लोकओएस (LokOS)
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- हाल ही में सेल्फ-हेल्प एंटरप्रेन्योर-लाइवलीहुड्स एंड एंटरप्राइज एप्लीकेशन फॉर प्रॉस्पेरिटी एंड सस्टेनेबिलिटी (SHE-LEAPS) का शुभारंभ किया गया, जिसे लोकओएस (LokOS) प्लेटफ़ॉर्म के अंतर्गत लागू किया जा रहा है।
परिचय
- यह डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC) द्वारा विकसित एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं को सशक्त बनाना है।
- यह उद्यम स्थापना, प्रदर्शन निगरानी तथा व्यवसाय प्रबंधन के लिए एकीकृत मंच प्रदान करता है।
- यह कृषि एवं गैर-कृषि उद्यमों को समर्थन देकर सतत एवं लचीली ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाता है।
लोकओएस (LokOS) प्लेटफ़ॉर्म के बारे में
- लोकओएस (LokOS) में Lok का अर्थ लोग तथा OS का अर्थ ऑपरेटिंग सिस्टम है।
- यह दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत विकसित एक वेब एवं मोबाइल आधारित प्लेटफ़ॉर्म है।
- इसे ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) के तत्वावधान में डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC) द्वारा विकसित किया गया तथा वर्ष 2022 में लॉन्च किया गया।
- यह स्वयं सहायता समूहों (SHGs) एवं सामुदायिक आधारित संगठनों (CBOs) के प्रबंधन में सहायता करता है।
- इसके माध्यम से सदस्य अभिलेख, प्रोफ़ाइल, बचत, ऋण, पुनर्भुगतान, वित्तीय लेन-देन, आजीविका गतिविधियों तथा अभिसरण पहलों का डिजिटलीकरण किया जाता है।

स्रोत: PIB
असम द्वारा भारत की प्रथम व्यावसायिक रूप से उत्पादित माचा चाय (Matcha Tea) का उत्पादन प्रारंभ
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- असम भारत का प्रथम राज्य बन गया है जिसने माचा चाय का व्यावसायिक उत्पादन प्रारंभ किया है। इसका उत्पादन पूर्वी असम के तिनसुकिया जिले स्थित छोटा तिंगराई चाय बागान में शुरू हुआ है।
माचा
- माचा चाय कैमेलिया साइनेंसिस पौधे की पत्तियों से तैयार की जाती है।
- कटाई से लगभग तीन से चार सप्ताह पूर्व चाय की पत्तियों को छाया में रखा जाता है।
- पत्तियों पर पड़ने वाले लगभग 90% सूर्य प्रकाश को अवरुद्ध करने से उनमें क्लोरोफिल एवं अमीनो अम्लों की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे माचा को उसका विशिष्ट चमकीला हरा रंग तथा समृद्ध उमामी (Umami) स्वाद प्राप्त होता है।
- माचा का विकास पूर्व-आधुनिक काल में चीन एवं जापान के मध्य हुए सांस्कृतिक आदान-प्रदान के परिणामस्वरूप हुआ।
- इसका विकास चीन की पाउडर चाय परंपरा से हुआ, जिसे बाद में ज़ेन बौद्ध भिक्षुओं द्वारा जापान ले जाया गया।
- चीन वर्तमान में माचा चाय का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (UK), जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया तथा मध्य-पूर्व के देश माचा चाय के प्रमुख निर्यात बाज़ार हैं।
स्रोत: TH
मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति रेल (MAHSR)
पाठ्यक्रम: GS3/अवसंरचना
संदर्भ
- भारत अपनी प्रथम बुलेट ट्रेन परियोजना, मुंबई-अहमदाबाद उच्च गति रेल (MAHSR) कॉरिडोर के निर्माण को लगभग पूर्ण करने के निकट है।
परिचय
- यह कॉरिडोर मुंबई और अहमदाबाद को लगभग 1 घंटा 58 मिनट में जोड़ देगा। इसकी कुल लंबाई लगभग 508 किलोमीटर होगी।
- इस मार्ग पर 12 स्टेशनों का निर्माण प्रस्तावित है।
- इसके अगस्त 2027 में प्रारंभ होने की संभावना है।
- इसका प्रथम परिचालन खंड सूरत से वापी के मध्य शुरू किया जाएगा।
- इस कॉरिडोर की डिज़ाइन गति 350 किमी/घंटा तथा परिचालन गति 320 किमी/घंटा होगी।
- इस परियोजना का विकास जापान की शिंकान्सेन प्रौद्योगिकी एवं परिचालन प्रणाली के आधार पर किया जा रहा है।
- ट्रैक प्रणाली : भारत में प्रथम बार जे-स्लैब बैलेस्टलेस ट्रैक प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है।
- ट्रैक निर्माण आधार: रेल पटरियों, ट्रैक स्लैब, मशीनरी तथा अन्य उपकरणों के भंडारण एवं प्रबंधन के लिए समर्पित ट्रैक निर्माण आधार विकसित किए जा रहे हैं।
सात उच्च गति रेल कॉरिडोर
- भविष्य के विकास हेतु लगभग 4,000 किलोमीटर लंबाई वाले सात उच्च गति रेल कॉरिडोरों की पहचान की गई है।

स्रोत: PIB
पॉलीग्राफ परीक्षण
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- हाल ही में एक हाई-प्रोफाइल हत्या मामले में पुणे पुलिस द्वारा पॉलीग्राफ परीक्षण कराने के अनुरोध ने आपराधिक जाँच में लाई डिटेक्टर परीक्षण के उपयोग को लेकर परिचर्चा को पुनः चर्चा में ला दिया है।
पॉलीग्राफ परीक्षण क्या है?
- पॉलीग्राफ परीक्षण , जिसे लाई डिटेक्टर परीक्षण भी कहा जाता है, इस धारणा पर आधारित है कि झूठ बोलने पर व्यक्ति के शरीर में कुछ विशिष्ट शारीरिक प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न होती हैं।
- इस परीक्षण में संदिग्ध व्यक्ति के शरीर पर कार्डियो-कफ अथवा संवेदनशील इलेक्ट्रोड जैसे उपकरण लगाए जाते हैं।
- इन उपकरणों के माध्यम से रक्तचाप , गैल्वेनिक स्किन रिस्पॉन्स अर्थात् पसीने की प्रतिक्रिया, श्वसन दर तथा नाड़ी गति जैसे शारीरिक संकेतकों को मापा जाता है।
- पूछताछ के दौरान प्रत्येक शारीरिक प्रतिक्रिया को संख्यात्मक मान प्रदान किया जाता है, जिसके आधार पर यह आकलन किया जाता है कि संबंधित व्यक्ति सत्य बोल रहा है अथवा भ्रामक जानकारी दे रहा है।
भारत में पॉलीग्राफ परीक्षण की वैधानिक स्थिति
- भारत में पॉलीग्राफ परीक्षण का उपयोग केवल अन्वेषण के उद्देश्य से किया जाता है।
- इसके परिणामों को स्वतः न्यायालय में साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
- किन्तु यदि इस परीक्षण के आधार पर पुलिस को कोई नया साक्ष्य प्राप्त होता है, तो वह भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के अंतर्गत न्यायालय में ग्राह्य हो सकता है।
- पॉलीग्राफ परीक्षण केवल संबंधित व्यक्ति की स्वैच्छिक सहमति से ही किया जा सकता है।
- सेल्वी बनाम कर्नाटक राज्य में उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि पॉलीग्राफ, नार्को-विश्लेषण तथा ब्रेन-मैपिंग परीक्षणों का अनैच्छिक संचालन संविधान के अनुच्छेद 20(3) (स्वयं के विरुद्ध साक्ष्य देने से संरक्षण) तथा अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार) का उल्लंघन है।

नार्को-विश्लेषण
- इस परीक्षण में अभियुक्त को सोडियम पेंटोथल नामक औषधि का इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे वह सम्मोहित अथवा अर्द्धचेतन अवस्था में पहुँच जाता है।
- यह माना जाता है कि ऐसी अवस्था में व्यक्ति के मानसिक अवरोध कम हो जाते हैं तथा उसके द्वारा जानकारी प्रकट करने की संभावना बढ़ जाती है।
- चूँकि यह औषधि व्यक्ति की झूठ बोलने की क्षमता अथवा इच्छा को कमजोर करने वाली मानी जाती है, इसलिए इसे प्रायः “सत्य सीरम (Truth Serum)” कहा जाता है।
स्रोत: IE
रेडियो टेलीमेट्री
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- हाल ही में रेडियो-टैग लगे सफेद पीठ वाले गिद्ध की मृत्यु ने वन्यजीवों की निगरानी तथा संरक्षण संबंधी खतरों की पहचान में रेडियो टेलीमेट्री के महत्त्व को उजागर किया है।
रेडियो टेलीमेट्री क्या है?
- रेडियो टेलीमेट्री एक ऐसी तकनीक है, जिसका उपयोग वन्यजीवों का पता लगाने तथा उनकी गतिविधियों एवं आवागमन का अनुगमन करने के लिए किया जाता है।
- इसमें रेडियो संकेतों के माध्यम से किसी जीव की स्थिति का निर्धारण किया जाता है।
- रेडियो टेलीमेट्री प्रणाली के प्रमुख घटक: एक रेडियो टेलीमेट्री प्रणाली मुख्यतः तीन भागों से मिलकर बनी होती है—
- रेडियो ट्रांसमीटर
- रेडियो एंटीना
- रेडियो रिसीवर
- कार्यप्रणाली:
- रेडियो ट्रांसमीटर को संबंधित पशु के शरीर पर लगाया जाता है, जो लगातार रेडियो संकेत प्रसारित करता है।
- रेडियो एंटीना इन संकेतों को ग्रहण करता है।
- इसके पश्चात रेडियो रिसीवर इन संकेतों को बीप जैसी ध्वनि में परिवर्तित कर देता है।
- जैसे-जैसे रिसीवर ट्रांसमीटर के निकट पहुँचता है, बीप की ध्वनि अधिक तीव्र होती जाती है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ट्रांसमीटर युक्त पशु निकट है।
- शोधकर्ता इसी ध्वनि के आधार पर उस पशु का पता लगाते हैं तथा उसकी गतिविधियों का अनुगमन करते हैं।
स्रोत: TH
7वाँ राष्ट्रीय जल पुरस्कार
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
- जल शक्ति मंत्रालय ने गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर 7वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार की शुरुआत की है।
परिचय
- राष्ट्रीय जल पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2018 में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा की गई थी तथा प्रथम पुरस्कार वर्ष 2019 में प्रदान किए गए।
- पुरस्कार हेतु पात्रता: जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्य, जिला, शहरी स्थानीय निकाय (ULB), बाँध स्वामी एजेंसियाँ तथा उद्योग इस पुरस्कार के लिए पात्र हैं।
- इन पुरस्कारों का उद्देश्य ‘जल समृद्ध भारत’ के सरकार के दृष्टिकोण को साकार करने में राज्यों, जिलों, व्यक्तियों एवं संगठनों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों एवं प्रयासों को मान्यता देना तथा प्रोत्साहित करना है।
- यह पुरस्कार जल के महत्त्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा जल के सर्वोत्तम एवं सतत उपयोग की पद्धतियों को अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित करने का भी लक्ष्य रखता है।
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