभावी बनाए रखता है।
- साथ ही, ईरान के ऊर्जा एवं शस्त्र क्षेत्रों के वित्तपोषण को सीमित करने हेतु वर्तमान प्रतिबंधात्मक प्रावधानों को भी जारी रखा गया है।
- विधेयक के समर्थकों का मत है कि इससे रूस की ऊर्जा आय में कमी आएगी, जिससे यूक्रेन में युद्ध के वित्तपोषण की उसकी क्षमता कमजोर होगी।
स्रोत: TH
दानवीर पहल
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-2 / शासन
समाचार में
- पंचायती राज मंत्रालय ने ग्राम पंचायतों के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए दानवीर पहल का शुभारंभ किया है।
दानवीर पहल
- यह नागरिक सहभागिता आधारित पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर की ग्राम पंचायतों के डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना है।
- इसके माध्यम से नागरिक, संस्थाएँ, परोपकारी संगठन तथा भारतीय प्रवासी समुदाय पात्र ग्राम पंचायतों को स्वैच्छिक रूप से मानकीकृत कंप्यूटर किट दान कर सकेंगे।
- इस पहल से लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को लाभ मिलने की संभावना है।
- यह ई-ग्रामस्वराज, मेरी पंचायत, सभा सार, ऑडिटऑनलाइन तथा ग्राम मानचित्र जैसे वर्तमान डिजिटल शासन मंचों को सुदृढ़ करेगी।
प्रमुख विशेषताएँ
- प्रत्येक राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप पूर्व-स्वीकृत एवं गुणवत्ता-परीक्षित कंप्यूटर किट उपलब्ध कराई जाएगी।
- दान प्रक्रिया की संपूर्ण डिजिटल निगरानी, स्वचालित वितरण विवरण, पारदर्शिता तथा दानदाताओं को डिजिटल प्रशंसा प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।
- यह सुविधा मेरी पंचायत मोबाइल अनुप्रयोग पर उपलब्ध है।
- इसे डिजीहाट मंच से जोड़ा गया है, जिससे दान प्रक्रिया सरल हो सके।
महत्त्व
- इससे बुनियादी स्तर पर डिजिटल शासन एवं लोक सेवाओं की आपूर्ति में सुधार होगा।
- ग्राम पंचायत सेवाओं की दक्षता, पारदर्शिता एवं पहुँच में वृद्धि होगी।
- यह पारदर्शी एवं उत्तरदायी डिजिटल मंच के माध्यम से स्वैच्छिक जनभागीदारी को संस्थागत स्वरूप प्रदान करता है।
- यह डिजिटल भारत, विकसित भारत तथा डिजिटल रूप से सशक्त ग्रामीण शासन के लक्ष्य को प्रोत्साहित करता है।
स्रोत: PIB
सरकार द्वारा ₹10 एवं ₹20 के पॉलीमर बैंक नोटों के परीक्षण को स्वीकृति प्रदान
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-3 / अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक के ₹10 एवं ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलीमर बैंक नोटों को प्रायोगिक आधार पर जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
परिचय
- भारतीय रिज़र्व बैंक ₹10 एवं ₹20 मूल्यवर्ग के 100-100 करोड़ पॉलीमर बैंक नोट क्षेत्रीय परीक्षण हेतु जारी करेगा।
- परीक्षण सफल होने के पश्चात इन मूल्यवर्गों में पॉलीमर बैंक नोटों का नियमित प्रचलन प्रारंभ करने पर विचार किया जाएगा।
पॉलीमर बैंक नोट क्या हैं?
- परंपरागत सूती कागज आधारित बैंक नोटों के विपरीत पॉलीमर बैंक नोट अधिक सतत होते हैं तथा धूल, आर्द्रता एवं फटने के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं।
- इनकी आयु अधिक होती है तथा इनमें उन्नत सुरक्षा विशेषताएँ होती हैं, जिससे जालसाजी करना अधिक कठिन हो जाता है।
- ऑस्ट्रेलिया वर्ष 1988 में पॉलीमर मुद्रा जारी करने वाला प्रथम देश था।
- वर्तमान में यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया तथा वियतनाम सहित 60 से अधिक देश पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से पॉलीमर बैंक नोटों का उपयोग कर रहे हैं।
भारत में पूर्व प्रयास
- भारत ने पूर्व में भी पॉलीमर बैंक नोटों का परीक्षण किया था।
- वर्ष 2012 में भारतीय रिज़र्व बैंक ने कोच्चि, मैसूरु, जयपुर, भुवनेश्वर एवं शिमला में ₹10 के पॉलीमर बैंक नोटों का पायलट परीक्षण किया था, जिससे विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में उनकी उपयोगिता का मूल्यांकन किया जा सके।
- बाद में परिचालन संबंधी कठिनाइयों तथा स्वचालित बैंकिंग मशीनों से जुड़ी समस्याओं के कारण इस पहल को स्थगित कर दिया गया।
- वर्तमान में इन तकनीकी चुनौतियों का समाधान कर लिया गया है, जिससे स्वचालित बैंकिंग मशीनें पॉलीमर बैंक नोटों को सुचारु रूप से संसाधित कर सकती हैं।
इस पहल का महत्त्व
- भारत में नकदी की माँग निरंतर बढ़ रही है।
- देश में प्रचलित मुद्रा का कुल मूल्य ₹42.86 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है, जिसमें वर्ष-दर-वर्ष 11.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली के व्यापक प्रसार के बावजूद नकदी का महत्त्व बना हुआ है।
- दूसरी ओर, कागजी मुद्रा के मुद्रण एवं रखरखाव की लागत निरंतर बढ़ रही है।
- वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत ने बैंक नोटों की छपाई पर ₹6,370 करोड़ से अधिक व्यय किया, जबकि लगभग 23.8 अरब पुराने एवं क्षतिग्रस्त बैंक नोट प्रचलन से वापस लेने पड़े।
स्रोत: AIR
भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन-3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- वर्ष 2026 में भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ की स्थापना के 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं।
परिचय
- वर्ष 1869 में डॉ. महेंद्रलाल सरकार (1833–1904) ने कलकत्ता जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक लेख के माध्यम से भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ की स्थापना का प्रस्ताव रखा।
- वर्ष 1876 में डॉ. महेंद्रलाल सरकार द्वारा इसकी स्थापना भारत के प्रथम ऐसे राष्ट्रीय संस्थान के रूप में की गई, जिसका उद्देश्य भारतीयों द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना था।
- यह संस्थान पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित है।
- यह एक स्वायत्त सार्वजनिक अनुसंधान संस्थान है, जिसका वित्तपोषण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है।
- संस्थान का संचालन शासी परिषद द्वारा किया जाता है, जो इसकी सर्वोच्च नीति-निर्माण संस्था है।
- भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ ने बौद्धिक जिज्ञासा, वैज्ञानिक उत्कृष्टता तथा राष्ट्रसेवा की ऐसी गौरवशाली परंपरा विकसित की है, जो आज भी शोधकर्ताओं की अनेक पीढ़ियों को प्रेरित करती है।
भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिक
- प्रोफेसर चंद्रशेखर वेंकट रमन — नोबेल पुरस्कार विजेता तथा रमन प्रभाव के खोजकर्ता।
- जगदीश चंद्र बोस — रेडियो विज्ञान एवं पादप विज्ञान के अग्रणी वैज्ञानिक।
- मेघनाद साहा — साहा आयनीकरण समीकरण के प्रतिपादक तथा भारत में आधुनिक वैज्ञानिक संस्थानों के प्रमुख शिल्पकार।
- सत्येन्द्र नाथ बोस — अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ उनके सहयोग से बोस–आइंस्टीन सांख्यिकी तथा बोसॉन की अवधारणा का विकास हुआ।
स्रोत: TH
फील्ड्स पदक, 2026
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
- वर्ष 2026 का फील्ड्स पदक, जिसे प्रायः “गणित का नोबेल पुरस्कार” कहा जाता है, यू देंग, जॉन पार्डन, जैकब सिमरमैन तथा हांग वांग को प्रदान किया गया है।
परिचय
- फील्ड्स पदक की स्थापना वर्ष 1936 में की गई थी।
- इसका नाम कनाडा के गणितज्ञ जॉन चार्ल्स फील्ड्स के सम्मान में रखा गया है।
- यह पुरस्कार प्रत्येक चार वर्ष में अंतरराष्ट्रीय गणितीय संघ द्वारा प्रदान किया जाता है।
- अंतरराष्ट्रीय गणितीय संघ एक अंतरराष्ट्रीय, गैर-सरकारी एवं गैर-लाभकारी वैज्ञानिक संगठन है, जिसका उद्देश्य गणित के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।
- यह पदक 40 वर्ष से कम आयु के उन शोधकर्ताओं को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने गणित के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो।
- नोबेल पुरस्कार के विपरीत, जिसे अधिकतम तीन व्यक्तियों के बीच साझा किया जा सकता है, फील्ड्स पदक प्रत्येक चार वर्षीय चक्र में कम-से-कम दो तथा अधिकतम चार व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है।
- प्रत्येक पुरस्कार विजेता को फील्ड्स पदक के साथ 15,000 कनाडाई डॉलर की पुरस्कार राशि भी प्रदान की जाती है।
क्या आप जानते हैं?
- अब तक भारतीय मूल के दो गणितज्ञों को फील्ड्स पदक प्राप्त हुआ है।
- मंजुल भार्गव को वर्ष 2014 में तथा अक्षय वेंकटेश को वर्ष 2018 में यह सम्मान प्रदान किया गया।
स्रोत: TH
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संक्षिप्त समाचार 30-07-2026