भारत द्वारा क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों पर नियामक निगरानी सख्त 

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, GS3/ सुरक्षा

संदर्भ

  • वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) ने क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के लिए संशोधित धन शोधन निवारण (AML) और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने (CFT) के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी की नियामक स्थिति

  • क्रिप्टोकरेंसी को भारत में कानूनी मुद्रा के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है।
  • क्रिप्टो संपत्तियों से संबंधित लेन-देन आयकर अधिनियम के अंतर्गत कर योग्य हैं।
  • क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों को वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) सेवा प्रदाता के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
    • सभी VDA सेवा प्रदाता धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के अंतर्गत विनियमित हैं।
  • भारत में संचालित क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए FIU नियामक के रूप में कार्य करता है।

क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के लिए दिशा-निर्देश

  • पहचान सत्यापन: एक्सचेंजों को ग्राहकों से एक अतिरिक्त पहचान और पता संबंधी दस्तावेज़ (पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार का प्रमाण आदि) एकत्र करने का निर्देश दिया गया है।
    • मोबाइल नंबर और ईमेल को OTP के माध्यम से सत्यापित करना अनिवार्य है।
    • ग्राहक के बैंक खाते का सत्यापन ‘पैनी-ड्रॉप’ तंत्र से किया जाएगा ताकि खाते के स्वामित्व और परिचालन स्थिति की पुष्टि हो सके।
  • लाइवनेस डिटेक्शन: क्रिप्टो एक्सचेंजों को ऑनबोर्डिंग के समय उपयोगकर्ता की लाइव सेल्फी कैप्चर करनी होगी।
    • इसमें आँख झपकाना या सिर हिलाना जैसी तकनीक का उपयोग होगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति शारीरिक रूप से उपस्थित है और स्वयं खाता बना रहा है।
  • भू-स्थान (Geo-Location): एक्सचेंजों को ऑनबोर्डिंग स्थान का अक्षांश और देशांतर रिकॉर्ड करना होगा।
    • तारीख, समय-मुद्रा (timestamp) और IP पता भी दर्ज करना अनिवार्य है।
  • उच्च-जोखिम वाली क्रिप्टो गतिविधियों पर प्रतिबंध: दिशा-निर्देशइनिशियल कॉइन ऑफरिंग (ICO) और इनिशियल टोकन ऑफरिंग(ITOs) को सख्ती से हतोत्साहित करते हैं, क्योंकि इन्हें धन शोधन एवं आतंकवाद वित्तपोषण के उच्च जोखिम वाला माना जाता है।
    • गुमनामी बढ़ाने वाले क्रिप्टो टोकन से संबंधित लेन-देन की अनुमति नहीं होगी।
  • अभिलेख-रखरखाव: एक्सचेंजों को ग्राहक की पहचान और पता संबंधी विवरण सुरक्षित रखना होगा।
    • लेन-देन के अभिलेख कम से कम पाँच वर्षों तक संरक्षित किए जाने चाहिए।
क्रिप्टोकरेंसी क्या है?
– क्रिप्टोकरेंसी धन का एक डिजिटल रूप है जो सुरक्षा के लिए क्रिप्टोग्राफी का उपयोग करता है और केंद्रीय बैंकों के बजाय विकेंद्रीकृत ब्लॉकचेन नेटवर्क पर संचालित होता है।
प्रमुख विशेषताएँ:
डिजिटल और विकेंद्रीकृत: केवल ऑनलाइन उपस्थित और किसी एक प्राधिकरण द्वारा नियंत्रित नहीं।
क्रिप्टोग्राफी-आधारित सुरक्षा: स्वामित्व और लेन-देन की सुरक्षा हेतु एन्क्रिप्शन एवं पब्लिक–प्राइवेट कीज़ का उपयोग।
ब्लॉकचेन तकनीक: लेन-देन एक वितरित, छेड़छाड़-प्रतिरोधी सार्वजनिक लेज़र पर दर्ज होते हैं।
पीयर-टू-पीयर प्रणाली: उपयोगकर्ताओं के बीच सीधे मूल्य हस्तांतरण की अनुमति।
उदाहरण: बिटकॉइन, एथेरियम और ऑल्टकॉइन्स।

ब्लॉकचेन तकनीक
– ब्लॉकचेन तकनीक एक विकेंद्रीकृत, वितरित लेज़र प्रणाली है जो कई कंप्यूटरों पर लेन-देन दर्ज करती है, जिससे सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
– ब्लॉकचेन नेटवर्क लेन-देन को मान्य करने और नेटवर्क की अखंडता बनाए रखने के लिए सर्वसम्मति एल्गोरिद्म पर निर्भर करते हैं।
ये तंत्र सुनिश्चित करते हैं कि केवल वैध लेन-देन ही श्रृंखला में जोड़े जाएँ।

नए दिशा-निर्देशों का महत्व

  • संशोधित दिशा-निर्देश भारत के क्रिप्टोकरेंसी नियामक ढाँचे को वित्तीय कार्रवाई कार्य बल(FATF) मानकों के अनुरूप लाते हैं।
  • ये भारत की क्षमता को धन शोधन, आतंकवाद वित्तपोषण और प्रसार वित्तपोषण जोखिमों को रोकने में सुदृढ़ करते हैं।

आगे की राह

  • FIU, RBI, SEBI और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच अधिक अंतर-एजेंसी समन्वय आवश्यक है ताकि सीमा-पार क्रिप्टो जोखिमों का समाधान किया जा सके।
  • वास्तविक समय निगरानी और जोखिम आकलन में सुधार हेतु रेगटेक(RegTech) और सुपटेक(SupTech) का उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए।
  • प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायिक प्राधिकरणों की क्षमता निर्माण आवश्यक है ताकि क्रिप्टो-संबंधित अपराधों की प्रभावी जाँच एवं अभियोजन किया जा सके।

स्रोत: BL

 

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