क्या भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ती स्नातक संख्या को समाहित करने में सक्षम है?

पाठ्यक्रम: GS2/शिक्षा; GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ 

  • भारत में उच्च शिक्षा में नामांकन 2014-15 के 3.42 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 4.46 करोड़ हो गया है, फिर भी लगभग प्रत्येक तीन स्नातकों में से एक बेरोज़गार है। इससे एक मूलभूत प्रश्न उठता है कि क्या भारत अपनी अर्थव्यवस्था द्वारा उत्पादक रूप से समाहित किए जा सकने वाले स्नातकों से अधिक संख्या में स्नातक तैयार कर रहा है।

परिचय

  • विगत एक दशक में हजारों नए महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की स्थापना हुई है, जो प्रतिवर्ष लाखों स्नातक तैयार कर रहे हैं।
  • उच्च शिक्षा में कुल नामांकन 2014-15 के 3.42 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 4.46 करोड़ हो गया है।

उच्च शिक्षा प्राप्त स्नातकों के समक्ष चुनौतियाँ

  • रोज़गार सृजन में अंतराल : केवल इंजीनियरिंग क्षेत्र में ही विगत कुछ वर्षों में स्नातकों की संख्या में तीव्र वृद्धि हुई है, जबकि रोजगार सृजन उसी गति से नहीं बढ़ पाया है।
  • आईटी क्षेत्र में भर्ती की धीमी गति: पूर्व में आईटी सेवा क्षेत्र इंजीनियरिंग स्नातकों का प्रमुख नियोक्ता था।
    • वर्तमान में आईटी सेवा कंपनियों द्वारा भर्ती की गति काफी धीमी हो गई है तथा नए अवसर इतनी तीव्रता से नहीं बढ़ रहे हैं कि श्रम बाज़ार में प्रवेश करने वाले बढ़ते हुए स्नातकों को समाहित कर सकें।
  • पूंजी-प्रधान निवेश: सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में हाल के निवेश श्रम-प्रधान होने के बजाय पूंजी-प्रधान हैं।
    • अतः बड़े निवेश संबंधी घोषणाएँ स्नातकों के लिए रोजगार सृजन में समानुपाती वृद्धि नहीं करती हैं। (आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25)
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का आगमन : कंपनियों को ऐसे स्नातकों की आवश्यकता है जो एआई प्रणालियों के साथ कार्य कर सकें, एआई द्वारा उत्पन्न परिणामों का सत्यापन कर सकें तथा प्रौद्योगिकी की सहायता से जटिल समस्याओं का समाधान कर सकें।
    • विश्वविद्यालय अपने पाठ्यक्रमों को तत्काल पुनः डिज़ाइन नहीं कर सकते तथा विद्यार्थी भी तुरंत नई दक्षताएँ अर्जित नहीं कर सकते।
  • विनिर्माण क्षेत्र में स्वचालन: विनिर्माण क्षेत्र भी स्वचालन, रोबोटिक्स और इंडस्ट्री 4.0 प्रणालियों के कारण तीव्रता से परिवर्तित हो रहा है।
    • ऐतिहासिक रूप से बड़ी संख्या में इंजीनियर कारखानों में पर्यवेक्षी और परिचालन भूमिकाओं में कार्यरत थे, किंतु इनमें से अनेक कार्य अब स्वचालित हो चुके हैं।
    • परिणामस्वरूप, विनिर्माण क्षेत्र द्वारा उत्पन्न इंजीनियरिंग नौकरियों की संख्या अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रही है।

सरकारी पहलें

  • राष्ट्रीय युवा नीति 2014: राष्ट्रीय युवा नीति, 2014 ने 15–29 वर्ष आयु वर्ग के व्यक्तियों को युवा के रूप में परिभाषित किया तथा शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, स्वास्थ्य, खेल, सामाजिक सहभागिता एवं सशक्तिकरण जैसे प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की।
    • हाल ही में प्रस्तावित राष्ट्रीय युवा नीति 2025 ढाँचा भविष्य-उन्मुख कौशल, उद्यमिता, नेतृत्व, नागरिक सहभागिता, डिजिटल भागीदारी तथा सतत विकास जैसी उभरती प्राथमिकताओं पर विशेष बल देता है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020: राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 अनुभवात्मक तथा बहुविषयक शिक्षण को प्रोत्साहित करती है।
  • राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क: 170 विश्वविद्यालयों द्वारा अपनाया गया यह ढाँचा विद्यार्थियों को शैक्षणिक, कौशल-आधारित तथा अनुभवात्मक शिक्षण के माध्यम से अर्जित क्रेडिट संचित करने की सुविधा प्रदान करता है।
  • ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (APAAR ID): यह विद्यार्थियों की संपूर्ण शैक्षणिक यात्रा के दौरान अर्जित शैक्षणिक एवं कौशल-आधारित क्रेडिट का डिजिटल संकलन करता है।
  • स्वयं (SWAYAM): SWAYAM पर 18,580 से अधिक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
    • इस मंच पर 6.1 करोड़ से अधिक नामांकन तथा 53.7 लाख प्रमाणन दर्ज किए गए हैं।
  • SWAYAM PRABHA, PM e-VIDYA एवं DIKSHA: इन पहलों ने टेलीविजन, रेडियो, डिजिटल सामग्री तथा ई-संसाधनों के माध्यम से शिक्षा की पहुँच को और अधिक व्यापक बनाया है।
  • अटल नवाचार मिशन : इस मिशन के अंतर्गत 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित की गई हैं।
    • इन प्रयोगशालाओं ने उभरती प्रौद्योगिकियों से संबंधित 16 लाख से अधिक परियोजनाओं के विकास को समर्थन प्रदान किया है।
  • राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना: यह योजना वर्ष 2016 में प्रारंभ की गई थी और वर्तमान में इसके दूसरे चरण NAPS 2.0 का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
    • यह प्रशिक्षुओं को आंशिक वजीफा सहायता प्रदान कर प्रशिक्षुता प्रशिक्षण को बढ़ावा देती है।
    • “सीखते हुए कमाओ” तथा उद्योग-केंद्रित कौशल विकास के लिए प्रशिक्षुता एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान : आईटीआई भारत में दीर्घकालिक व्यावसायिक शिक्षा की आधारशिला हैं तथा उद्योगों को निरंतर कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराते हैं।
    • विगत 12 वर्षों में सरकार ने इनके व्यापक विस्तार और आधुनिकीकरण को सुनिश्चित किया है।
  • SOAR (कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तत्परता हेतु कौशल विकास), 2025: वर्ष 2025 में प्रारंभ की गई यह पहल कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रति जागरूकता तथा आधारभूत एआई कौशल प्रदान करती है।
    • यह शिक्षकों को भी शिक्षण प्रक्रिया में एआई अवधारणाओं को समाहित करने हेतु सक्षम बनाती है।
    • कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए 15-15 घंटे के तीन मॉड्यूल उपलब्ध कराए गए हैं।
  • प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना , 2024: यह एक प्रमुख परिवर्तनकारी पहल है, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच की दूरी को कम करना है।
    • इसके माध्यम से देशभर के युवाओं को संरचित एवं सवेतन इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • स्किल इंडिया डिजिटल हब , 2023: यह कौशल विकास, रोजगार, प्रशिक्षुता तथा उद्यमिता के लिए एकीकृत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मंच के रूप में कार्य करता है।
    • यह शिक्षार्थियों, प्रशिक्षण प्रदाताओं, नियोक्ताओं तथा सरकारी कार्यक्रमों को एक ही डिजिटल मंच पर जोड़ता है।

आगे की राह 

  • भारत को अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाना होगा।
  • उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच अधिक घनिष्ठ सहयोग स्थापित करना आवश्यक है।
  • भारत को एक सशक्त उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना होगा, जो नवाचार को प्रोत्साहित करे तथा जोखिम लेने की संस्कृति को समर्थन प्रदान करे।
  • भारत को डिजाइन, इंजीनियरिंग तथा उन्नत विनिर्माण के क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमताओं का निरंतर विकास करना चाहिए।
  • विशेष रूप से रक्षा और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।
  • मुख्य चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा, उद्योग और नीति—तीनों एक ही दिशा में समन्वित रूप से आगे बढ़ें।

Source: TH

 

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