केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण (CLAA) की व्यवस्था का विस्तार

पाठ्यक्रम: GS2/शासन

संदर्भ 

  • केंद्र सरकार ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन करते हुए कोशिका अथवा स्टेम सेल-व्युत्पन्न उत्पादों , जीन चिकित्सीय उत्पादों तथा ज़ेनोग्राफ्ट को केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण (CLAA) के दायरे में सम्मिलित कर लिया है।

परिचय

  • औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के अंतर्गत कुछ विशिष्ट श्रेणियों की महत्त्वपूर्ण औषधियाँ एवं जैविक उत्पाद केंद्र एवं राज्य नियामक प्राधिकरणों की संयुक्त नियामकीय निगरानी के अधीन आते हैं।
    • इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित सम्मिलित हैं—
      • टीके 
      • बड़ी मात्रा में अंतःशिरा द्रव (LVPs) अर्थात् 100 मिलीलीटर से अधिक की अंतःशिरा (IV) द्रवियाँ
      • पुनर्संयोजित डीएनए (rDNA) आधारित औषधियाँ।
    • वर्तमान संशोधन के माध्यम से इस सूची का विस्तार करते हुए उभरती हुई चिकित्सा प्रौद्योगिकियों को भी इसमें सम्मिलित किया गया है।
  • कोशिका अथवा स्टेम सेल-व्युत्पन्न उत्पाद: इनमें स्टेम सेल आधारित पुनर्योजी उपचार तथा सीएआर-टी कोशिका चिकित्सा जैसे उपचार सम्मिलित हैं, जिनका उपयोग रक्त कैंसर सहित विभिन्न रोगों के उपचार में बढ़ रहा है।
  • जीन चिकित्सीय उत्पाद: इनमें जीन प्रतिस्थापन तथा जीन संपादन आधारित उपचार सम्मिलित हैं, जिनका उपयोग आनुवंशिक विकारों एवं विभिन्न प्रकार के कैंसरों के उपचार में किया जा रहा है।
  • ज़ेनोग्राफ्ट : ये पशु ऊतकों से प्राप्त उत्पाद होते हैं, जैसे— हृदय वाल्व , जिन्हें मानव शरीर में प्रत्यारोपित किया जा सकता है।
    • इनका उपयोग मुख्यतः हृदय रोग विज्ञान तथा अस्थि रोग विज्ञान में किया जाता है।
    • चूँकि ये प्रौद्योगिकियाँ चिकित्सा विज्ञान के अत्यधिक जटिल, विशिष्ट एवं तीव्र गति से विकसित हो रहे क्षेत्र हैं, इसलिए रोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु इन पर अधिक कठोर नियामकीय निगरानी आवश्यक है।
  • महत्त्व : इन उत्पादों को CLAA ढाँचे के अंतर्गत शामिल किए जाने से केंद्रीय एवं राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों द्वारा संयुक्त निगरानी सुनिश्चित होगी।
    • इससे पूरे देश में नियामकीय मानकों की एकरूपता स्थापित होगी।

भारत में केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण (CLAA) का ढाँचा

  • केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण (CLAA), औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 के अंतर्गत स्थापित एक नियामकीय व्यवस्था है, जिसके माध्यम से केंद्र सरकार कुछ विशिष्ट एवं महत्त्वपूर्ण श्रेणियों की औषधियों के लाइसेंस प्रदान करने की प्रक्रिया की निगरानी करती है।
  • इस व्यवस्था का संचालन केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन किया जाता है।
  • उद्देश्य:
  • महत्त्वपूर्ण औषधियों के निर्माण हेतु राष्ट्रीय स्तर पर एक समान मानकों को सुनिश्चित करना।
  • गुणवत्ता नियंत्रण , सुरक्षा तथा नियामकीय निगरानी को सुदृढ़ करना।
  • विभिन्न राज्यों में लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं में होने वाली असमानताओं को समाप्त करना।
  • CLAA ढाँचा किस प्रकार कार्य करता है?
    • निर्माता लाइसेंस के लिए राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण (SLA) के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करता है।
    • राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण निर्माण इकाई का निरीक्षण करता है तथा सद्भावनापूर्ण विनिर्माण पद्धतियों (GMP) के अनुपालन का परीक्षण करता है।
    • आवेदन संतोषजनक पाए जाने पर राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण अपनी अनुशंसा केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण (CLAA) को भेजता है।
    • इसके पश्चात् CLAA स्वतंत्र रूप से प्रस्ताव का मूल्यांकन कर लाइसेंस को स्वीकृति अथवा अस्वीकृति प्रदान करता है।
  • CLAA ढाँचे के अंतर्गत सम्मिलित औषधियाँ : केंद्र सरकार समय-समय पर उन औषधियों की श्रेणियाँ अधिसूचित करती है, जिनके लिए CLAA की स्वीकृति आवश्यक होती है। इनमें सामान्यतः निम्नलिखित सम्मिलित हैं—
    • रक्त एवं रक्त उत्पाद 
    • टीके
    • अंतःशिरा द्रव / बड़ी मात्रा में अंतःशिरा द्रव 
    • पुनर्संयोजित डीएनए आधारित उत्पाद
    • सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य महत्त्वपूर्ण जैविक उत्पाद 
  • केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की भूमिका: यह केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है।
    • अधिसूचित महत्त्वपूर्ण औषधियों के लिए लाइसेंस स्वीकृत करता है।
    • औषधियों के आयात , नई औषधियों की स्वीकृति तथा नैदानिक परीक्षणों का विनियमन करता है।
    • औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के देशव्यापी समान प्रवर्तन को सुनिश्चित करने हेतु राज्य औषधि नियंत्रण संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करता है।

स्रोत: PIB

 

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