केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था और शासन

संदर्भ

  • संसद ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पर चर्चा प्रारंभ की।

विधेयक की प्रमुख विशेषताएँ

  • उद्देश्य: अर्धसैनिक अधिकारियों की भर्ती, प्रतिनियुक्ति, पदोन्नति और अन्य सेवा शर्तों को विनियमित करना।
  • विधेयक पाँच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) — सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), और सशस्त्र सीमा बल (SSB) — में नेतृत्व पदों पर प्रतिनियुक्त आईपीएस अधिकारियों का प्रभुत्व बनाए रखेगा।
  • पद आरक्षण: विधेयक अतिरिक्त महानिदेशक के 67% पद और महानिरीक्षक के 50% पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव करता है।
    • विशेष डीजी और डीजी के पद केवल प्रतिनियुक्ति द्वारा भरे जाएँगे।
  • सरकार का तर्क है कि केंद्र-राज्य संबंध बनाए रखने और समन्वय सुनिश्चित करने के लिए आईपीएस अधिकारियों की आवश्यकता है।
  • यदि विधेयक पारित होता है, तो यह प्रभावी रूप से सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय को निरस्त कर देगा जिसमें CAPFs में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को क्रमिक रूप से कम करने का निर्देश दिया गया था।

पृष्ठभूमि

  • 2015 में CAPFs के ग्रुप A अधिकारियों ने न्यायालय का रुख किया और गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन (NFFU), कैडर समीक्षा, पुनर्गठन तथा भर्ती नियमों में बदलाव की माँग की ताकि आईपीएस प्रतिनियुक्ति समाप्त हो तथा वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (SAG) तक आंतरिक पदोन्नति संभव हो सके।
  • संजय प्रकाश एवं अन्य बनाम भारत संघ, 2025 मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि:
    • CAPFs के ग्रुप A अधिकारियों को सभी उद्देश्यों के लिए “संगठित सेवाएँ” माना जाए।
    • CAPFs में SAG पदों (महानिरीक्षक तक) पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को अधिकतम दो वर्षों के अंदर क्रमिक रूप से कम किया जाए।
    • छह माह के भीतर कैडर की समयबद्ध समीक्षा और सेवा नियमों का निर्माण किया जाए।
  • निर्णय का उद्देश्य: CAPF कैडर अधिकारियों के लिए निष्पक्ष कैरियर प्रगति सुनिश्चित करना और CAPFs में प्रतिनियुक्त आईपीएस अधिकारियों के दीर्घकालिक प्रभुत्व को कम करना।

CAPF की वर्तमान संगठनात्मक संरचना

  • CAPFs में सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल, सशस्त्र सीमा बल और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस शामिल हैं।
  • गृह मंत्रालय आईपीएस और CAPF अधिकारियों दोनों का कैडर नियंत्रक प्राधिकरण है।
    • केंद्र ने कहा है कि आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति बलों की परिचालन तत्परता बनाए रखने और केंद्र-राज्य समन्वय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
  • वर्तमान में CAPFs में उप महानिरीक्षक (DIG) के 20% पद और महानिरीक्षक (IG) के 50% पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं।

CAPFs में आईपीएस नियुक्तियों से संबंधित चिंताएँ

  • कैरियर प्रगति में ठहराव: वरिष्ठ पदों पर उच्च आरक्षण के कारण CAPF कैडर अधिकारियों के लिए पदोन्नति के अवसर सीमित हो जाते हैं।
    • औसतन, एक CAPF अधिकारी को कमांडेंट पद तक पहुँचने में 25 वर्ष लगते हैं, जबकि आदर्श रूप से यह 13 वर्षों में होना चाहिए।
  • संगठनात्मक अखंडता का उल्लंघन: आईपीएस अधिकारियों की निरंतर प्रतिनियुक्ति CAPFs की संस्थागत स्वायत्तता और उन्हें विशिष्ट बलों के रूप में पेशेवर बनाने की प्रक्रिया को बाधित करती है।
  • प्राकृतिक न्याय और समानता का उल्लंघन: अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (लोक रोजगार में अवसर की समानता) लागू होते हैं, क्योंकि CAPF कैडर अधिकारियों को उनके आईपीएस समकक्षों की तुलना में समान पदोन्नति अवसर नहीं मिलते।

निष्कर्ष

  • विधेयक की सफलता संतुलित क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी — अर्थात परिचालन दक्षता सुनिश्चित करते हुए कर्मियों के अधिकारों, मनोबल और कल्याण की रक्षा करना।
  • इस संदर्भ में सतत हितधारक परामर्श, पारदर्शिता और सुदृढ़ निगरानी तंत्र अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।

स्रोत: TH

 

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