पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- हाल ही में भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण ने बीमा उद्योग के आधुनिकीकरण, सुशासन को सुदृढ़ करने, पॉलिसीधारकों के संरक्षण को सशक्त बनाने तथा बीमा के प्रसार में तीव्रता लाने के उद्देश्य से अनेक सुधारों को अनुमोदित किया है।
- ये सुधार ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025’ के प्रभावी क्रियान्वयन को सुगम बनाएँगे।
पृष्ठभूमि
- बीमा उद्योग अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण घटक है, जो वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने, दीर्घकालिक बचत को प्रोत्साहित करने तथा आर्थिक विकास में योगदान देने का कार्य करता है।
- ‘वर्ष 2047 तक सभी के लिए बीमा’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण ने नियामकीय एवं पर्यवेक्षी सुधार लागू किए हैं, ताकि बीमा क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, दक्ष एवं निवेशक-अनुकूल बनाया जा सके, साथ ही पॉलिसीधारकों के हितों का अधिक प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित प्रमुख सुधार
- परिचालन एवं वित्तीय लचीलेपन में वृद्धि: भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण ने निम्नलिखित विनियमों में संशोधन को अनुमोदित किया है—
- बीमाकर्ताओं के बीमांकिक, वित्तीय एवं निवेश कार्य विनियम (द्वितीय संशोधन), 2026
- बीमाकर्ताओं का पंजीकरण, पूँजी संरचना, अंशों का अंतरण एवं समामेलन विनियम (संशोधन), 2026
- प्रमुख प्रावधान:
- बीमाकर्ताओं के लिए निवेश संबंधी मानदंडों का उदारीकरण।
- पूँजी निवेश को अधिक सरल बनाना।
- निगमीय पुनर्गठन की प्रक्रिया का सरलीकरण।
- अंशों के अंतरण एवं समामेलन से संबंधित नियमों का सुव्यवस्थितीकरण।
- बीमांकिक पर्यवेक्षण एवं वित्तीय प्रशासन को अधिक सुदृढ़ बनाना।
- अपेक्षित परिणाम:
- व्यवसाय करने में सुगमता में वृद्धि।
- बीमा कंपनियों की वित्तीय सुदृढ़ता में सुधार।
- पॉलिसीधारकों के हितों से समझौता किए बिना दीर्घकालिक विकास को प्रोत्साहन।
- पॉलिसीधारक शिक्षा एवं संरक्षण निधि: भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण ने पॉलिसीधारक शिक्षा एवं संरक्षण निधि विनियम, 2026 को अपनाया है।
- यह निधि भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 की धारा 16क के अंतर्गत स्थापित की गई है, जिसे ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025’ द्वारा जोड़ा गया है।
- निधि के उद्देश्य:
- बीमा संबंधी जागरूकता एवं वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना।
- शिकायत निवारण तंत्र को अधिक प्रभावी बनाना।
- प्रौद्योगिकी के माध्यम से पॉलिसीधारकों को बेहतर सेवाएँ उपलब्ध कराना।
- दावा न की गई बीमा राशि का पता लगाने एवं उसे लाभार्थियों तक पहुँचाने में सहायता करना।
- पॉलिसीधारकों के संरक्षण एवं सशक्तीकरण से संबंधित पहलों को समर्थन देना।
- यह निधि उपभोक्ता संरक्षण को संस्थागत स्वरूप प्रदान करती है तथा बीमा पारितंत्र में जनविश्वास को सुदृढ़ बनाती है।
- बीमा मध्यस्थों से संबंधित सुधार: भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण ने बीमा मध्यस्थों से संबंधित दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है।
- प्रमुख परिवर्तन: प्रत्येक बीमा प्रस्ताव, पॉलिसी एवं प्रमाण-पत्र पर अधिकृत विक्रय प्रतिनिधि का नाम अंकित करना अनिवार्य।
- समय-समय पर नवीनीकरण के स्थान पर वार्षिक शुल्क के आधार पर सतत पंजीकरण।
- ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा अधिनियम’ तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश संबंधी नियमों के अनुरूप व्यवस्था।
- सुशासन, प्रकटीकरण एवं उत्तरदायित्व के उच्चतर मानदंड।
- लाभ: बीमा वितरण प्रणाली में उत्तरदायित्व एवं अनुरेखण क्षमता में वृद्धि।
- पॉलिसीधारकों के लिए अधिक पारदर्शिता।
- अनुपालन लागत में कमी।
- मध्यस्थों, तृतीय पक्ष प्रशासकों तथा सर्वेक्षकों द्वारा सेवा प्रदायगी में सुधार।
- प्रमुख परिवर्तन: प्रत्येक बीमा प्रस्ताव, पॉलिसी एवं प्रमाण-पत्र पर अधिकृत विक्रय प्रतिनिधि का नाम अंकित करना अनिवार्य।
- पारदर्शी दंड व्यवस्था: भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण ने दंड अधिरोपण की प्रक्रिया एवं पद्धति विनियम, 2026 को अनुमोदित किया।
- प्रमुख प्रावधान:
- दंडात्मक कार्रवाई हेतु एक समान एवं पारदर्शी व्यवस्था।
- नियामकीय प्रक्रियाओं के लिए संरचित प्रणाली।
- कारण बताओ सूचना जारी करने की स्पष्ट एवं पारदर्शी प्रक्रिया।
- महत्त्व:
- नियामकीय कार्यवाहियों में निष्पक्षता एवं एकरूपता सुनिश्चित होती है।
- नियामकीय स्पष्टता बढ़ती है।
- उत्तरदायित्व एवं जनविश्वास को प्रोत्साहन मिलता है।
- प्रमुख प्रावधान:
- बीमा क्षेत्र का विस्तार: प्रोटेक जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड को भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा पंजीकरण प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।
- यह वर्ष 2026 में पंजीकृत चौथी बीमा कंपनी है।
- इनमें दो सामान्य बीमा कंपनियाँ, एक स्वास्थ्य बीमा कंपनी तथा एक पुनर्बीमा कंपनी सम्मिलित हैं।
- यह बीमा क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा एवं विस्तार का संकेत है।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश संबंधी सुधार: सरकार ने बीमा कंपनियों में 100 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देने की घोषणा की है।
- एक जीवन बीमा कंपनी तथा एक सामान्य बीमा कंपनी में पहले ही विदेशी अंशधारिता पूर्व निर्धारित 74 प्रतिशत की सीमा से अधिक हो चुकी है।
- अपेक्षित प्रभाव:
- पूँजी निवेश में वृद्धि।
- निवेशकों के विश्वास में सुधार।
- नवाचार एवं विस्तार क्षमता को प्रोत्साहन।
- भारतीय बीमा क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा।
सुधारों का महत्त्व
- पॉलिसीधारकों के संरक्षण को सुदृढ़ बनाना।
- सुशासन एवं नियामकीय पर्यवेक्षण को सुदृढ़ करना।
- पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व में वृद्धि।
- बीमा क्षेत्र के विकास एवं पूँजी निर्माण को प्रोत्साहन।
- अनुपालन प्रक्रियाओं का सरलीकरण तथा व्यवसाय करने में सुगमता।
- देशभर में बीमा कवरेज के विस्तार के लक्ष्य को समर्थन।
संबंधित चुनौतियाँ
- बीमा कंपनियों एवं मध्यस्थों द्वारा सुधारों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
- उपभोक्ता संरक्षण एवं नियामकीय लचीलेपन के बीच संतुलन बनाए रखना।
- ग्रामीण एवं अल्प-वित्तीय सेवाओं वाले क्षेत्रों में बीमा कवरेज का विस्तार।
- नागरिकों में बीमा संबंधी साक्षरता का अभाव।
- शिकायत निवारण एवं दावा न की गई राशि की वापसी हेतु डिजिटल अवसंरचना का उन्नयन।
आगे की राह
- ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025’ तथा उससे संबंधित विनियमों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
- बीमा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लक्षित वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम संचालित किए जाएँ।
- पॉलिसीधारक सेवाओं एवं शिकायत निवारण के लिए डिजिटल मंचों को अधिक सुदृढ़ बनाया जाए।
- नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए प्रभावी नियामकीय निगरानी बनाए रखी जाए।
- ‘वर्ष 2047 तक सभी के लिए बीमा’ के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु किफायती बीमा उत्पादों की उपलब्धता एवं पहुँच का विस्तार किया जाए।
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