खाद्यान्न भंडारण हेतु स्मार्ट वेयरहाउसिंग प्रणाली 

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने नई दिल्ली में खाद्यान्न भंडारण हेतु स्मार्ट वेयरहाउसिंग प्रणाली का शुभारंभ किया।

परिचय

  • यह प्रणाली सार्वजनिक क्षेत्र के खाद्यान्न गोदामों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित प्रौद्योगिकियों की विश्व की सबसे बड़ी तैनाती का प्रतिनिधित्व करती है।
  • स्मार्ट वेयरहाउसिंग प्रणाली में निम्नलिखित उन्नत तकनीकों का एकीकरण किया गया है—
    • FASTag एवं ANPR (स्वचालित नंबर प्लेट पहचान) आधारित प्रवेश द्वार स्वचालन।
    • भू-टैग्ड स्मार्ट लॉक के माध्यम से बुद्धिमान अभिगम नियंत्रण।
    • AI-सक्षम बोरी गणना प्रणाली।
    • चेहरे की पहचान प्रणाली।
    • वस्तु पहचान तकनीक।
    • पर्यावरणीय मानकों की IoT आधारित निगरानी।
    • अग्नि, धुआँ तथा कृंतक पहचान हेतु AI-संचालित निगरानी प्रणाली।
  • यह प्लेटफ़ॉर्म ERP (उद्यम संसाधन योजना) एकीकरण, स्वचालित अभिलेख निर्माण तथा गोदाम संचालन के लिए उन्नत विश्लेषणात्मक सुविधाओं का भी समर्थन करता है।

खाद्यान्न भंडारण का महत्त्व

  • कटाई उपरांत हानियों में कमी: उचित भंडारण, जिसमें शीत भंडारण एवं आधुनिक गोदाम शामिल हैं, कृषि उत्पादों की बर्बादी को उल्लेखनीय रूप से कम करता है।
  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) जैसे कार्यक्रमों के अंतर्गत वितरण के लिए खाद्यान्न का बफर स्टॉक बनाए रखना आवश्यक है।
  • संकटपूर्ण बिक्री की रोकथाम: भंडारण सुविधाओं की उपलब्धता किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने और उपयुक्त समय पर बेचने में सक्षम बनाती है, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होता है।
  • मूल्य स्थिरीकरण: रणनीतिक बफर स्टॉक बनाए रखने से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं की सुरक्षा होती है।
  • गुणवत्ता बनाए रखना: वैज्ञानिक भंडारण नमी एवं कीटों जैसे कारकों को नियंत्रित कर खाद्यान्न को मानव उपभोग के लिए सुरक्षित बनाए रखता है।

भारत में खाद्यान्न भंडारण प्रणालियाँ

  • केंद्रीकृत भंडारण – जिसका संचालन मुख्यतः भारतीय खाद्य निगम (FCI) जैसी एजेंसियों द्वारा किया जाता है।
  • शीत भंडारण – जो फल, सब्जियाँ, दुग्ध उत्पाद एवं मांस जैसे नाशवान उत्पादों के लिए उपयोग किया जाता है।
  • विकेंद्रीकृत भंडारण – जो ग्रामीण गोदामों, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) तथा किसानों द्वारा खेत स्तर पर भंडारण के माध्यम से संचालित होता है।

खाद्यान्न का केंद्रीकृत भंडारण

  • केंद्रीय पूल हेतु खाद्यान्न की खरीद या तो सीधे भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा अथवा राज्य सरकार की एजेंसियों (SGAs) द्वारा की जाती है।
  • राज्य एजेंसियों द्वारा खरीदी गई मात्रा भंडारण के लिए FCI को हस्तांतरित की जाती है तथा खरीद की लागत की प्रतिपूर्ति FCI द्वारा की जाती है।
  • FCI इस भंडार का प्रबंधन करता है, उसका भंडारण सुनिश्चित करता है तथा बाद में उसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से वितरण हेतु जारी करता है।
  • जुलाई 2025 तक, केंद्रीय पूल के खाद्यान्नों के भंडारण के लिए FCI एवं राज्य एजेंसियों के पास उपलब्ध कुल आवृत एवं CAP भंडारण क्षमता 917.83 लाख मीट्रिक टन (LMT) थी।

आवृत भंडारण क्षमता 

  • आवृत भंडारण क्षमता से आशय उस कुल खाद्यान्न मात्रा से है जिसे पूर्णतः छत एवं दीवारों से युक्त संरचनाओं, जैसे गोदामों, वेयरहाउसों अथवा साइलो में संग्रहीत किया जा सकता है।
  • कवर एंड प्लिंथ (CAP) भंडारण में खाद्यान्न को ऊँचे चबूतरों पर रखा जाता है तथा लकड़ी के क्रेट्स को डनेज सामग्री के रूप में उपयोग किया जाता है।

शीत भंडारण अवसंरचना

  • शीत शृंखला अवसंरचना में निम्नलिखित सुविधाएँ सम्मिलित होती हैं—
    • पूर्व-शीतन
    • तौल 
    • छँटाई 
    • ग्रेडिंग 
    • पैकेजिंग 
    • नियंत्रित वातावरण (Controlled Atmosphere – CA) भंडारण
    • ब्लास्ट फ्रीजिंग
    • रेफ्रिजरेटेड परिवहन जैसे रीफर वैन 

भंडारण अवसंरचना में सुधार हेतु सरकारी पहलें

  • कृषि अवसंरचना निधि (AIF): AIF को वर्ष 2020 में भारत में कृषि अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया था। यह योजना कृषि उत्पादों के प्रभावी भंडारण हेतु खेत-स्तरीय भंडारण एवं लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के निर्माण पर केंद्रित है।
  • कृषि विपणन अवसंरचना (AMI): AMI, एकीकृत कृषि विपणन योजना (ISAM) का एक प्रमुख घटक है।
    • इसका उद्देश्य ग्रामीण भारत में कृषि विपणन अवसंरचना को सुदृढ़ करना तथा गोदामों एवं वेयरहाउसों के निर्माण एवं नवीनीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
  • प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY): यह खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए आधुनिक अवसंरचना विकसित करने की एक व्यापक योजना है, जिसका उद्देश्य खेत से लेकर खुदरा बाजार तक एक सुगम एवं दक्ष आपूर्ति शृंखला का निर्माण करना है।
  • प्राइवेट एंटरप्रेन्योर्स गारंटी (PEG) योजना: वर्ष 2008 में आरंभ की गई इस योजना का उद्देश्य निजी उद्यमियों, केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) तथा राज्य भंडारण निगमों (SWCs) के माध्यम से आवृत भंडारण क्षमता में वृद्धि करना है।
  • डिजिटल पहलें:
    • डिपो दर्पण 
    • अन्न चक्र 
    • SMART PDS
    • जैसी डिजिटल पहलें खाद्यान्न की निगरानी, भंडारण एवं वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हैं।

निष्कर्ष

  • कृषि भारत की जीवनरेखा है, जो करोड़ों लोगों का पोषण करने के साथ-साथ आजीविका एवं आर्थिक विकास का आधार भी है।
  • यद्यपि रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन भारत की कृषि शक्ति को प्रदर्शित करता है, किंतु प्रभावी भंडारण एवं वितरण व्यवस्था ही यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक अन्न का दाना उपभोक्ता तक पहुँचे।
  • बढ़ती जनसंख्या एवं बदलती जलवायु परिस्थितियों के संदर्भ में, वर्षभर खाद्यान्न की उपलब्धता तथा मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु पर्याप्त भंडार बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

Source: PIB

 

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