संक्षिप्त समाचार 03-07-2026

शिमला समझौता

पाठ्यक्रम: GS-2 / अंतरराष्ट्रीय संबंध

संदर्भ 

  • 2 जुलाई, 2026 को शिमला समझौते के 54 वर्ष पूर्ण हुए।

परिचय

  • शिमला समझौता वर्ष 1972 में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के पश्चात् दोनों देशों के मध्य स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से संपन्न हुआ था।
  • इस समझौते पर भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तथा पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति ज़ुल्फिकार अली भुट्टो ने हस्ताक्षर किए थे।

शिमला समझौते के प्रमुख प्रावधान

  • शांतिपूर्ण समाधान: दोनों देशों ने अपने सभी विवादों का समाधान किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के बिना द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से करने पर सहमति व्यक्त की।
  • नियंत्रण रेखा (LoC): जम्मू-कश्मीर में युद्धविराम रेखा  को नियंत्रण रेखा (LoC) के रूप में पुनर्परिभाषित किया गया तथा दोनों पक्षों ने इसे एकतरफा रूप से परिवर्तित न करने का संकल्प लिया।
  • युद्धबंदियों की रिहाई: भारत ने पाकिस्तान के युद्धबंदियों को रिहा करने पर सहमति दी, जबकि पाकिस्तान ने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने तथा बांग्लादेश की संप्रभुता को मान्यता देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

स्रोत: IE, IT

मानस पहल

पाठ्यक्रम: GS-2 / सरकारी पहल

संदर्भ

  • राष्ट्रीय मादक पदार्थ हेल्पलाइन ‘मानस (MANAS)’ मादक पदार्थों के दुरुपयोग से संबंधित गतिविधियों की सूचना देने तथा पुनर्वास सेवाओं तक पहुँच उपलब्ध कराने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित मंच प्रदान कर भारत के नशा-उन्मूलन अभियान को सुदृढ़ बना रही है।

परिचय 

  • मानस (MANAS – मादक पदार्थ निषेध आसूचना केंद्र) का शुभारंभ वर्ष 2024 में गृह मंत्रालय के अधीन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC) के सहयोग से किया गया।
  • सुरक्षित एवं प्रौद्योगिकी-संचालित मंच के रूप में विकसित MANAS नागरिकों को—
    • मादक पदार्थों से संबंधित गतिविधियों की सूचना देने,
    • परामर्श प्राप्त करने,
    • तथा पुनर्वास सहायता प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करता है।
  • यह मंच राष्ट्रीय हेल्पलाइन संख्या 1933, आधिकारिक पोर्टल, ई-मेल तथा उमंग ऐप के माध्यम से उपलब्ध है।
  • MANAS, डिजिटल इंडिया की परिकल्पना तथा नशा मुक्त भारत के मिशन को एकीकृत करता है।

मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव के विरुद्ध भारत का अभियान

  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 47 के अनुसार राज्य का कर्तव्य है कि औषधीय प्रयोजनों को छोड़कर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक पेय एवं नशीले पदार्थों के सेवन को हतोत्साहित करे।
  • वैश्विक प्रतिबद्धता: भारत निम्नलिखित अंतरराष्ट्रीय अभिसमयों का पक्षकार है—
    • 1961 का मादक औषधियों पर एकल अभिसमय।
    • 1971 का मनःप्रभावी पदार्थ अभिसमय ।
    • 1988 का अवैध मादक पदार्थ तस्करी के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र अभिसमय।
  • विधिक ढाँचा : औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940
    • नारकोटिक ड्रग्स एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act), 1985
    • अवैध मादक पदार्थ तस्करी निवारण अधिनियम (PITNDPS Act), 1988
  • प्रमुख पहल : मादक पदार्थों से संबंधित मामलों की निगरानी हेतु निदान (NIDAAN) पोर्टल
    • जागरूकता, रोकथाम एवं पुनर्वास के लिए नशा मुक्त भारत अभियान

स्रोत: PIB

चाल विश्लेषण (Gait Analysis)

पाठ्यक्रम: GS-3 / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ 

  • हाल ही में पुणे में हुए एक हत्या के मामले में जाँच एजेंसियाँ फॉरेंसिक चाल विश्लेषण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सहायता से सीसीटीवी फुटेज की तुलना कर जाँच में सहयोग प्राप्त कर रही हैं।

चाल विश्लेषण क्या है?

  • चाल विश्लेषण मानव के चलने अथवा दौड़ने की प्रक्रिया का वैज्ञानिक अध्ययन है।
  • चलना अथवा दौड़ना एक जटिल शारीरिक गतिविधि है, जिसमें मांसपेशियाँ, अस्थियाँ तथा तंत्रिका तंत्र निरंतर समन्वित रूप से कार्य करते हैं।
  • चाल विश्लेषण इन गतिविधियों का सूक्ष्म अध्ययन कर यह समझने का प्रयास करता है कि कोई विशिष्ट व्यक्ति किस प्रकार चलता है।

चाल चक्र क्या है?

  • चाल चक्र (Gait Cycle) उस क्रमिक प्रक्रिया को कहते हैं, जो एक पैर के भूमि को स्पर्श करने से प्रारंभ होकर उसी पैर के पुनः भूमि को स्पर्श करने तक चलती है।
  • इसे मुख्यतः दो चरणों में विभाजित किया जाता है—
    • स्थापन चरण: इस चरण में पैर भूमि के संपर्क में रहता है तथा यह चरण तब समाप्त होता है जब पैर की उँगलियाँ भूमि से ऊपर उठती हैं।
      • इस दौरान शरीर भूमि से उत्पन्न आघात को अवशोषित करते हुए पूरे शरीर के भार को वहन करता है।
    • स्विंग चरण: इस चरण में पैर भूमि से ऊपर रहता है तथा आगमी कदम के लिए आगे बढ़ता है।
      • इस अवधि में शरीर यह सुनिश्चित करता है कि पैर की उँगलियाँ भूमि से न घिसें तथा पैर अगली बार भूमि पर उचित स्थिति में पड़े।

चाल विश्लेषण के अनुप्रयोग

  • नैदानिक अध्ययन: चाल विश्लेषण के माध्यम से यह समझा जा सकता है कि किसी व्यक्ति को दर्द क्यों हो रहा है अथवा किसी विशेष चिकित्सीय स्थिति की प्रगति किस प्रकार हो रही है।
    • खिलाड़ी अपनी दौड़ने की क्षमता एवं प्रदर्शन में सुधार हेतु इसका उपयोग करते हैं।
  • फॉरेंसिक उपयोग : फॉरेंसिक चाल विश्लेषण का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि किसी व्यक्ति की चाल, जो प्रत्यक्ष रूप से अथवा सीसीटीवी फुटेज में दर्ज है, किसी ज्ञात व्यक्ति की चाल से सामंजस्यशील है या नहीं।
  • रोगों की पहचान एवं उपचार : इसका उपयोग किसी व्यक्ति की गतिशीलता में असामान्यताओं की पहचान करने के लिए किया जाता है।
    • चिकित्सक इसका उपयोग सेरेब्रल पाल्सी , पार्किंसन रोग तथा स्ट्रोक के बाद पुनर्वास के दौरान रोगियों के लक्षणों के प्रबंधन में करते हैं।

स्रोत: TH

मेकॉन लिमिटेड को मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा प्राप्त

पाठ्यक्रम: GS-3 / अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • इस्पात मंत्रालय ने मेकॉन लिमिटेड को मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा प्रदान करने को स्वीकृति दे दी है।

मेकॉन लिमिटेड के बारे में

  • मेकॉन लिमिटेड की स्थापना वर्ष 1959 में हुई थी तथा इसका मुख्यालय राँची (झारखंड) में स्थित है।
  • यह भारत के प्रमुख अभियांत्रिकी , परामर्श , परियोजना प्रबंधन एवं अनुबंध निष्पादन संगठनों में से एक है।
  • यह इस्पात मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन अनुसूची ‘ए’ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (CPSE) है।

मिनीरत्न का दर्जा क्या है?

  • मिनीरत्न का दर्जा लोक उद्यम विभाग (DPE) द्वारा पात्र एवं लाभ अर्जित करने वाले केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSEs) को प्रदान किया जाता है।
  • इसकी शुरुआत अक्टूबर, 1997 में की गई थी।
  • इसका उद्देश्य दक्ष एवं लाभकारी सार्वजनिक उपक्रमों को अधिक वित्तीय एवं परिचालनिक स्वायत्तता प्रदान करना है।
  • वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर इसे दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है—
    • मिनीरत्न श्रेणी-I 
    • मिनीरत्न श्रेणी-II

मिनीरत्न दर्जा प्राप्त करने की पात्रता

  • मिनीरत्न श्रेणी-I: उपक्रम ने निरंतर विगत तीन वर्षों में लाभ अर्जित किया हो।
    • इन तीन वर्षों में से कम-से-कम एक वर्ष में कर-पूर्व लाभ 30 करोड़ रुपये या उससे अधिक रहा हो।
    • उपक्रम की सकारात्मक निवल संपत्ति हो।
  • मिनीरत्न श्रेणी-II: उपक्रम ने निरंतर विगत तीन वर्षों में लाभ अर्जित किया हो।
  • उपक्रम की सकारात्मक निवल संपत्ति हो।

स्रोत: PIB

आरबीआई की उच्च स्तरीय गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ 

पाठ्यक्रम: GS-3 / अर्थव्यवस्था

समाचार में 

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी रूप से अपनी एनबीएफसी (NBFC) मास्टर दिशानिर्देशों में “सार्वजनिक निधियों की अप्रत्यक्ष प्राप्ति” की परिभाषा को पुनः लागू कर दिया है।

क्या आप जानते हैं? 

  • अप्रैल 2026 में जारी एक परिपत्र के माध्यम से आरबीआई ने “सार्वजनिक निधियों की अप्रत्यक्ष प्राप्ति” को इस प्रकार परिभाषित किया था—  “ऐसी निधियाँ जो प्रत्यक्ष रूप से नहीं, बल्कि उन सहयोगी एवं समूह संस्थाओं के माध्यम से प्राप्त होती हैं, जिन्हें सार्वजनिक निधियों तक पहुँच प्राप्त है।”

  • आरबीआई ने उच्च स्तरीय एनबीएफसी (NBFC-UL) के निर्धारण की पूर्व पद्धति को समाप्त करते हुए एक सरल मानदंड अपनाया है, जिसके अनुसार—
    • ₹1 लाख करोड़ या उससे अधिक परिसंपत्तियों वाली एनबीएफसी को NBFC-UL के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।
  • आरबीआई के नियमों के अनुसार—
    • अधिसूचित किए जाने के तीन वर्षों के अंदर NBFC-UL को किसी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध (List) होना होगा।
    • साथ ही उसे अधिक कठोर कॉर्पोरेट प्रशासन एवं प्रकटीकरण संबंधी मानकों का पालन करना होगा।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी

  • गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) वह कंपनी है जिसका गठन कंपनी अधिनियम, 1956 अथवा 2013 के अंतर्गत हुआ हो तथा जिसका प्रमुख व्यवसाय निम्नलिखित वित्तीय गतिविधियाँ हों—
    • ऋण एवं अग्रिम प्रदान करना,
    • शेयर, स्टॉक, बॉण्ड, डिबेंचर एवं प्रतिभूतियों का अधिग्रहण,
    • सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकरण द्वारा जारी प्रतिभूतियों में निवेश,
    • पट्टे ,
    • किराया-क्रय आदि।
  • निम्नलिखित प्रमुख व्यवसाय करने वाली कंपनियाँ NBFC की श्रेणी में सम्मिलित नहीं होतीं—
    • कृषि,
    • औद्योगिक गतिविधियाँ,
    • वस्तुओं का व्यापार (प्रतिभूतियों को छोड़कर),
    • सामान्य सेवाएँ,
    • अचल संपत्ति का क्रय-विक्रय अथवा निर्माण।

भारतीय रिज़र्व बैंक में पंजीकरण की आवश्यकताएँ

  • कंपनी का गठन कंपनी अधिनियम, 1956 अथवा 2013 के अंतर्गत होना चाहिए।
  • उसे आरबीआई द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा।
  • कंपनी के पास न्यूनतम ₹10 करोड़ की स्वामित्व निधि होनी चाहिए।
    • नोट: विशेष श्रेणी की NBFCs के लिए उनकी प्रकृति के अनुसार अलग-अलग न्यूनतम पूंजी आवश्यकताएँ निर्धारित हैं।
  • कंपनी को आरबीआई के प्रवाह पोर्टल पर पंजीकरण कर आवश्यक दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे।

बैंकों एवं NBFCs के मध्य प्रमुख अंतर

  • NBFCs मांग जमा स्वीकार नहीं कर सकतीं।
  • NBFCs भुगतान एवं निपटान प्रणाली का हिस्सा नहीं होतीं तथा स्वयं के नाम से चेक जारी नहीं कर सकतीं।
  • जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम (DICGC) द्वारा प्रदान की जाने वाली जमा बीमा सुविधा, जमा स्वीकार करने वाली NBFCs के जमाकर्ताओं को उपलब्ध नहीं होती।

स्रोत: IE

हसदेव-अरण्य वन

पाठ्यक्रम: GS-3 / पर्यावरण

संदर्भ

  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य वनों में स्थित केंते एक्सटेंशन एकीकृत कोयला ब्लॉक में खनन हेतु पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान कर दी है।

हसदेव-अरण्य वन 

  • हसदेव-अरण्य वन छत्तीसगढ़ के कोरबा, सरगुजा एवं सूरजपुर जिलों में लगभग 1.7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं।
  • इन्हें मध्य भारत के हरित फेफड़े के रूप में जाना जाता है।
  • यहाँ लगभग—
    • 640 पादप प्रजातियाँ तथा
    • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-I में सूचीबद्ध 9 वन्यजीव प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिन्हें सर्वोच्च स्तर का विधिक संरक्षण प्राप्त है।
  • यह क्षेत्र महानदी की सबसे बड़ी सहायक नदी हसदेव नदी का जलग्रहण क्षेत्र भी है।

भारत में कोयले का भौगोलिक वितरण 

  • गोंडवाना कोयला: भारत के कुल कोयला भंडार का लगभग 98% भाग गोंडवाना काल से संबंधित है।
    • यह मुख्यतः निम्नलिखित राज्यों में पाया जाता है—
      • छत्तीसगढ़
      • झारखंड
      • ओडिशा
      • मध्य प्रदेश
      • आंध्र प्रदेश आदि।
  • गोंडवाना कोयला खनन के प्रमुख क्षेत्र::
    • दामोदर घाटी: डालटनगंज
      • बोकारो
      • झरिया
      • धनबाद
      • रानीगंज
      • दुर्गापुर
    • सोन घाटी: उत्तर कोयल नदी (North Koel River) से संबद्ध
      • सिंगरौली
    • महानदी घाटी: हसदेव
      • ईब (Ib)
      • दक्षिण कोयल नदी क्षेत्र
      • कोरबा
      • झिलमिली
      • तालचेर
    • गोदावरी एवं वर्धा घाटी : सिंगरेनी
      • कोठागुडेम (तेलंगाना)
      • कामठी घाटी (नागपुर, महाराष्ट्र)

स्रोत: IE

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) 2026

पाठ्यक्रम: विविध 

समाचार में

  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) 2026 हेतु नामांकन आमंत्रित किए हैं।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP)

  • प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है, जो देश के बच्चों के असाधारण साहस, धैर्य, सृजनात्मकता, दृढ़ संकल्प तथा अदम्य आत्मबल का सम्मान करने के लिए प्रदान किया जाता है।
    • इसकी शुरुआत वर्ष 2019 में की गई थी।
  • यह पुरस्कार प्रतिवर्ष 26 दिसंबर को मनाए जाने वाले वीर बाल दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित विशेष समारोह में भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है।
  • यह पुरस्कार निम्नलिखित छह श्रेणियों में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जाता है—
    • वीरता 
    • समाज सेवा 
    • पर्यावरण 
    • खेल 
    • कला एवं संस्कृति 
    • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी 
  • यह पुरस्कार 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की असाधारण उपलब्धियों को मान्यता प्रदान करता है।
  • किसी भी पात्र बालक/बालिका का नामांकन कोई भी भारतीय नागरिक, विद्यालय, संस्था अथवा संगठन कर सकता है।
  • बच्चे स्वयं भी स्व-नामांकन के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
  • पुरस्कार के अंतर्गत एक पदक, एक प्रमाण-पत्र तथा एक प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाता है।

  वीर बाल दिवस

  • भारत सरकार प्रतिवर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाती है।
  • यह दिवस दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के सुपुत्र साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह एवं साहिबज़ादा फतेह सिंह के अद्वितीय बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है।
  • शहादत के समय ज़ोरावर सिंह की आयु 9 वर्ष तथा फतेह सिंह की आयु 7 वर्ष थी।
  • 26 दिसंबर, 1704 को उन्होंने धर्म परिवर्तन के लिए दिए गए दबाव को अस्वीकार करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
  • उनकी शहादत साहस, नैतिक दृढ़ता तथा अपने धर्म के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक है।
  • विपरीत परिस्थितियों में प्रदर्शित उनका त्याग एवं वीरता आज भी देश के बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत है।

स्रोत: PIB

 

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