भारत में किराना स्टोर एवं क्विक कॉमर्स

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • भारत में क्विक कॉमर्स (QC) प्लेटफॉर्मों के तीव्र विस्तार ने एक बार पुनः इस परिचर्चा को शुरू कर दिया है कि उभरती डिजिटल खुदरा क्रांति के बीच भारत की पारंपरिक किराना व्यवस्था कितनी सतत सिद्ध होगी।

भारत में किराना स्टोर एवं क्विक कॉमर्स

  • किराना स्टोर: किराना स्टोर छोटे एवं परिवार-आधारित पड़ोस के खुदरा प्रतिष्ठान हैं, जो भारत की खुदरा व्यापार व्यवस्था का आधार माने जाते हैं।
    • भारत में 1.2 करोड़ (12 मिलियन) से अधिक खुदरा दुकानें हैं, जिनमें अधिकांश असंगठित किराना स्टोर हैं।
    • किराना स्टोरों की प्रमुख विशेषताएँ—
      • उपभोक्ताओं के निकट स्थित होना।
      • अनौपचारिक ऋण (उधार) की सुविधा प्रदान करना।
      • ग्राहकों के साथ व्यक्तिगत एवं दीर्घकालिक संबंध।
      • स्थानीय आवश्यकताओं एवं रुचियों के अनुरूप उत्पादों का लचीला भंडारण।
      • कम परिचालन लागत तथा पारिवारिक श्रम पर आधारित संचालन।
  • क्विक कॉमर्स (QC): क्विक कॉमर्स के अंतर्गत 10–30 मिनट के अंदर किराना एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की अत्यंत शीघ्र डिलीवरी की जाती है।
    • यह डिजिटल रूप से एकीकृत प्रणालियों तथा डार्क स्टोर्स के माध्यम से संचालित होता है।
    • क्विक कॉमर्स की प्रमुख विशेषताएँ—
      • डिजिटल माध्यम से ऑर्डर प्राप्त करना।
      • डेटा-आधारित इन्वेंटरी प्रबंधन।
      • आधुनिक लॉजिस्टिक्स एवं आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन।
    • क्विक कॉमर्स के प्रमुख उदाहरण—
      • ब्लिंकिट 
      • ज़ेप्टो 
      • स्विगी इंस्टामार्ट 
      • बिगबास्केट नाउ 
      • फ्लिपकार्ट मिनट्स 
  • अनेक दृष्टियों से क्विक कॉमर्स पारंपरिक किराना स्टोरों द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधा का ही तकनीक, डेटा विश्लेषण तथा बड़े पैमाने पर विकसित रूप है।

संगठित खुदरा व्यापार द्वारा किराना स्टोरों को प्रतिस्थापित न करने के कारण

  • ग्राहकों के साथ बेहतर आत्मीय संबंध: किराना स्टोर दीर्घकालिक सामाजिक संबंधों एवं विश्वास पर आधारित होते हैं।
    • साधारण फोन कॉल पर घर तक वस्तुओं की आपूर्ति।
    • उधार (खाता प्रणाली) की सुविधा।
    • ग्राहकों की आवश्यकता के अनुसार व्यक्तिगत उत्पाद सुझाव।
    • आधुनिक खुदरा प्रारूप इस प्रकार के आत्मीय संबंध स्थापित नहीं कर सके।
  • सुविधा एवं सुगम उपलब्धता: अधिकांश उपभोक्ता अपने निकट स्थित किराना स्टोरों से खरीदारी करना अधिक सुविधाजनक मानते हैं।
    • सुपरमार्केट की तुलना में किराना स्टोरों में यात्रा, लंबी गलियों में उत्पाद खोजने तथा भुगतान के लिए कतार में प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं होती।
  • उपभोक्ताओं की विविधता: भारत में उपभोक्ताओं की आय, रुचियों एवं उपभोग व्यवहार में अत्यधिक विविधता है।
    • बड़े खुदरा प्रतिष्ठानों के लिए स्थानीय स्वाद, छोटे पैक आकार एवं क्षेत्रीय ब्रांडों की मांग को समान रूप से पूरा करना कठिन रहा।
  • महँगी अचल संपत्ति : शहरी क्षेत्रों में अचल संपत्ति की ऊँची कीमतों के कारण संगठित खुदरा व्यापार की परिचालन लागत काफी अधिक हो गई।
    • परिणामस्वरूप “कम कीमत पर खरीदो–कम कीमत पर बेचो” का पैमाने की अर्थव्यवस्था पर आधारित मॉडल कम लाभकारी सिद्ध हुआ।
  • अनौपचारिक स्वरूप एक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ: किराना स्टोर स्थानीय मांग के अनुसार शीघ्र प्रतिक्रिया देते हैं।
    • इनकी परिचालन लागत अपेक्षाकृत कम होती है।
    • व्यवधान अथवा संकट की परिस्थितियों में भी ये अधिक लचीले एवं अनुकूलनशील बने रहते हैं।

किराना स्टोरों के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ

  • प्रमुख व्यावसायिक स्थानों को हानि: अचल संपत्ति की बढ़ती कीमतों के कारण अनेक किराना स्टोरों को समृद्ध आवासीय क्षेत्रों से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित होना पड़ा, जिससे ग्राहकों के लिए उनकी पहुँच कम सुविधाजनक हो गई।
  • सीमित कार्यशील पूंजी : उत्पादों की विविधता एवं स्टॉक रखने वाली इकाइयों में वृद्धि के कारण भंडार बढ़ गया है।
    • छोटे खुदरा विक्रेताओं की औपचारिक वित्तीय संस्थानों तक सीमित पहुँच होने के कारण वे प्रायः अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर निर्भर रहते हैं।
  • प्रौद्योगिकी संबंधी सीमाएँ: क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मांग पूर्वानुमान , डिजिटल भुगतान एवं डेटा विश्लेषण जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करते हैं।
    • अधिकांश किराना स्टोर अभी भी इन आधुनिक तकनीकों से वंचित हैं।
  • पीढ़ीगत संक्रमण की चुनौती: परिवार-आधारित पारंपरिक व्यापार मॉडल नई पीढ़ी की बदलती करियर आकांक्षाओं के कारण चुनौतियों का सामना कर रहा है।
  • प्लेटफॉर्म आधारित प्रतिस्पर्धा: क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म अधिक उत्पाद विविधता, तीव्र डिलीवरी, बेहतर उपभोक्ता अनुभव, आकर्षक छूट तथा लॉयल्टी कार्यक्रम उपलब्ध कराते हैं।
    • परिणामस्वरूप अपेक्षाकृत समृद्ध उपभोक्ता वर्ग धीरे-धीरे पारंपरिक किराना स्टोरों से दूर हो रहा है।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

  • सकारात्मक प्रभाव
    • उपभोक्ता कल्याण : क्विक कॉमर्स उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा प्रदान करता है, समय की बचत करता है तथा उत्पादों के व्यापक विकल्प एवं प्रतिस्पर्धी मूल्य उपलब्ध कराता है।
    •  आपूर्ति श्रृंखला का आधुनिकीकरण: डिजिटल खुदरा व्यापार प्रभावी इन्वेंटरी प्रबंधन, अपव्यय में कमी, व्यापार के औपचारिकीकरण तथा लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के विकास को प्रोत्साहित करता है।
  • नए ब्रांडों के लिए अवसर : प्रत्यक्ष-से-उपभोक्ता (D2C) ब्रांड बिना देशव्यापी वितरण नेटवर्क स्थापित किए समृद्ध उपभोक्ता वर्ग तक पहुँच सकते हैं।
  • रोजगार सृजन : क्विक कॉमर्स ने भंडारण, लॉजिस्टिक्स, डिलीवरी सेवाओं तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नए रोजगार अवसर उत्पन्न किए हैं।
  • चिंताएँ 
    • छोटे खुदरा विक्रेताओं पर प्रभाव: क्विक कॉमर्स के व्यापक प्रसार से पारंपरिक खुदरा व्यापार पर निर्भर लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
    • बाजार का संकेंद्रण: कुछ चुनिंदा डिजिटल प्लेटफॉर्मों के प्रभुत्व से एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों के उभरने की आशंका है।
    • असुरक्षित गिग रोजगार: डिलीवरी कर्मियों को प्रायः आय की अनिश्चितता, सामाजिक सुरक्षा के अभाव तथा व्यावसायिक जोखिमों का सामना करना पड़ता है।
    • शहरी भीड़भाड़ एवं सततता संबंधी चुनौतियाँ: अत्यंत शीघ्र डिलीवरी मॉडल के कारण यातायात दबाव तथा पैकेजिंग अपशिष्ट में वृद्धि होती है।

सरकारी पहल एवं संबंधित नीतिगत उपाय

  • डिजिटल वाणिज्य हेतु ओपन नेटवर्क: इसका उद्देश्य डिजिटल वाणिज्य का लोकतंत्रीकरण करना तथा किराना स्टोरों सहित छोटे खुदरा विक्रेताओं को ई-कॉमर्स पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ना है।
  • पीएम स्वनिधि योजना: यह योजना छोटे विक्रेताओं एवं सूक्ष्म खुदरा व्यापारियों को बिना जमानत कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराकर उनकी तरलता को सुदृढ़ करती है।
  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम: यह कार्यक्रम छोटे व्यवसायों में डिजिटल भुगतान, इंटरनेट की उपलब्धता तथा प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करता है।
  • उद्यम पंजीकरण एवं एमएसएमई सहायता: सूक्ष्म उद्यम के रूप में पंजीकरण कर किराना स्टोर औपचारिक ऋण एवं सरकारी सहायता का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
  • उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020: इन नियमों का उद्देश्य डिजिटल वाणिज्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है।
  • राष्ट्रीय खुदरा व्यापार नीति (प्रारूप) : प्रस्तावित नीति का उद्देश्य खुदरा व्यापार की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना तथा छोटे खुदरा व्यापारियों के आधुनिकीकरण को प्रोत्साहित करना है।

निष्कर्ष 

  • भारत का खुदरा व्यापार परिदृश्य किराना स्टोरों के समाप्त होने का नहीं, बल्कि उनके रूपांतरण का साक्षी बन रहा है।
  • भारत के विकास अनुभव से स्पष्ट है कि उपभोक्ता ऐसे नवाचारों को सहजता से अपनाते हैं, जो बिना उनके व्यवहार में बड़ा परिवर्तन किए अधिक सुविधा एवं मूल्य प्रदान करते हैं।
  • भारत की विशाल भौगोलिक एवं सामाजिक-आर्थिक विविधता को देखते हुए क्विक कॉमर्स के लिए पारंपरिक किराना स्टोरों का पूर्णतः स्थान लेना संभव प्रतीत नहीं होता।
  • तथापि, यदि पारंपरिक किराना स्टोर समय के अनुरूप आधुनिकीकरण नहीं करते, तो उनके बाज़ार हिस्से में कमी आने की संभावना बनी रहेगी।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न]: क्विक कॉमर्स का उदय भारत के पारंपरिक खुदरा व्यापार तंत्र के पूर्ण विघटन का नहीं, बल्कि उसके तकनीकी रूपांतरण का प्रतिनिधित्व करता है। विवेचना कीजिए। 

स्रोत: BS

 

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