साइबर अपराध के विरुद्ध सख्त कार्रवाई

पाठ्यक्रम: जीएस-3/साइबर सुरक्षा

सन्दर्भ

  • गृह मंत्रालय (MHA) ने देश में बढ़ते साइबर धोखाधड़ी के मामलों से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी प्रधानमंत्री को दी है।

साइबर अपराध क्या है?

  • साइबर अपराध से आशय कंप्यूटर, इंटरनेट तथा अन्य डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके आपराधिक गतिविधियाँ करने से है।
  • इसमें वित्तीय धोखाधड़ी (क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, ऑनलाइन लेन-देन में धोखाधड़ी), महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध यौन स्पष्ट सामग्री से संबंधित अपराध तथा डीपफेक सामग्री जैसे अपराध शामिल हैं।
  • भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार साइबर अपराध राज्य सूची के विषयों के अंतर्गत आते हैं।

भारत में साइबर अपराध की स्थिति

  • वर्ष 2019 से 2026 के बीच 98 लाख साइबर अपराध शिकायतें दर्ज की गईं।
  • इनमें से केवल 2.3 लाख प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज हुईं, जिससे FIR रूपांतरण दर केवल 2.36% रही।
  • 2021–2026 के दौरान साइबर अपराध से ₹64,447 करोड़ का नुकसान दर्ज किया गया।

साइबर अपराध में वृद्धि के कारण

1. तीव्र डिजिटलकरण

  • इंटरनेट एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियों पर व्यक्तियों तथा व्यवसायों की बढ़ती निर्भरता के कारण साइबर अपराधियों को कमजोरियों का लाभ उठाने के अधिक अवसर मिल रहे हैं।

2. इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या

  • भारत में लगभग 95 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं। बड़ी संख्या में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के कारण साइबर अपराधियों के लिए संभावित लक्ष्यों की संख्या बढ़ गई है, जिससे भारत साइबर हमलों के लिए आकर्षक बाजार बन गया है।

3. अपर्याप्त साइबर सुरक्षा अवसंरचना

  • भारत की साइबर सुरक्षा व्यवस्था अभी विकास के चरण में है।
  • विशेषकर छोटे व्यवसायों में मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों का अभाव उन्हें साइबर अपराधियों का आसान लक्ष्य बना देता है।

4. आंतरिक खतरे (Insider Threats)

  • संवेदनशील जानकारी तक पहुँच रखने वाले कर्मचारी या अन्य व्यक्ति यदि उसका दुरुपयोग करते हैं, तो यह विशेष रूप से कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बन जाता है।

5. भुगतान प्रणालियों की संवेदनशीलता

  • डिजिटल भुगतान तथा ऑनलाइन लेन-देन में वृद्धि के साथ फिशिंग, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी तथा ऑनलाइन ठगी जैसी वित्तीय अपराधों का जोखिम भी बढ़ा है।
  • वर्ष 2024 में भारत में UPI के माध्यम से लगभग ₹20,64,000 करोड़ के लेन-देन हुए, जो विश्व के कुल डिजिटल लेन-देन का लगभग 46% है।

6. निम्न डिजिटल साक्षरता

  • आम जनता में साइबर सुरक्षा के प्रति कम जागरूकता तथा डिजिटल असमानता साइबर क्षेत्र को अधिक असुरक्षित बनाती है।

साइबर अपराध के प्रभाव

1. वित्तीय हानि

  • साइबर अपराध के कारण व्यक्तियों एवं संस्थाओं को धन की चोरी, धोखाधड़ी तथा प्रभावित प्रणालियों की पुनर्स्थापना पर भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

2. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा

  • भू-राजनीतिक उद्देश्यों से किए गए साइबर हमले सरकारी संस्थानों, महत्वपूर्ण अवसंरचना तथा रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाकर राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करते हैं।

3. आँकड़ों का उल्लंघन (Data Breach)

  • संवेदनशील व्यक्तिगत एवं वित्तीय आँकड़ों की अनधिकृत पहुँच और चोरी से गोपनीयता भंग होती है, प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचता है तथा कानूनी परिणाम भी सामने आते हैं।

4. सेवाओं में व्यवधान

  • साइबर हमलों के कारण आवश्यक सेवाएँ तथा महत्वपूर्ण अवसंरचना बाधित होती हैं, जिससे व्यवसायों, सरकारों और नागरिकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

5. बौद्धिक संपदा की हानि

  • व्यापारिक संस्थानों की बौद्धिक संपदा, व्यापारिक रहस्य तथा स्वामित्व संबंधी जानकारी की चोरी से उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और नवाचार प्रभावित होते हैं, जिससे आर्थिक नुकसान होता है।

साइबर सुरक्षा हेतु सरकार द्वारा उठाए गए कदम

1. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000

  • इस अधिनियम की धारा 43, 66, 70 एवं 74 हैकिंग तथा साइबर अपराधों से संबंधित हैं।

2. भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In)

  • यह नवीनतम साइबर खतरों एवं कमजोरियों के संबंध में नियमित रूप से चेतावनी, परामर्श तथा सुरक्षा उपाय जारी करता है।

3. राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र (NCCC)

  • वर्तमान एवं संभावित साइबर सुरक्षा खतरों की स्थिति का आकलन करने तथा समय पर सूचना साझा कर सक्रिय, निवारक एवं सुरक्षात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए इसकी स्थापना की गई है।

4. साइबर स्वच्छता केंद्र

  • बॉटनेट सफाई एवं मैलवेयर विश्लेषण केंद्र के रूप में स्थापित यह केंद्र दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर की पहचान करता है तथा उन्हें हटाने के लिए निःशुल्क उपकरण उपलब्ध कराता है।

5. चक्षु सुविधा

  • संचार साथी पोर्टल पर प्रारंभ की गई यह सुविधा नागरिकों को कॉल, SMS अथवा व्हाट्सएप के माध्यम से प्राप्त संदिग्ध धोखाधड़ीपूर्ण संदेशों की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

6. भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C)

  • वर्ष 2018 में गृह मंत्रालय के साइबर एवं सूचना सुरक्षा प्रभाग के अंतर्गत इसकी स्थापना की गई।
  • यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों को साइबर अपराधों से समन्वित एवं व्यापक तरीके से निपटने हेतु आवश्यक ढाँचा एवं तंत्र उपलब्ध कराता है।

7. ई-शून्य एफआईआर (E-Zero FIR) पहल

  • गृह मंत्रालय द्वारा प्रारंभ की गई यह पहल साइबर वित्तीय अपराधों के मामलों का शीघ्र पंजीकरण एवं जाँच सुनिश्चित करती है।
  • राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) अथवा 1930 हेल्पलाइन पर दर्ज ₹10 लाख से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों को स्वतः एफआईआर में परिवर्तित किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय उपाय

1. बुडापेस्ट अभिसमय

  • यह साइबर अपराध से निपटने वाली विश्व की पहली अंतरराष्ट्रीय संधि है।
  • भारत इसका हस्ताक्षरकर्ता नहीं है।

2. इंटरनेट कॉरपोरेशन फॉर असाइंड नेम्स एंड नंबर्स (ICANN)

  • यह अमेरिका स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो इंटरनेट से संबंधित विभिन्न डाटाबेस के समन्वय एवं रखरखाव का कार्य करती है।

3. इंटरनेट गवर्नेंस फोरम

  • यह संयुक्त राष्ट्र का बहु-हितधारक मंच है, जहाँ इंटरनेट शासन से जुड़े नीतिगत विषयों पर संवाद किया जाता है।

आगे की राह

  • भारत आज डिजिटल परिवर्तन और साइबर खतरों के ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ वह एक ओर डिजिटल प्रगति का मजबूत स्तंभ है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराधियों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बन गया है।
  • डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को साकार करने के लिए सरकार की बहु-स्तरीय साइबर प्रतिक्रिया प्रणाली धोखाधड़ी की रोकथाम तथा हजारों साइबर ठगी अभियानों को विफल करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
  • उन्नत डिजिटल फोरेंसिक, बिग डेटा एनालिटिक्स (Big Data Analytics) तथा स्वदेशी साइबर सुरक्षा उपकरणों ने भारत की साइबर सुरक्षा क्षमता को और अधिक सुदृढ़ बनाया है।

स्रोत: IE

 

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