भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की राज्य वित्त रिपोर्ट

पाठ्यक्रम: GS2/ राजव्यवस्था और शासन; GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ 

  • हाल ही में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की राज्य वित्त रिपोर्ट 2024-25 ने भारत के राजकोषीय परिदृश्य में उभरती एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

CAG रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • सब्सिडी व्यय में वृद्धि: वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्यों का सब्सिडी व्यय उनके राजस्व व्यय का 10.2% तक पहुँच गया, जबकि महामारी के बाद यह औसतन लगभग 8.5% था।
    • वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य सरकारों ने सब्सिडी पर लगभग 4.4 लाख करोड़ रुपये व्यय किए, जो एक दशक पूर्व के स्तर की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है।
    • कर्नाटक में सब्सिडी का भार सर्वाधिक दर्ज किया गया, जहाँ कुल व्यय का 14.01% सब्सिडी पर व्यय हुआ।
  • सबसे अधिक सब्सिडी भार वाले राज्य: कर्नाटक में सब्सिडी का भार सर्वाधिक रहा, जहाँ कुल व्यय का 14.01% सब्सिडी पर व्यय किया गया।
    • उच्च सब्सिडी व्यय वाले अन्य राज्यों में मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान शामिल हैं।
  • राजस्व व्यय का प्रभुत्व: कुल राज्य व्यय में राजस्व व्यय का हिस्सा 83% से अधिक रहा।
    • सामाजिक एवं आर्थिक सेवाओं पर व्यय संयुक्त रूप से कुल व्यय का लगभग दो-तिहाई था, जो कल्याणकारी व्यय पर बढ़ते जोर को दर्शाता है।
  • सब्सिडी का क्षेत्रवार वितरण: ऊर्जा सब्सिडी, विशेष रूप से विद्युत सब्सिडी, कुल सब्सिडी व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा रही।
    • विद्युत एवं सिंचाई सब्सिडी सहित कृषि सहायता भी राज्य व्यय का एक प्रमुख घटक बनी रही।

CAG द्वारा व्यक्त चिंताएँ

  • संकुचित होता राजकोषीय अवकाश : राजस्व प्राप्तियों का एक बड़ा भाग अनिवार्य व्यय दायित्वों में व्यय हो रहा है, जिससे नई विकासात्मक पहलों के लिए सीमित संसाधन उपलब्ध रह जाते हैं।
  • पूंजीगत व्यय का प्रतिस्थापन: सब्सिडी पर बढ़ता व्यय अवसंरचना, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा तथा अन्य उत्पादक परिसंपत्तियों में निवेश को सीमित करता है।
  • स्थिरता संबंधी जोखिम: राजस्व में समानुपाती वृद्धि के बिना सब्सिडी कार्यक्रमों का निरंतर विस्तार राजकोषीय घाटे और ऋण स्तर में वृद्धि का कारण बनता है।

आगे की राह

  • CAG ने राज्यों को कल्याणकारी व्यय और विकासात्मक व्यय के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
  • सब्सिडी कार्यक्रमों की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए ताकि उनकी दक्षता, उचित लक्ष्यीकरण तथा राजकोषीय विवेकशीलता सुनिश्चित की जा सके।

Source: TOI

 

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