आंतरिक जलमार्ग: आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ बनाना

पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था; अवसंरचना

सन्दर्भ 

  • हाल ही में मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) ने भारत की लॉजिस्टिक व्यवस्था में आंतरिक जलमार्गों की बढ़ती भूमिका को एक सुदृढ़ तथा रणनीतिक घटक के रूप में रेखांकित किया है।

आंतरिक जलमार्ग का परिचय

  • आंतरिक जल परिवहन (IWT) से आशय नदियों, नहरों, बैकवाटर तथा जलधाराओं के माध्यम से माल और यात्रियों के आवागमन से है।
  • यह लागत की दृष्टि से सस्ता, ऊर्जा की दृष्टि से कुशल तथा पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ होता है, जिससे यह भारी मात्रा में माल परिवहन के लिए उपयुक्त बनता है।
  • भारत में 14,500 किमी से अधिक नौवहन योग्य जलमार्ग हैं, जिनमें 111 राष्ट्रीय जलमार्ग राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के अंतर्गत घोषित किए गए हैं।
    • विश्व बैंक द्वारा समर्थित प्रमुख परियोजनाएँ, जैसे कि जल मार्ग विकास परियोजना(NW-1:गंगा-भागीरथी-

हुगली नदी प्रणाली)।

  • माल परिवहन लगभग 146 मिलियन टन तक बढ़ गया है (जो 2013–14 में 18 मिलियन टन था), जिससे लगभग 21% की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर दर्ज हुई है।

आंतरिक जलमार्गों में वृद्धि के प्रेरक कारक

  • नीतिगत प्रोत्साहन और संस्थागत समर्थन: इन पहलों ने नौवहन क्षमता, टर्मिनल अवसंरचना तथा माल संभालने की क्षमता में सुधार किया है।
  • भारतीय आंतरिक जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा विनियमन और विकास
  • राष्ट्रीय जलमार्ग–1 (गंगा) पर जल मार्ग विकास परियोजना (JMVP)
  • सागरमाला कार्यक्रम तथा प्रधानमंत्री गतिशक्ति के माध्यम से बहु-माध्यमीय एकीकरण
  • बहु-माध्यमीय लॉजिस्टिक्स एकीकरण: आंतरिक जलमार्ग विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच संपर्क को सुदृढ़ करते हैं, जिससे बंदरगाहों, रेलमार्गों और राजमार्गों के साथ बेहतर जुड़ाव स्थापित होता है, तथा परिवहन समय और लागत में कमी आती है।
  • आंतरिक जलमार्गों का विस्तार व्यापक लॉजिस्टिक परिवर्तन का हिस्सा है, जिसमें रेल माल गलियारों और बंदरगाहों के साथ एकीकरण, बहु-माध्यमीय लॉजिस्टिक पार्कों का विकास तथा आपूर्ति संबंधी अवरोधों में कमी शामिल है।

लचीले परिवहन माध्यम के रूप में आंतरिक जलमार्ग

  • वैश्विक व्यवधानों से सुरक्षा: आंतरिक जलमार्ग घरेलू स्तर पर एक स्थिर परिवहन विकल्प प्रदान करते हैं, जबकि समुद्री मार्ग प्रायः भू-राजनीतिक तनावों से प्रभावित होते हैं।
  • लॉजिस्टिक लागत में कमी: भारत में लॉजिस्टिक लागत अपेक्षाकृत अधिक (लगभग 13–14% सकल घरेलू उत्पाद) बनी हुई है।
  • आंतरिक जल परिवहन में ईंधन की खपत कम होती है तथा वहन क्षमता अधिक होती है।
  • सड़क एवं रेल पर दबाव में कमी: यह भारी माल (कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न) को स्थानांतरित कर सड़क और रेल नेटवर्क पर बढ़ते दबाव को कम करता है।
  • जलवायु एवं पर्यावरणीय लाभ: प्रति टन-किलोमीटर कम कार्बन उत्सर्जन होता है, जिससे भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं और हरित लॉजिस्टिक लक्ष्यों को समर्थन मिलता है।

भारत की अर्थव्यवस्था में सामरिक महत्त्व

  • आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता में वृद्धि: लॉजिस्टिक व्यवधान (जैसे भू-राजनीतिक संघर्ष, महामारी) कमजोरियों को उजागर करते हैं।
  • इनमें बढ़ती माल ढुलाई एवं बीमा लागत, आपूर्ति श्रृंखला में अवरोध तथा ऊर्जा मूल्यों (कच्चा तेल, रसोई गैस, प्राकृतिक गैस) में अस्थिरता शामिल है।
  • आंतरिक जलमार्ग वैकल्पिक व्यवस्था और विविधीकरण प्रदान करते हैं, जो सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं के प्रमुख तत्व हैं।
  • क्षेत्रीय विकास और समावेशन: यह आंतरिक एवं नदी तटीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है तथा इंडो-गंगीय मैदानों में व्यापार गलियारों को सुदृढ़ करता है।
  • आर्थिक विकास में सहयोग: उच्च आर्थिक वृद्धि बनाए रखने के लिए कुशल लॉजिस्टिक प्रणाली अत्यंत आवश्यक है।
  • आंतरिक जल परिवहन अवरोधों को कम करके तथा प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर योगदान देता है।

आंतरिक जल परिवहन की चुनौतियाँ

  • नदियों के प्रवाह में मौसमी परिवर्तन
  • सीमित गहराई (ड्राफ्ट संबंधी समस्याएँ) एवं निरंतर खुदाई की आवश्यकता
  • अविकसित टर्मिनल अवसंरचना
  • पर्यावरणीय चिंताएँ (जैसे गंगा डॉल्फ़िन पर प्रभाव)
  • निजी क्षेत्र की कम भागीदारी

आगे की राह

  • अवसंरचना और प्रौद्योगिकी: नदी प्रशिक्षण, खुदाई, आधुनिक टर्मिनलों का विकास तथा डिजिटल नौवहन प्रणालियों और नदी सूचना सेवाओं का उपयोग ।
  • नीतिगत और संस्थागत सुधार: राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति (2022) को सुदृढ़ करना तथा निजी निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करना ।
  • सतत विकास दृष्टिकोण: पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय तथा नदी-आधारित अर्थव्यवस्थाओं में समुदाय की भागीदारी।
  • एकीकृत बहु-माध्यमीय दृष्टि: आंतरिक जल परिवहन को रेल, सड़क और बंदरगाह नेटवर्क के साथ समन्वित करना तथा लॉजिस्टिक केंद्रों और आर्थिक गलियारों का विकास।

निष्कर्ष

  • आंतरिक जलमार्गों की बढ़ती भूमिका भारत की लॉजिस्टिक रणनीति में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाती है, जहाँ ध्यान केवल लागत से हटकर सुदृढ़ता पर केंद्रित हो रहा है।
  • आंतरिक जलमार्ग एक टिकाऊ, कुशल और झटकों के प्रति प्रतिरोधी परिवहन माध्यम प्रदान करते हुए भारत के आर्थिक और अवसंरचनात्मक विकास के एक प्रमुख आधार स्तंभ बनने की दिशा में अग्रसर हैं।

स्रोत: BL

 

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