संक्षिप्त समाचार 09-07-2026

परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2.0

पाठ्यक्रम: जीएस-2 / शिक्षा

संदर्भ

  • केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 2025–26 के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों हेतु परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI-S) तथा जिलों हेतु परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI-D) की रिपोर्ट जारी की।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों हेतु प्रदर्शन श्रेणीकरण सूचकांक (PGI-S)

  • पीजीआई-राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की संरचना में 70 संकेतकों पर आधारित 1,000 अंकों का कुल भारांक है, जिन्हें दो श्रेणियों—परिणाम (Outcome) तथा शासन एवं प्रबंधन (Governance & Management)—में विभाजित किया गया है। इन श्रेणियों को आगे 16 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जैसे—
    • अधिगम परिणाम एवं गुणवत्ता,
    • पहुँच,
    • अवसंरचना एवं सुविधाएँ,
    • समानता,
    • शासन प्रक्रियाएँ, तथा
    • शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण।
  • यह रूपरेखा एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली प्लस (UDISE+), परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024, पीएम पोषण पोर्टल, प्रबंध पोर्टल तथा विद्यांजलि पोर्टल के आँकड़ों के साथ पूर्णतः समन्वित है।

जिलों के लिए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स(PGI-D)

  • PGI-D की रूपरेखा में 70 संकेतकों पर आधारित 600 अंकों का कुल भारांक है, जिन्हें 6 श्रेणियों में विभाजित किया गया है—
  • परिणाम,
  • प्रभावी कक्षा शिक्षण,
  • अवसंरचना, सुविधाएँ एवं विद्यार्थी अधिकार,
  • विद्यालय सुरक्षा एवं बाल संरक्षण,
  • डिजिटल अधिगम,
  • शासन प्रक्रिया।

इन श्रेणियों को आगे 11 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है

  • अधिगम परिणाम एवं गुणवत्ता (LOQ),
  • पहुँच परिणाम (AO),
  • शिक्षक उपलब्धता एवं व्यावसायिक विकास परिणाम (TAPDO),
  • अधिगम प्रबंधन (LM),
  • अधिगम समृद्धि गतिविधियाँ (LEA),
  • अवसंरचना, सुविधाएँ एवं विद्यार्थी अधिकार (IF&SE),
  • विद्यालय सुरक्षा एवं बाल संरक्षण (SS&CP),
  • डिजिटल अधिगम (DL),
  • निधियों का अभिसरण एवं उपयोग (FCU),
  • उपस्थिति निगरानी प्रणाली (AMS), तथा
  • विद्यालय नेतृत्व विकास (SLD)।
  • PGI-D के आँकड़े UDISE+, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 (PRS 2024) तथा प्रबंध पोर्टल से प्राप्त किए जाते हैं।

स्रोत: PIB

हम्मस ट्रेल(Hummus Trail)

पाठ्यक्रम: जीएस-2 / अंतर्राष्ट्रीय संबंध

सन्दर्भ

  • एक अधिकार संगठन ने ‘हम्मस ट्रेल’ पर देखे गए एक इज़रायली सैनिक के विरुद्ध भारत में ‘युद्ध अपराध’ की शिकायत दर्ज कराई है।

परिचय

  • हम्मस ट्रेल भारत के उन स्थलों के अनौपचारिक नेटवर्क को कहा जाता है, जो विशेष रूप से युवा इज़रायली यात्रियों के बीच लोकप्रिय हैं।
  • इन स्थानों पर प्रायः हिब्रू भाषा के साइनबोर्ड, इज़रायली कैफ़े, चाबाद हाउस तथा छात्रावास होते हैं, जो आगंतुकों के लिए परिचित वातावरण प्रदान करते हैं।

पृष्ठभूमि

  • प्रत्येक वर्ष लगभग 80,000 इज़रायली भारत आते हैं, जिनमें से अधिकांश अपनी अनिवार्य सैन्य सेवा पूरी करने के बाद यात्रा करते हैं।
  • सैन्य सेवा के बाद की यह लंबी यात्रा ‘तिउल गाडोल (Tiul Gadol)’ या ‘द बिग ट्रिप’ कहलाती है, जो सामान्यतः 6–12 माह तक चलती है और इसे एक सांस्कृतिक परंपरा माना जाता है।
  • वर्ष 2026 में इज़रायल ने भारत के साथ पर्यटन सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए 40 लाख NIS आवंटित किए।

कानूनी पक्ष

  • भारत चौथे जिनेवा अभिसमय का पक्षकार है।
  • जिनेवा अभिसमय अधिनियम, 1960 के अंतर्गत भारतीय न्यायालय जिनेवा अभिसमयों के गंभीर उल्लंघन के आरोपी व्यक्तियों पर मुकदमा चला सकते हैं, यदि वे भारत में पाए जाते हैं, चाहे कथित अपराध कहीं भी हुआ हो।

प्रमुख विशेषताएँ

  • इसके प्रमुख गंतव्यों में कसोल, ओल्ड मनाली, धर्मकोट, पुष्कर, गोवा, हम्पी, केरल तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह शामिल हैं।
  • अनेक यात्री सैन्य सेवा के बाद विश्राम एवं पुनर्वास, विशेषकर युद्ध-संबंधी तनाव से उबरने के लिए इस मार्ग का उपयोग करते हैं।
  • कुछ स्थानों पर रेव पार्टियों, मादक पदार्थों के दुरुपयोग तथा नशीले पदार्थों से संबंधित गतिविधियों को लेकर भी चिंताएँ सामने आई हैं, जिसके कारण अधिकारियों द्वारा निगरानी बढ़ाई गई है।

स्रोत: IE

गुवाहाटी घोषणा

पाठ्यक्रम: जीएस-2 / शासन

समाचारों में क्यों ?

  • हाल ही में ब्रिक्स (BRICS) देशों ने गुवाहाटी घोषणा को अपनाया। 

परिचय

  • इस घोषणा में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के बदलते स्वरूप से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग का आह्वान किया गया है।
  • इसमें कृत्रिम मादक पदार्थों तथा नए मनःप्रभावी पदार्थों (NPS) के प्रसार, उभरती प्रौद्योगिकियों एवं डिजिटल मंचों के दुरुपयोग तथा अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों द्वारा समुद्री मार्गों के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की गई।
  • गुवाहाटी बैठक में ब्राज़ील, चीन, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस तथा संयुक्त अरब अमीरात ने भाग लिया।

स्रोत: TH

भूल जाने का अधिकार क्या है?

पाठ्यक्रम: जीएस-2 / शासन

समाचारों में क्यों ?

  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने भूल जाने के अधिकार से संबंधित सिद्धांत निर्धारित किए हैं। 

समाचार के बारे में

  • लक्ष्य वीर सिंह यादव बनाम भारत संघ मामले में न्यायालय ने कहा कि भूल जाने का अधिकार अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त गरिमा एवं सूचना संबंधी निजता के अधिकार से उत्पन्न होता है।
  • उच्च न्यायालय ने के. एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017) में उच्चतम न्यायालय के निर्णय का अनुसरण किया, जिसमें अनुच्छेद 21 के अंतर्गत निजता के अधिकार, जिसमें सूचना संबंधी निजता भी शामिल है, को मौलिक अधिकार माना गया था।
  • न्यायालय ने कहा कि संरचित आनुपातिकता परीक्षण के अनुसार सूचना को बनाए रखने का वैध उद्देश्य होना चाहिए तथा निजता को होने वाली हानि और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन स्थापित किया जाना चाहिए।

‘भूल जाने का अधिकार’ क्या है?

  • भूल जाने का अधिकार वह अधिकार है, जिसके अंतर्गत किसी व्यक्ति से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक डिजिटल वातावरण से हटाया या खोज परिणामों (De-indexing) से बाहर किया जा सकता है, यदि उसकी निरंतर उपलब्धता हानिकारक हो तथा उससे कोई सार्वजनिक हित न जुड़ा हो।
  • यह अवधारणा 2014 में प्रमुखता से सामने आई, जब स्पेन के नागरिक मारियो कोस्टेजा गोंज़ालेज़ ने यूरोपीय न्यायालय में शिकायत की कि ऋण चुकाने के बाद भी गूगल उनके घर की नीलामी से संबंधित पुराने समाचार को प्रदर्शित कर रहा था।
  • न्यायालय ने उनके पक्ष में निर्णय दिया, जिससे मिटाने के अधिकार (Right to Erasure) की नींव पड़ी, जिसे बाद में यूरोपीय संघ के सामान्य डेटा संरक्षण विनियमन (GDPR) के अनुच्छेद 17 में शामिल किया गया।

चुनौतियाँ क्या हैं?

  • खोज परिणामों से जानकारी हटाने (De-indexing) से केवल खोज स्तर पर लाभ मिलता है, लेकिन इससे प्रतिलिपियाँ (Mirrors), अभिलेखीय प्रतियाँ (Archive Copies) अथवा सामाजिक माध्यमों पर साझा की गई सामग्री नहीं हटती।
  • प्रभावी तकनीकी अनुपालन तथा विभिन्न मंचों के बीच समन्वय के अभाव में यह अधिकार काफी हद तक केवल प्रतीकात्मक बनकर रह सकता है।

स्रोत: TH

पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR)

पाठ्यक्रम: जीएस-3 / रक्षा

सन्दर्भ

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण क्षेत्र (ITR) में पिनाका दीर्घ दूरी निर्देशित रॉकेट (LRGR) का सफल उड़ान परीक्षण किया।

पिनाका का परिचय

  • पिनाका एक स्वदेशी मल्टीबैरल रॉकेट प्रक्षेपण प्रणाली (MBRL) है, जिसका नाम भगवान शिव के पौराणिक धनुष ‘पिनाक’ पर रखा गया है।
  • इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने रूसी मूल की ग्रैड रॉकेट प्रणाली के विकल्प के रूप में विकसित किया।
  • इस प्रणाली का पहली बार कारगिल युद्ध (1999) के दौरान परिचालन उपयोग किया गया।

प्रमुख विशेषताएँ

  • यह सभी मौसमों में कार्य करने वाली तोपखाना रॉकेट प्रणाली है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 120 किलोमीटर है तथा यह केवल 44 सेकंड में 12 रॉकेटों की एक साथ बौछार कर सकती है।
  • इसमें शूट एंड स्कूट (Shoot-and-Scoot) क्षमता है, जिससे प्रक्षेपण के बाद यह शीघ्र स्थान बदल सकती है और शत्रु के जवाबी हमलों से बच सकती है।

क्या आप जानते हैं ?

  • पिनाका ने निर्यात के क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त की है। आर्मेनिया इसका पहला विदेशी ग्राहक बना है, जबकि कई अन्य देशों ने भी इस प्रणाली को खरीदने में रुचि व्यक्त की है।

स्रोत: DDNews

अस्त्र मिसाइल

पाठ्यक्रम: जीएस-3 / रक्षा

सन्दर्भ

  • इंडोनेशिया भारत की अस्त्र मिसाइलों के आयात हेतु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला पहला देश बन गया।
  • इन मिसाइलों को इंडोनेशिया के Su-30 लड़ाकू विमानों में लगाया जाएगा।

अस्त्र मिसाइल का परिचय 

  • विकासकर्ता: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)
  • प्रकार: उन्नत दृश्य सीमा से परे एयर-टू-एयर मिसाइल (BVRAAM)
  • मारक क्षमता: 100 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित हवाई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम।
  • विशेषताएँ:
    • उच्च सटीकता के लिए उन्नत मार्गदर्शन एवं नेविगेशन प्रणाली।
    • सभी मौसमों तथा दिन-रात संचालन की क्षमता।
    • अधिकतम गति: मैक 4 से अधिक।
    • परिचालन ऊँचाई: 20 किलोमीटर तक।
  • महत्व:भारत की स्वदेशी वायु युद्ध क्षमता को सुदृढ़ करती है तथा रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप है। 

स्रोत: IE

डूरंड कप

पाठ्यक्रम: विविध

सन्दर्भ

  • भारत की राष्ट्रपति ने डूरंड कप प्रतियोगिता 2026 की ट्रॉफियों का अनावरण किया तथा उन्हें औपचारिक रूप से रवाना किया।

डूरंड कप का परिचय

  • 1888 में स्थापित डूरंड कप एशिया का सबसे पुराना तथा विश्व का तीसरा सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट है।
  • इसका आयोजन तीनों सेनाओं की ओर से भारतीय सेना द्वारा किया जाता है।
  • इसका पहला संस्करण 1888 में शिमला में आयोजित किया गया था। बाद में 1940 में यह प्रतियोगिता नई दिल्ली स्थानांतरित कर दी गई।

प्रतियोगिता के विजेताओं को तीन ट्रॉफियाँ प्रदान की जाती हैं

  • डूरंड कप ,
  • शिमला ट्रॉफी, तथा
  • राष्ट्रपति कप, जिसे प्रत्येक वर्ष नए सिरे से तैयार किया जाता है और स्थायी स्मृति-चिह्न के रूप में प्रदान किया जाता है।

स्रोत: PIB

 

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