राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा ट्रांसजेंडरों के कल्याण सुनिश्चित करने हेतु दूसरी परामर्शी अधिसूचना जारी 

पाठ्यक्रम: GS1/सामाजिक मुद्दे

संदर्भ

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण को सुनिश्चित करने हेतु 11 मंत्रालयों के सचिवों, रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को दूसरी परामर्शी अधिसूचना जारी की है।

परिचय

  • NHRC की सतत सहभागिता के आधार पर आयोग ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को प्रभावित करने वाली अनेक स्थायी और उभरती चुनौतियों की पहचान की है।
  • प्रमुख सिफारिशें:
    • आगामी भारत की जनगणना में ‘इंटरसेक्स’, ‘ट्रांसमैन’ और ‘ट्रांसवुमन’ जैसी पृथक श्रेणियों का समावेश।
    • जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और उत्तराधिकार संबंधी कानूनों की समीक्षा, ताकि स्व-पहचाने गए लिंग की मान्यता और ट्रांसजेंडर अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
    • ट्रांसजेंडर और इंटरसेक्स व्यक्तियों के लिए समान उत्तराधिकार, संपत्ति, आवास एवं भूमि अधिकारों की गारंटी।
    • शैक्षणिक संस्थानों में ट्रांसजेंडर छात्रों का प्रवेश स्व-पहचाने गए लिंग के आधार पर, बिना चिकित्सीय प्रमाण की आवश्यकता।
    • जेंडर-अफर्मिंग स्वास्थ्य सेवाओं हेतु मानकीकृत और नैतिक चिकित्सा प्रोटोकॉल का विकास तथा लैंगिक पुनर्निर्धारण शल्यक्रिया की लागत का विनियमन।
    • समावेशी कार्यस्थलों को बढ़ावा देने हेतु जेंडर-न्यूट्रल सुविधाएँ, समावेशी मानव संसाधन नीतियाँ, कार्यस्थल शिकायत निवारण तंत्र और अनिवार्य विविधता प्रकटीकरण।
    • वृद्ध ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए दस्तावेजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना, स्व-पहचान आधारित नामांकन को सक्षम करना तथा ट्रांसजेंडर-समावेशी वृद्धाश्रमों की स्थापना।

LGBTQIA+

  • LGBTQIA+ एक छत्र शब्द है जिसमें लेस्बियन, गे, बाइसेक्शुअल, ट्रांसजेंडर, क्वियर, इंटरसेक्स और एसेक्शुअल व्यक्ति सम्मिलित हैं। ‘+’ अन्य पहचानों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • LGBTQIA+ व्यक्ति पारंपरिक लैंगिक भूमिकाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं होते, उनके यौन लक्षण सामान्य पुरुष या महिला द्विआधारी में फिट नहीं होते, तथा उनकी लैंगिक पहचान जन्म के समय दिए गए लिंग से भिन्न हो सकती है।

भारत में LGBTQIA+ अधिकारों की स्थिति

  • जनगणना 2011: भारत में 4.87 लाख व्यक्तियों ने लिंग श्रेणी में “अन्य” विकल्प चुना।
  • ट्रांसजेंडर अधिकार:NALSA बनाम भारत संघ (2014) ने स्व-पहचाने गए लिंग के अधिकार को मान्यता दी।
    • ट्रांसजेंडर को “तीसरे लिंग” के रूप में मान्यता देते हुए उनके मौलिक अधिकारों की पुष्टि की।
  • अपराधमुक्ति: नवतेज सिंह जोहर बनाम भारत संघ (2018) ने सहमति से किए गए समलैंगिक संबंधों को अपराधमुक्त किया (धारा 377 आंशिक रूप से निरस्त)।
  • संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 15 (लिंग के आधार पर भेदभाव निषेध), अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार)।
  • विधि: ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 ट्रांसजेंडर पहचान को कानूनी मान्यता प्रदान करता है।

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियाँ

  • सामाजिक मुद्दे: गहरे सामाजिक पूर्वाग्रहों के कारण परिवारों और समुदायों से बहिष्करण।
  • शिक्षा तक पहुँच का अभाव: उत्पीड़न, हिंसा और बुलिंग के कारण उच्च विद्यालय स्तर पर भारी ड्रॉपआउट दर।
  • रोज़गार में बाधाएँ: नियुक्ति और कार्यस्थल पर व्यापक भेदभाव। अवसरों की कमी के कारण प्रायः असुरक्षित और शोषणकारी क्षेत्रों जैसे भीख माँगना या यौन कार्य में मजबूर।
  • स्वास्थ्य सेवा से बहिष्करण: जेंडर-अफर्मिंग स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, चिकित्साकर्मियों द्वारा भेदभाव, सार्वजनिक अस्पतालों में हार्मोनल और शल्य सेवाओं की अनुपलब्धता।
    • सामाजिक अस्वीकृति और अलगाव के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर भारी भार।
  • हिंसा और उत्पीड़न: सार्वजनिक और निजी दोनों स्थानों पर मौखिक, शारीरिक एवं यौन हिंसा का शिकार।
  • राजनीतिक अल्प-प्रतिनिधित्व: मुख्यधारा की पार्टियों और संस्थानों में कम दृश्यता और प्रतिनिधित्व। नीति-निर्माण में भागीदारी का अभाव उनकी आवश्यकताओं की अभिव्यक्ति को बाधित करता है।

सरकारी पहलें

  • राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल (2020): पहचान प्रमाणपत्र और लाभों तक पहुँच हेतु ऑनलाइन आवेदन की सुविधा।
  • SMILE योजना (2022): आजीविका, कौशल प्रशिक्षण और आश्रय सहायता प्रदान करती है। गरिमा गृह केंद्रों एवं आयुष्मान भारत TG Plus स्वास्थ्य कवरेज के माध्यम से।
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग: “ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए समान अवसर नीति” जारी की, जिससे रोजगार अवसरों तक समान पहुँच सुनिश्चित हो।
  • राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय, जिसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर अधिकारों की रक्षा और संवर्धन है। परिषद में ट्रांसजेंडर समुदाय के पाँच प्रतिनिधि, NHRC और NCW के प्रतिनिधि, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि तथा NGO विशेषज्ञ शामिल हैं।
  • ट्रांसजेंडर संरक्षण सेल और राष्ट्रीय पोर्टल एकीकरण: जिला मजिस्ट्रेटों के अधीन जिला-स्तरीय सेल की स्थापना, अपराधों की निगरानी, समय पर FIR पंजीकरण, संवेदनशीलता कार्यक्रमों का संचालन और कानूनी संरक्षण को सुदृढ़ करना।

निष्कर्ष

  • हाल के वर्षों में भारत में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए महत्वपूर्ण कानूनी और नीतिगत सुधार हुए हैं। जैसे-जैसे भारत एक अधिक न्यायसंगत भविष्य की ओर अग्रसर है, यह सुनिश्चित करना कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति गरिमा, स्वायत्तता और अवसरों के साथ जीवन व्यतीत करें, उसके लोकतांत्रिक एवं मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं का केंद्रीय तत्व बना हुआ है।

Source: AIR

 

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