प्रत्यक्ष कर संग्रहण से आर्थिक गतिविधियों के सुदृढ़ होने का संकेत 

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • आयकर विभाग द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 अप्रैल से 17 जून के बीच भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64% बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

आँकड़ों की प्रमुख विशेषताएँ

  • इस अवधि के दौरान शुद्ध कॉर्पोरेट कर संग्रह में 22% की वृद्धि दर्ज की गई और यह 2.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया।
  • शुद्ध गैर-कॉर्पोरेट कर (NCT) संग्रह, जिसमें व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUFs) तथा फर्मों द्वारा भुगतान किए गए कर शामिल हैं, लगभग 8% बढ़कर 2.94 लाख करोड़ रुपये हो गया।
  • प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) से प्राप्त राजस्व में 45% की वृद्धि हुई और यह 18,856 करोड़ रुपये तक पहुँच गया।
  • अग्रिम कर (Advance Tax) संग्रह, जिसे व्यावसायिक प्रदर्शन का एक प्रमुख संकेतक माना जाता है, 15.30% बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
    • कॉर्पोरेट अग्रिम कर भुगतान में 16% की वृद्धि हुई और यह 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।
    • गैर-कॉर्पोरेट करदाताओं से प्राप्त अग्रिम कर संग्रह 13% बढ़कर 37,620 करोड़ रुपये हो गया।
  • सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 26.97 लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष कर संग्रह का बजट अनुमान निर्धारित किया है, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में संग्रहित 23.40 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 15% की वृद्धि को दर्शाता है।

प्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि के कारण

  • कॉर्पोरेट लाभप्रदता : कॉर्पोरेट कर प्राप्तियों में वृद्धि यह संकेत देती है कि कंपनियाँ अधिक लाभ अर्जित कर रही हैं। कंपनियों द्वारा अग्रिम कर के रूप में अधिक भुगतान करना उनके भविष्य की आय के प्रति विश्वास को भी प्रदर्शित करता है।
  • वित्तीय बाजारों में सशक्त गतिविधि : STT संग्रह में 45% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इक्विटी तथा डेरिवेटिव बाजारों में बढ़े हुए व्यापारिक लेन-देन ने कर राजस्व में वृद्धि को प्रोत्साहित किया है।
  • कर अनुपालन में सुधार : डिजिटलीकरण तथा डेटा विश्लेषण के व्यापक उपयोग के माध्यम से कर प्रशासन अधिक प्रभावी हुआ है, जिससे कर आधार का विस्तार हुआ है।
  • आर्थिक विकास में तीव्रता: कर राजस्व में वृद्धि व्यापारिक गतिविधियों एवं आय सृजन में वृद्धि का परिणाम है। सेवा एवं विनिर्माण क्षेत्रों में विकास के कारण राजस्व संग्रहण को बल मिला है।

प्रत्यक्ष कर

  • प्रत्यक्ष कर वह कर होता है जिसे सीधे करदाता पर लगाया जाता है तथा जिसका भुगतान उसी व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा सीधे सरकार को किया जाता है, जिस पर यह कर आरोपित किया गया हो।
  • प्रत्यक्ष कर की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसका भार करदाता किसी अन्य व्यक्ति पर स्थानांतरित नहीं कर सकता।

प्रत्यक्ष करों के प्रकार 

  • आयकर : आयकर अधिनियम के अंतर्गत व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUFs), फर्मों, सहकारी समितियों (कंपनियों को छोड़कर), न्यासों , व्यक्तियों के संघों तथा अन्य कृत्रिम न्यायिक व्यक्तियों की आय पर कर लगाया जाता है।
    • निवासी  व्यक्तियों पर भारत के अंदर एवं भारत के बाहर अर्जित समस्त आय पर कर लगाया जाता है।
    • अनिवासी व्यक्तियों पर केवल भारत में प्राप्त अथवा भारत में अर्जित आय पर कर लगाया जाता है।
    • सामान्यतः निवासी नहीं व्यक्तियों पर भारत में प्राप्त अथवा अर्जित आय तथा भारत से नियंत्रित व्यवसाय या पेशे से प्राप्त आय पर कर लगाया जाता है।
  • निगम कर : भारत में कंपनियों एवं व्यावसायिक संगठनों पर उनकी वैश्विक आय के आधार पर कर लगाया जाता है।
    • किसी कंपनी को भारत का निवासी माना जाता है यदि—
      • उसका भारत में निगमित होना, अथवा
      • उसका नियंत्रण एवं प्रबंधन पूर्णतः भारत में स्थित होना।
  • प्रतिभूति लेन-देन कर (STT): STT वह कर है जो स्टॉक एक्सचेंजों पर किए जाने वाले सभी प्रतिभूति लेनदेन पर लगाया जाता है।
    • यह निम्नलिखित पर लागू होता है—
      • इक्विटी शेयरों की खरीद एवं बिक्री,
      • डेरिवेटिव्स,
      • इक्विटी उन्मुख निधियाँ ,
      • इक्विटी उन्मुख म्यूचुअल फंड।

अग्रिम कर 

  • अग्रिम कर से आशय उस व्यवस्था से है जिसके अंतर्गत करदाता पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान किश्तों में आयकर का भुगतान करता है, बजाय इसके कि संपूर्ण कर राशि का भुगतान वित्तीय वर्ष के अंत में एकमुश्त किया जाए।
  • अग्रिम कर प्रणाली सरकार को वर्ष भर नियमित राजस्व प्राप्त करने में सहायता करती है तथा करदाताओं पर एकमुश्त कर भुगतान का भार कम करती है।

Source: MOSPI, TOI, TH, BS, Money Control

 

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