संक्षिप्त समाचार 19-06-2026

रंग समुदाय

पाठ्यक्रम: GS1 / भारतीय समाज

संदर्भ

  • उत्तराखंड में रंग समुदाय ने ओम पर्वत के निकट शिवलिंग की स्थापना का विरोध किया। समुदाय ने इसका कारण अपनी प्रकृति-पूजा की परंपरा को बताया।

परिचय

  • रंग एक स्वदेशी (आदिवासी) समुदाय है, जो मुख्यतः उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र की सीमावर्ती घाटियों तथा नेपाल के कुछ भागों में निवास करता है। यह समुदाय अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं और प्रकृति-पूजा के लिए जाना जाता है।
  • मुख्य तथ्य: यह समुदाय मुख्यतः व्यास घाटी, दारमा घाटी तथा चौंदास घाटी में निवास करता है।
    • रंग समुदाय भगवान शिव की प्राकृतिक अभिव्यक्तियों को पूजनीय मानता है, जिनमें ओम पर्वत तथा आदि कैलाश जैसे पवित्र पर्वत शामिल हैं।

स्रोत: TH

एनपीसीआई द्वारा ड्रूनिक्स (Drunix) प्लेटफॉर्म का अनावरण

पाठ्यक्रम: GS3 / अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने ड्रूनिक्स (Drunix) नामक एक ओपन-सोर्स ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य कंपनियों को टोकनाइजेशन प्लेटफॉर्म, डिजिटल परिसंपत्ति पारिस्थितिकी तंत्र तथा बहु-संगठन नेटवर्क विकसित करने और उनका विस्तार करने में सहायता प्रदान करना है।

परिचय

  • ड्रूनिक्स एक उच्च-प्रदर्शन वितरित लेजर प्लेटफॉर्म है, जिसे उद्यम-स्तरीय तथा सार्वजनिक अवसंरचना के व्यापक उपयोग के लिए विकसित किया गया है।
  • यह प्लेटफॉर्म हाइपरलेजर फैब्रिक के उन्नत संस्करण पर आधारित है।
  • हाइपरलेजर फैब्रिक एक ओपन-सोर्स एंटरप्राइज ब्लॉकचेन फ्रेमवर्क है, जिसे लिनक्स फाउंडेशन के अंतर्गत विकसित किया गया है और जिसका व्यापक उपयोग अनुमति-आधारित ब्लॉकचेन अनुप्रयोगों में किया जाता है।

टोकनाइजेशन क्या है?

  • टोकनाइजेशन वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत किसी परिसंपत्ति अथवा स्वामित्व अधिकार को ब्लॉकचेन पर डिजिटल टोकन के रूप में परिवर्तित किया जाता है।
  • इन परिसंपत्तियों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं—
    • वित्तीय प्रतिभूतियाँ 
    • अचल संपत्ति 
    • वस्तुएँ/कमोडिटीज 
    • डिजिटल मुद्राएँ 
    • पहचान संबंधी प्रमाण-पत्र 

स्रोत: BS

मिशन शक्ति के अंतर्गत SHe-Box 2.0 पोर्टल

पाठ्यक्रम: GS2 / शासन

संदर्भ


  • सरकार ने कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न संबंधी कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने में मिशन शक्ति के अंतर्गत SHe-Box 2.0 पोर्टल की भूमिका को रेखांकित किया है।

SHe-Box क्या है?

  • यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स(SHe-Box) पोर्टल को कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013 के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
  • इस पोर्टल को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) द्वारा लॉन्च किया गया था।
  • SHe-Box 2.0 को वर्ष 2024 में प्रारंभ किया गया, जो एक सुरक्षित, गोपनीय तथा उपयोगकर्ता-अनुकूल मंच प्रदान करता है। यह महिलाओं को किसी भी प्रकार के कलंक या प्रतिशोध के भय के बिना शिकायत दर्ज कराने की सुविधा देता है।
    • यह संगठित, असंगठित, सार्वजनिक तथा निजी सभी क्षेत्रों की महिलाओं को शिकायत दर्ज करने एवं उसकी प्रगति को ट्रैक करने हेतु एकल-खिड़की सुविधा उपलब्ध कराता है।
    • यह पोर्टल हिंदी और अंग्रेज़ी सहित 22 भाषाओं में उपलब्ध है।

मिशन शक्ति के बारे में

  • मिशन शक्ति महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण एवं सशक्तिकरण को सुदृढ़ करने हेतु मिशन मोड में संचालित एक प्रमुख योजना है।
  • इसके अंतर्गत दो उप-योजनाएँ शामिल हैं— ‘संबल’ और ‘समर्थ्य’
    • संबल उप-योजना: यह महिलाओं की सुरक्षा एवं संरक्षा पर केंद्रित है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित योजनाओं को संशोधनों सहित सम्मिलित किया गया है—
      • वन स्टॉप सेंटर (OSC)
      • महिला हेल्पलाइन (WHL)
      • बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (BBBP)
    • इसके अतिरिक्त ‘नारी अदालत’ (महिला सामूहिक मंच) को एक नए घटक के रूप में जोड़ा गया है।

स्रोत: AIR

डार्क वेब

पाठ्यक्रम: GS3 / साइबर सुरक्षा

संदर्भ


  • केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम अब “नए डार्क वेब” के रूप में विकसित हो गया है।

परिचय

  • सरकार ने तर्क दिया कि टेलीग्राम की संरचना और गोपनीयता संबंधी विशेषताओं ने इसे साइबर अपराधियों, धोखाधड़ी नेटवर्कों, उग्रवादी एवं आतंकवादी संगठनों तथा परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करने वाले समूहों के लिए एक पसंदीदा माध्यम बना दिया है।
  • सरकार की दलीलें मुख्यतः भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के आकलन पर आधारित थीं, जिसमें टेलीग्राम को अवैध ऑनलाइन गतिविधियों का तीव्रता से उभरता केंद्र बताया गया है।

डार्क वेब क्या है?

  • डार्क वेब इंटरनेट का वह भाग है, जहाँ उपयोगकर्ता द ओनियन राउटर (Tor) जैसे विशेष वेब ब्राउज़रों के माध्यम से अनुक्रमित वेब सामग्री तक गुमनाम रूप से पहुँच सकते हैं।
  • उत्पत्ति : इसकी उत्पत्ति वर्ष 2002 में अमेरिकी नौसेना अनुसंधान प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के कार्यों से जुड़ी मानी जाती है।
    • उन्होंने यह समझा कि डिजिटल गतिविधियों और संचार को कितनी आसानी से निगरानी, अवरोधन तथा दुरुपयोग का शिकार बनाया जा सकता है।
    • इसी कारण खुफिया समुदाय के लिए अधिक सुरक्षित संचार माध्यम की आवश्यकता से डार्क वेब की अवधारणा विकसित हुई।
  • चिंताएँ : डार्क वेब अनियमित है, अर्थात इसका संचालन और संरक्षण विश्वभर में फैले व्यक्तियों के विशाल नेटवर्क द्वारा किया जाता है।
    • यही परिचालन मॉडल इसे साइबर अपराधियों तथा संदिग्ध उद्देश्यों वाले अन्य व्यक्तियों के लिए अत्यंत उपयोगी और आकर्षक बनाता है।

ओपन वेब, डीप वेब और डार्क वेब में अंतर

स्रोत: (TH)

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY)

पाठ्यक्रम: GS2 / शासन; GS3 / रोजगार

संदर्भ

  • प्रधानमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के अंतर्गत ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित की जाएगी।

PM-VBRY के बारे में

  • यह वर्ष 2025 में प्रारंभ की गई केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है।
  • इसका कार्यान्वयन श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
  • उद्देश्य : रोजगार सृजन को प्रोत्साहन देना।
    • रोजगारयोग्यता में वृद्धि करना।
    • सभी क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना, विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना।
    • यह योजना देशभर में 3.5 करोड़ से अधिक सार्थक रोजगार अवसरों के सृजन का लक्ष्य रखती है।
  • मुख्य विशेषताएँ : प्रथम बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को ₹15,000 तक का प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।
    • नियोक्ताओं के लिए सरकार प्रत्येक नए कर्मचारी के छह माह तक स्थायी रोजगार में बने रहने पर ₹3,000 तक का प्रोत्साहन देगी।
    • इस पहल से औपचारिक कार्यबल में अधिक भागीदारी को प्रोत्साहन मिलने तथा दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति मिलने की अपेक्षा है।

स्रोत: TH

 QS रैंकिंग 2027

पाठ्यक्रम: GS2 / शिक्षा

संदर्भ

  • हाल ही में QS (क्वाक्वेरेली साइमंड्स) विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग 2027 जारी की गई, जिसमें विश्वभर के उच्च शिक्षा संस्थानों का मूल्यांकन किया गया।

प्रमुख निष्कर्ष 

  • इस रैंकिंग में 106 देशों एवं क्षेत्रों के 1,500 से अधिक संस्थानों का मूल्यांकन किया गया।
  • इसमें 52 भारतीय विश्वविद्यालयों को स्थान मिला है, जिससे भारत विश्व की पाँचवीं सर्वाधिक प्रतिनिधित्व वाली उच्च शिक्षा प्रणाली बन गया है।
  • आईआईटी दिल्ली भारत का सर्वोच्च रैंक प्राप्त संस्थान बना हुआ है, जिसे वैश्विक स्तर पर 118वाँ स्थान प्राप्त हुआ है।
  • आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी मद्रास विश्व के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में शामिल हैं।
  • वैश्विक स्तर पर शीर्ष संस्थान:
    • मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT), अमेरिका – प्रथम स्थान (लगातार 15वें वर्ष)।
    • इंपीरियल कॉलेज लंदन, यूनाइटेड किंगडम – संयुक्त द्वितीय स्थान।
    • स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, अमेरिका – संयुक्त द्वितीय स्थान।
    • ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, यूनाइटेड किंगडम – इसके बाद स्थान।
    • अन्य प्रमुख संस्थान—
      • पेकिंग विश्वविद्यालय (चीन) – 13वाँ स्थान।
      • टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख (जर्मनी) – 25वाँ स्थान।
  • चिंताएँ : रिपोर्ट के अनुसार भारतीय विश्वविद्यालयों ने अनुसंधान प्रभाव और स्नातक रोजगारयोग्यता में उल्लेखनीय प्रगति की है।
  • इसके बावजूद वे अंतरराष्ट्रीय छात्रों एवं शिक्षकों को आकर्षित करने की चुनौती का सामना कर रहे हैं।

QS रैंकिंग के बारे में

  • QS क्वाक्वेरेली साइमंड्स) की स्थापना वर्ष 1990 में हुई थी तथा इसका मुख्यालय लंदन में स्थित है।
  • यह संस्था अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षा क्षेत्र को डेटा, शोध तथा परामर्श सेवाएँ प्रदान करने में विशेषज्ञता रखती है।
  • QS रैंकिंग, जिसकी शुरुआत 2004 में हुई थी, वैश्विक विश्वविद्यालय रैंकिंगों में सर्वाधिक प्रतिष्ठित मानी जाती है और संस्थानों का निष्पक्ष मूल्यांकन प्रस्तुत करती है।
  • मूल्यांकन के प्रमुख संकेतक: QS रैंकिंग संस्थानों का मूल्यांकन 10 प्रमुख मानकों के आधार पर करती है, जिनमें शामिल हैं—
  • शैक्षणिक प्रतिष्ठा
  • रोजगार परिणाम
  • अंतरराष्ट्रीय संकाय अनुपात 
  • अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान नेटवर्क
  • अंतरराष्ट्रीय छात्र विविधता
  • शिक्षक-छात्र अनुपात 
  • सततता आदि।

स्रोत: AIR

प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0

पाठ्यक्रम: GS2 / सरकारी पहलें

संदर्भ

  • केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 (PMAY-U 2.0) के अंतर्गत पात्र शहरी गरीब परिवारों के लिए 2.13 लाख से अधिक अतिरिक्त आवासों को स्वीकृति प्रदान की है।

PMAY-U के बारे में

  • यह आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) की एक प्रमुख योजना है, जिसके अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा ₹2.50 लाख करोड़ तक की केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • इसे सितंबर 2024 में लॉन्च किया गया था। यह 25 जून 2015 को प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) का उन्नत एवं विस्तारित संस्करण है।
  • यह योजना उन परिवारों के लिए खुली है जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) तथा मध्यम आय वर्ग (MIG) से संबंधित हैं और जिनके पास देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं है।
  • पात्रता हेतु आय मानदंड: 
    • EWS परिवार: वार्षिक आय ₹3 लाख तक।
    • LIG परिवार: वार्षिक आय ₹3 लाख से ₹6 लाख तक।
    • MIG परिवार: वार्षिक आय ₹6 लाख से ₹9 लाख तक।
  • लागत साझेदारी : आवास निर्माण की लागत केंद्र सरकार, राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) तथा लाभार्थियों के बीच साझा की जाती है।
    • विभिन्न क्षेत्रों में लागत साझेदारी का स्वरूप भिन्न-भिन्न हो सकता है।
  • उपलब्धियाँ: PMAY-U तथा PMAY-U 2.0 के अंतर्गत संयुक्त रूप से देशभर में 1.27 करोड़ से अधिक आवासों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।

प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G)

  • प्रारंभकर्ता: ग्रामीण विकास मंत्रालय
  • पृष्ठभूमि: इसे 1 अप्रैल 2016 को पूर्ववर्ती इंदिरा आवास योजना का पुनर्गठन करके प्रारंभ किया गया था।
    • इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को मूलभूत सुविधाओं सहित पक्के आवास 
    • उपलब्ध कराना है।

स्रोत: AIR

अभ्यास खान क्वेस्ट 2026

पाठ्यक्रम: GS3 / रक्षा

संदर्भ

  • अभ्यास खान क्वेस्ट 2026 का आयोजन 20 जून से 3 जुलाई 2026 तक उलानबटार स्थित फाइव हिल्स प्रशिक्षण क्षेत्र में किया जाएगा।

परिचय

  • इस अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2003 में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और मंगोलियाई सशस्त्र बलों के बीच एक द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में हुई थी।
  • इसके पश्चात वर्ष 2006 से यह एक बहुराष्ट्रीय शांति स्थापना अभ्यास के रूप में विकसित हो गया।
  • वर्ष 2026 में इसका 23वाँ संस्करण आयोजित किया जा रहा है।
  • उद्देश्य: संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के अंतर्गत संचालित शांति समर्थन अभियानोंमें भाग लेने वाली सेनाओं के बीच परस्पर संचालन क्षमता तथा सहयोग को प्रोत्साहन देना।
    • विभिन्न देशों की सैन्य टुकड़ियों के बीच समन्वय, अनुभव-साझाकरण तथा संयुक्त शांति स्थापना क्षमताओं को सुदृढ़ करना।

स्रोत: AIR

 

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