संक्षिप्त समाचार  02-05-2026

तात्या टोपे

पाठ्यक्रम: GS1/ आधुनिक इतिहास

संदर्भ  

  • 1857 से संबंधित तात्या टोपे का एक दुर्लभ हस्तलिखित और हस्ताक्षरित पत्र मध्य प्रदेश के अभिलेखागार में खोजा गया है।

तात्या टोपे के बारे में

  • प्रारंभिक जीवन: तात्या टोपे का वास्तविक नाम रामचंद्र पांडुरंग टोपे था। उनका जन्म 1814 में नासिक, महाराष्ट्र में हुआ।
    • उनके पिता बाजीराव द्वितीय, अंतिम मराठा पेशवा, के दरबार में एक कुलीन पद पर कार्यरत थे।
    • उनका नाना साहेब (बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) से घनिष्ठ संबंध था, जिसने बाद में उनके विद्रोह में भूमिका को आकार दिया।
  • 1857 के विद्रोह में भूमिका: वे 1857 के विद्रोह के दौरान सबसे सक्षम सैन्य कमांडरों में से एक के रूप में उभरे।
    • उन्होंने कानपुर और ग्वालियर जैसे प्रमुख प्रतिरोध केंद्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई जैसे नेताओं के साथ मिलकर ब्रिटिश सेनाओं के विरुद्ध विद्रोह को बनाए रखा।
  • सैन्य रणनीति: वे गुरिल्ला युद्ध, तीव्र गतिशीलता और आकस्मिक हमलों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रसिद्ध थे।
    • अंततः उन्हें ब्रिटिशों ने पकड़ लिया और 1859 में शिवपुरी में औपचारिक मुकदमे के बाद फाँसी दी गई।

स्रोत: TOI

नागरिकता नियमों में संशोधन अधिसूचित

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन व्यवस्था

संदर्भ  

  • भारत सरकार ने नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जिनमें प्रवासी भारतीय नागरिक (OCI) कार्डधारकों और नागरिकता आवेदन से संबंधित संशोधित प्रावधान शामिल हैं।

परिचय

  • गृह मंत्रालय ने नागरिकता नियम, 2009 में संशोधन किए हैं।
  • इसमें OCI कार्डधारकों और नागरिकता आवेदनों की विभिन्न प्रक्रियाओं में डिजिटल परिवर्तन लाया गया है।

प्रावधान

  • कोई भी अल्पवयस्क बच्चा भारतीय पासपोर्ट रखते हुए किसी अन्य देश का पासपोर्ट नहीं रख सकता।
  • OCI कार्ड पंजीकरण और त्याग के सभी आवेदन अब आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रस्तुत किए जाएँगे।
  • OCI स्थिति त्यागने की घोषणा पर, व्यक्तियों को मूल भौतिक कार्ड निकटतम भारतीय मिशन, पोस्ट या विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी को सौंपना होगा।
  • सरकार ने दस्तावेज़ों की प्रतिलिपि प्रस्तुत करने की पूर्व आवश्यकता को समाप्त कर दिया है और इलेक्ट्रॉनिक OCI (e-OCI) की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत पंजीकृत व्यक्तियों को अब भौतिक OCI कार्ड या इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण जारी किया जा सकता है।
  • OCI आवेदकों को अब फास्ट ट्रैक इमिग्रेशन प्रोग्राम में शामिल होने के लिए एक नया सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करना होगा, जिसमें पंजीकरण के दौरान उनके बायोमेट्रिक डेटा संग्रह की अनुमति होगी।

OCI योजना

  • OCI योजना नागरिकता अधिनियम, 1955 में 2005 के संशोधन के माध्यम से शुरू की गई थी।
  • यह योजना भारतीय मूल के व्यक्तियों को प्रवासी भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकरण की अनुमति देती है, बशर्ते वे 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद भारत के नागरिक रहे हों या उस तिथि को नागरिक बनने के पात्र रहे हों।
  • हालाँकि, पाकिस्तान या बांग्लादेश के नागरिक रहे व्यक्ति या जिनके माता-पिता/दादा-दादी/परदादा-पड़दादी नागरिक रहे हों, वे पात्र नहीं हैं।

स्रोत: AIR

सिक्किम बना भारत का प्रथम पेपरलेस न्यायिक राज्य

पाठ्यक्रम: GS2/ न्यायपालिका

संदर्भ  

  • भारत के मुख्य न्यायाधीश सुर्या कांत ने सिक्किम को भारत का प्रथम पेपरलेस न्यायिक राज्य घोषित किया।

परिचय 

  • यह न्याय प्रणाली को तेज़, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • ई-फाइलिंग और डिजिटल केस प्रबंधन से दक्षता और न्याय तक पहुँच में सुधार होगा, विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों में।
  • यह विकसित भारत 2047 की दृष्टि के अनुरूप है।

भारत में उच्च न्यायालय

  • भारत में उच्च न्यायालय की स्थापना 1862 में हुई थी, जब कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास में उच्च न्यायालय स्थापित किए गए।
  • वर्तमान में भारत में 25 उच्च न्यायालय हैं, जिनमें से कुछ का अधिकार क्षेत्र एक से अधिक राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों पर है।
  • दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेशों के अपने उच्च न्यायालय हैं।
  • संविधान के अनुच्छेद 214 से 231 (भाग VI) में इनके संगठन, शक्तियों एवं अधिकार क्षेत्र का उल्लेख है।

स्रोत: AIR

 क्यूराटेक को बेवासिज़ुमैब बायोसिमिलर हेतु नियामक स्वीकृति

पाठ्यक्रम: GS3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ  

  • ऑरोबिंदो फार्मा की सहायक कंपनी क्यूराटेक बायोलॉजिक्स को हेल्थ कनाडा से अपने बेवासिज़ुमैब बायोसिमिलर बेवकोल्वा के लिए नोटिस ऑफ कंप्लायंस (NOC) प्राप्त हुआ है।

नोटिस ऑफ कंप्लायंस (NOC) क्या है?

  • NOC एक औपचारिक नियामक स्वीकृति है, जो किसी दवा की सुरक्षा, प्रभावशीलता और गुणवत्ता का मूल्यांकन करने के बाद दी जाती है।
  • NOC जारी होने पर फार्मास्यूटिकल कंपनी को संबंधित क्षेत्राधिकार में दवा का कानूनी विपणन और वितरण करने की अनुमति मिलती है।
  • यह उन्नत फार्मास्यूटिकल बाज़ारों में अपनाए गए कठोर नियामक मानकों के अनुपालन को दर्शाता है।

बायोसिमिलर क्या हैं?

  • बायोसिमिलर ऐसे जैविक उत्पाद हैं जो पहले से स्वीकृत संदर्भ जैविक दवा के अत्यधिक समान होते हैं, सुरक्षा, प्रभावशीलता और गुणवत्ता के संदर्भ में।
  • ये पूरी तरह नई दवाएँ नहीं होतीं, बल्कि पहले से स्थापित जैविक दवाओं के समकक्ष संस्करण होते हैं, जिनका वर्षों से विभिन्न रोगों के उपचार में उपयोग किया जा रहा है।
  • बायोसिमिलर जटिल जैविक उत्पाद होते हैं, जिन्हें संदर्भ जैविक दवाओं की तरह ही जीवित कोशिका प्रणालियों का उपयोग करके विकसित किया जाता है। 
  • इनका संरचना और कार्य में निकट समानता सुनिश्चित की जाती है, हालाँकि इन्हें सामान्य जेनेरिक दवाओं की तुलना में तकनीकी रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण बनाना पड़ता है।

स्रोत: ET

केंद्र की नई ई-बस योजना

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण  

संदर्भ 

  • केंद्र सरकार, पीएम ई-ड्राइव कार्यक्रम के अंतर्गत 14,000 बसों की निविदा और आवंटन पूर्ण करने के बाद राज्यों के लिए एक नई इलेक्ट्रिक बस योजना लागू कर सकती है।

पीएम ई-ड्राइव योजना के बारे में

  • यह योजना वर्ष 2024 में भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रारंभ की गई थी।
  • योजना की अवधि अक्टूबर 2024 से 31 मार्च 2026 तक थी, जिसे अब 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है।
  • ईएमपीएस-2024 (इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम) को भी पीएम ई-ड्राइव योजना में सम्मिलित किया गया है।

योजना के घटक

  • सब्सिडी: ई-2W, ई-3W, ई-एम्बुलेंस, ई-ट्रक तथा अन्य उभरती ईवी श्रेणियों के लिए मांग प्रोत्साहन।
  • पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण हेतु अनुदान: ई-बसें, चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क की स्थापना एवं एमएचआई की परीक्षण एजेंसियों का उन्नयन।
  • प्रशासनिक प्रावधान: सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) गतिविधियाँ तथा परियोजना प्रबंधन एजेंसी (PMA) का शुल्क।
  • समर्थन हेतु पात्र वाहन श्रेणियाँ:
    • बसें (केवल इलेक्ट्रिक बसें)
    • तीन पहिया वाहन (ई-रिक्शा, ई-कार्ट एवं L5 ई-3W)
    • दो पहिया वाहन (ई-2W)
    • ई-एम्बुलेंस (इलेक्ट्रिक, प्लग-इन हाइब्रिड एवं स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड)
    • ई-ट्रक एवं अन्य नई ईवी श्रेणियाँ (अगले चरण में अधिसूचित होंगी)
  • चार्जिंग स्टेशन  :
    • यह योजना ईवी खरीदारों की “रेंज चिंता” को दूर करने हेतु सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करती है।

साइबॉर्ग बॉटनी

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण  

संदर्भ 

  • वैज्ञानिकों ने साइबॉर्ग बॉटनी के क्षेत्र में प्रगति की है, जिससे पौधे अपनी आंतरिक स्वास्थ्य स्थिति को वास्तविक समय में संप्रेषित कर सकते हैं।

साइबॉर्ग बॉटनी के बारे में

  • यह एक उभरता हुआ अंतर्विषयक क्षेत्र है जो जीवित पौधों को इलेक्ट्रॉनिक घटकों के साथ एकीकृत करता है।
  • “साइबॉर्ग” शब्द का अर्थ है साइबरनेटिक जीव, जो प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाओं और कृत्रिम इलेक्ट्रॉनिक कार्यक्षमता के संलयन को दर्शाता है।
  • उद्देश्य है पौधों को जीवित सर्किट बोर्ड में परिवर्तित करना, जो जानकारी का संवेदन, प्रसंस्करण और संचार कर सकें।

कार्य प्रणाली

  • नैनोवायर और ट्रांजिस्टर का समावेश: इन्हें पौधों की कोशिका भित्तियों में स्थापित किया जाता है, जहाँ वे बायोसेंसर के रूप में कार्य करते हैं।                    
  • संचालक पॉलिमर: जैसे PEDOT, जो पौधों की आंतरिक वायरिंग के रूप में कार्य कर संकेतों को बाहरी उपकरणों तक पहुँचाते हैं।
  • संकेत रूपांतरण: प्रकाश, आर्द्रता , पोषक तत्व और कीटों के प्रति पौधों की प्रतिक्रियाओं को डिजिटल डेटा में परिवर्तित किया जाता है।

भारत में पवित्र उपवन

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण  

संदर्भ 

  • केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड ने पवित्र उपवनों के पुनर्स्थापन हेतु एक पायलट कार्यक्रम प्रारंभ किया है।

पवित्र उपवनों के बारे में

  • ये वन या प्राकृतिक वनस्पति के ऐसे हिस्से हैं जिन्हें स्थानीय समुदाय धार्मिक विश्वासों और पारंपरिक प्रथाओं के कारण संरक्षित करते हैं।             
  • ये सामुदायिक संरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र होते हैं, जो मंदिरों, अनुष्ठानों और आदिवासी परंपराओं से जुड़े रहते हैं।
  • भारत में अनुमानतः 1,00,000 से 1,50,000 पवित्र उपवन हैं।
  • उपयुक्त उपवनों को जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत जैव विविधता धरोहर स्थल घोषित किया जा सकता है।

महत्त्व

  • पवित्र उपवन जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में कार्य करते हैं, जहाँ दुर्लभ, स्थानिक और औषधीय पौधों का संरक्षण होता है।
  • ये मृदा संरक्षण में योगदान देते हैं और विशेषकर पश्चिमी घाट एवं हिमालय जैसे संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों में अपरदन को रोकते हैं।
  • सांस्कृतिक दृष्टि से ये अनुष्ठानों, उत्सवों और सामुदायिक पहचान के केंद्र होते हैं, जहाँ विश्वास प्रणाली के माध्यम से संरक्षण को सुदृढ़ किया जाता है।
 

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