पाठ्यक्रम: GS2/ राजव्यवस्था और शासन
संदर्भ
- वित्त विधेयक, 2026 लोकसभा द्वारा पारित किया गया, जो वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट प्रक्रिया को पूर्ण करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
वित्त विधेयक क्या है?
- वित्त विधेयक एक धन विधेयक है जो केंद्र सरकार के कराधान और वित्तीय प्रस्तावों को प्रभावी बनाता है।
- इसे संविधान के अनुच्छेद 110 के अंतर्गत वार्षिक रूप से केंद्रीय बजट प्रस्तुत किए जाने के बाद पेश किया जाता है।
- इसमें निम्न प्रावधान शामिल होते हैं:
- प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों से संबंधित प्रावधान।
- वर्तमान कर कानूनों में संशोधन।
- वित्तीय विनियमों और नीतिगत ढाँचे में परिवर्तन।
विधेयक का महत्व
- कर प्रस्तावों को कानूनी मान्यता प्रदान करता है, जिससे राजस्व एकत्रण सुनिश्चित होता है।
- कर सरलीकरण के माध्यम से व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा देता है।
- लक्षित कर उपायों द्वारा निवेश और उपभोग को प्रोत्साहित करता है।
- भारत को राजकोषीय स्थिरता और विकास की दिशा में सुदृढ़ करता है।
यह विनियोग विधेयक से कैसे भिन्न है?
- विनियोग विधेयक संविधान के अनुच्छेद 114 के अंतर्गत प्रस्तुत किया जाता है ताकि भारत की संचित निधि से सरकारी व्यय हेतु धन निकासी को अधिकृत किया जा सके।
- यह केवल उन निधियों के विनियोग से संबंधित होता है जिन्हें लोकसभा द्वारा पहले ही अनुमोदित किया जा चुका है तथा अनुच्छेद 114(3) के अंतर्गत आरोपित व्यय।
- इसमें संशोधन की अनुमति नहीं होती, क्योंकि यह केवल पहले से अनुमोदित व्यय की स्वीकृति चाहता है।
- इसे अनुच्छेद 113 के अंतर्गत अनुदानों की माँग पारित होने के बाद प्रस्तुत किया जाता है।
- वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक दोनों को धन विधेयक के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
प्रमुख कर एवं वित्तीय विशेषताएँ
- प्रमुख क्षेत्रों को समर्थन:
- डिजिटल अवसंरचना और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण।
- समुद्री उत्पाद, चमड़ा उद्योग और महत्त्वपूर्ण खनिज।
- परमाणु ऊर्जा और सामरिक क्षेत्र।
- TCS में कमी: विदेशी यात्रा पैकेज और शिक्षा व चिकित्सा प्रयोजनों हेतु प्रेषण (LRS के अंतर्गत) पर स्रोत पर कर संग्रह (TCS) घटाकर 2% किया गया।
- शेयर बाज़ार कर: वायदा (Futures) पर प्रतिभूति लेन-देन कर (STT) 0.02% से बढ़ाकर 0.05% किया गया, जबकि विकल्प (Options) पर दर 0.15% कर दी गई।
- सीमा शुल्क छूट: 17 जीवनरक्षक कैंसर दवाओं पर मूल सीमा शुल्क से छूट दी गई।
- कॉरपोरेट बायबैक: सभी शेयर बायबैक को अब पूँजीगत लाभ के रूप में कर योग्य बनाया गया है; प्रवर्तकों पर अतिरिक्त बायबैक कर लगाया गया है।
- वित्त विधेयक 2026 के सिद्धांत:
- विश्वास-आधारित कर प्रशासन।
- सामान्य नागरिकों के जीवन की सुगमता में सुधार।
- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), किसानों और सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाना।
- भारत को वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में सुदृढ़ करना।
- व्यापार सुविधा और सीमा शुल्क सुधारों को निर्बाध बनाना।
प्रमुख आर्थिक शब्दावली
- स्रोत पर कर संग्रह (TCS): आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 206C के अनुसार, विक्रेता निर्दिष्ट वस्तुओं/सेवाओं की बिक्री पर खरीदार से कर एकत्रण करता है और इसे सरकार के पास जमा करता है।
- प्रतिभूति लेन-देन कर (STT): यह एक प्रत्यक्ष कर है जो भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर कारोबार की जाने वाली प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री पर लगाया जाता है। इसे 2004 में वित्त अधिनियम के माध्यम से लागू किया गया था। कर का संग्रह स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा किया जाता है और सरकार को जमा किया जाता है।
वित्त वर्ष 2026-27 के राजकोषीय अनुमान
- कुल व्यय: ₹53.47 लाख करोड़, जो विगत वित्त वर्ष की तुलना में 7.7% की वृद्धि दर्शाता है।
- कुल पूँजीगत व्यय: ₹12.2 लाख करोड़ प्रस्तावित।
- सकल कर राजस्व संग्रह: ₹44.04 लाख करोड़।
- सकल उधारी: ₹17.2 लाख करोड़।
- राजकोषीय घाटा: FY27 के लिए GDP का 4.3% अनुमानित, जो वर्तमान वित्त वर्ष के 4.4% से कम है।
स्रोत: AIR