दिल्ली सरकार द्वारा वायु प्रदूषण शमन हेतु 7-वर्षीय कार्ययोजना तैयार 

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

संदर्भ

  • दिल्ली सरकार ने ₹8,300 करोड़ की अनुमानित लागत से सात-वर्षीय वायु प्रदूषण शमन कार्ययोजना तैयार की है।

परिचय

  • उद्देश्य: राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता प्रबंधन को सुदृढ़ करना तथा वाहनों, सड़क की धूल, निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट जैसे प्रमुख प्रदूषण स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना।
  • ‘स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली’ शीर्षक वाली इस परियोजना को सितंबर 2026 से अगस्त 2033 के बीच विश्व बैंक के सहयोग से लागू करने का प्रस्ताव है।
    • इस परियोजना में विश्व बैंक 65% वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, जबकि शेष 35% व्यय दिल्ली सरकार वहन करेगी।
  • प्रमुख क्षेत्र: परिवहन
    • सड़क की धूल 
    • निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट
    • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
    • उद्योग 
    • हरित क्षेत्र 
    • जल प्रदूषण

प्रमुख हस्तक्षेप

  • वायु गुणवत्ता प्रबंधन का सुदृढ़ीकरण: मिशन मोड में प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने हेतु समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU) की स्थापना।
    • उन्नत वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली, डेटा विश्लेषण तथा एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र (ICCC) आधारित निगरानी तंत्र का विकास।
    • विभागों के मध्य समन्वय को सुदृढ़ करना तथा इंडो-गंगा मैदान (IGP) के राज्यों के साथ एयरशेड आधारित प्रदूषण प्रबंधन हेतु सहयोग को बढ़ावा देना।
  • प्रमुख प्रदूषण स्रोतों से उत्सर्जन में कमी
    • स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहन:
      • प्रदूषणकारी वाहनों को चरणबद्ध रूप से हटाने की प्रक्रिया में तीव्रता लाना।
      • इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को प्रोत्साहित करना।
      • सार्वजनिक परिवहन के एकीकरण को बेहतर बनाना।
      • उन्नत प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (PUC) प्रणाली स्थापित करना।
    • सड़क की धूल पर नियंत्रण:
      • सड़कों का पुनर्विकास।
      • सड़कों का पूर्ण पक्का निर्माण ।
      • यांत्रिक सफाई ।
      • नवीन धूल-दमन तकनीकों का उपयोग।
    • निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट प्रबंधन:
      • C&D अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ करना।
      • रीसाइक्ल्ड एग्रीगेट मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम (RAMS) के उपयोग को प्रोत्साहन देना।
  • महत्त्व : यह परियोजना वायु गुणवत्ता में सुधार लाने तथा परिवहन, उद्योग, अपशिष्ट एवं धूल से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में सहायक होगी।
    • इससे शासन व्यवस्था एवं निगरानी तंत्र अधिक सुदृढ़ होंगे।
    • परियोजना हरित आवरण में वृद्धि, निजी निवेश को आकर्षित करने, रोजगार के अवसर सृजित करने तथा वायु गुणवत्ता प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने में सहायक होगी।

भारत में वायु प्रदूषण (विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट, 2025)

  • विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट, 2025 के अनुसार भारत विश्व के छठे सर्वाधिक प्रदूषित देशों में रहा।
    • देश में PM2.5 की औसत वार्षिक सांद्रता 48.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (µg/m³) दर्ज की गई।
  • यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित 5 µg/m³ की सुरक्षित सीमा से लगभग दस गुना अधिक है।
  • विश्व के 25 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से सभी पाकिस्तान, भारत अथवा चीन में स्थित थे।
  • गाज़ियाबाद (उत्तर प्रदेश) का लोनी वर्ष 2025 में 112.5 µg/m³ की औसत PM2.5 सांद्रता के साथ विश्व का सर्वाधिक प्रदूषित शहर रहा।
  • इसके बाद मेघालय का बर्नीहाट वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर तथा दिल्ली चौथे स्थान पर रही।

भारत में वायु प्रदूषण नियंत्रण हेतु सरकारी पहलें

  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP): वर्ष 2019 में प्रारंभ किया गया NCAP देश के चिन्हित शहरों एवं क्षेत्रों में वायु प्रदूषण कम करने हेतु एक व्यापक पहल है।
    • इसका उद्देश्य वायु गुणवत्ता निगरानी में सुधार, सख्त उत्सर्जन मानकों का अनुपालन तथा जन-जागरूकता को प्रोत्साहन देना है।
  • भारत स्टेज-VI (BS-VI) उत्सर्जन मानक: वर्ष 2020 में पूरे देश में BS-VI उत्सर्जन मानक लागू किए गए।
    • इनका उद्देश्य स्वच्छ ईंधन तथा उन्नत उत्सर्जन नियंत्रण प्रौद्योगिकियों के माध्यम से वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है।
  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY): इस योजना का उद्देश्य तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) को पारंपरिक बायोमास ईंधन के विकल्प के रूप में बढ़ावा देकर परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराना है।
  • FAME(हाइब्रिड एवं इलेक्ट्रिक वाहनों को शीघ्र अपनाने तथा उनके विनिर्माण को प्रोत्साहित करने की योजना ) योजना: यह योजना हाइब्रिड एवं इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित कर वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने का प्रयास करती है।
    • इसके अंतर्गत निर्माताओं एवं उपभोक्ताओं दोनों को प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।
  • ग्रीन इनिशिएटिव्स फॉर सस्टेनेबल हैबिटेट (GRIHA): GRIHA भवनों के निर्माण एवं संचालन में पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत् प्रथाओं को बढ़ावा देने की पहल है।
    • यह ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियों एवं निर्माण सामग्री के उपयोग को प्रोत्साहित करता है।
  • अपशिष्ट प्रबंधन कार्यक्रम : उचित अपशिष्ट प्रबंधन अपशिष्ट जलाने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है।
    • स्वच्छ भारत अभियान सहित विभिन्न अपशिष्ट प्रबंधन कार्यक्रम ठोस अपशिष्ट की समस्या के समाधान तथा स्वच्छ निपटान पद्धतियों को बढ़ावा देते हैं।
  • वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोगCAQM): राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) एवं उससे सटे क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता संबंधी समस्याओं के बेहतर समन्वय, अनुसंधान, पहचान एवं समाधान हेतु वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की स्थापना की गई है।
  • वनीकरण कार्यक्रम : ग्रीन इंडिया मिशन जैसी पहलें वन एवं वृक्षावरण बढ़ाने का प्रयास करती हैं, जिससे प्रदूषकों का अवशोषण होता है तथा वायु गुणवत्ता में सुधार होता है।

निष्कर्ष

  • ‘स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली’ पहल एक समग्र एवं दीर्घकालिक रणनीति है, जिसका उद्देश्य एकीकृत शासन व्यवस्था, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों तथा वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली के माध्यम से दिल्ली की दीर्घकालिक वायु प्रदूषण समस्या का समाधान करना है।
  • यदि इस परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है, तो यह राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के उद्देश्यों की प्राप्ति में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकती है तथा एयरशेड-आधारित शहरी वायु गुणवत्ता प्रबंधन के क्षेत्र में पूरे भारत के लिए एक आदर्श मॉडल (Model) के रूप में स्थापित हो सकती है।

स्रोत: TH

 

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