हाल के वर्षों में, देखभाल कार्य के महत्त्व को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई है, फिर भी कई आर्थिक नीतियों में इसे कम आंका गया है और इसका कम मूल्यांकन किया गया है।
शहरीकरण, कृषि विस्तार एवं औद्योगिक गतिविधियों के कारण आर्द्रभूमि का क्षरण और हानि खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। नीति और विकास एजेंडे में आर्द्रभूमि संरक्षण को मुख्यधारा में लाना एक तत्काल आवश्यकता है।
हाल के वर्षों में, वैश्विक स्तर पर दायर पेटेंट आवेदनों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जिससे नीति निर्माताओं, शोधकर्त्ताओं और उद्योग जगत के नेताओं के बीच नवाचार एवं आर्थिक विकास पर संभावित प्रभाव के बारे में चिंताएँ उत्पन्न हो गई हैं।
निगरानी पूँजीवाद, जहाँ व्यक्तिगत डेटा को तकनीकी कंपनियों द्वारा मानव व्यवहार की भविष्यवाणी करने और उसे प्रभावित करने के लिए एकत्रित, विश्लेषित एवं मुद्रीकृत किया जाता है, उसमें गोपनीयता तथा स्वायत्तता को लेकर चिंताएँ हैं, और इसका राज्य की निगरानी से गहरा संबंध है।
वैश्विक श्रम बाजार एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन से गुजर रहा है, और यह स्पष्ट है कि 2030 में आवश्यक कौशल वर्तमान की आवश्यकता से काफी अलग होंगे। यह भारत के लिए एक चुनौती और अवसर दोनों प्रस्तुत करता है।
म्यांमार में हाल की राजनीतिक अस्थिरता तथा भारत में शरणार्थियों के आगमन, विशेषकर म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों में, के कारण पहले से ही कमजोर सीमा प्रबंधन एवं सुरक्षा ढाँचे पर दबाव पड़ा है।
भारत में डिजिटल कंटेंट की सेंसरशिप ने व्यापक स्तर पर विमर्श की स्थिति उत्पन्न कर दी है, विशेषकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, स्ट्रीमिंग सेवाओं और स्वतंत्र पत्रकारिता के उदय के साथ।
हाल के दिनों में, हमारी संवैधानिक न्यायालयों ने 'संवैधानिक नैतिकता' की बहुआयामी अवधारणा को व्याख्या करने के एक उपकरण के रूप में तथा कानूनों की संवैधानिक वैधता पर निर्णय देने के एक परीक्षण के रूप में अपनाया है।