भारत की अफ्रीका के साथ सहभागिता को रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से गहराना आवश्यक है, जो संपर्क, क्षमता-निर्माण और राजनयिक संबंधों के पुनर्जीवन पर बल देती हैं।
भारत का सर्वोच्च न्यायालय वर्तमान में एक याचिका की समीक्षा कर रहा है जिसमें पोक्सो अधिनियम, 2012 की लैंगिक-विशिष्ट व्याख्या को चुनौती दी गई है। यह मामला उस स्थिति से जुड़ा है जहाँ एक महिला पर एक नाबालिग लड़के के साथ भेदनात्मक यौन उत्पीड़न (penetrative sexual assault) का आरोप है।
भारत को एक परिवर्तनकारी बदलाव से गुजरना होगा — ऐसा बदलाव जो उसकी अर्थव्यवस्था के व्यापक विद्युतीकरण पर आधारित हो, ताकि वह 2070 तक अपने महत्वाकांक्षी नेट ज़ीरो लक्ष्य को प्राप्त कर सके।
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा रूस और चीन के साथ ‘समान आधार पर परमाणु परीक्षण’ की नई घोषणा ने परमाणु हथियार परीक्षण की वापसी का संकेत दिया है, जिससे दशकों से चली आ रही अंतरराष्ट्रीय संयम और वैश्विक हथियार नियंत्रण की गतिशीलता को चुनौती मिली है।
कैलिफ़ोर्निया के बाहर गूगल का सबसे बड़ा एआई डेटा सेंटर आंध्र प्रदेश में स्थापित किए जाने की हालिया घोषणा ने भारत को एक प्रतिस्पर्धी संघीय अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर किया है, जहाँ राज्य नीति, शासन और अवसंरचना लाभों के माध्यम से वैश्विक निवेश का सक्रिय समर्थन करते हैं।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र सरकार के बीच ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 को लेकर प्रशासन एवं सुधार पर चल रहा विवाद बार-बार चुनौती दिया गया है, क्योंकि इस पर न्यायिक स्वतंत्रता को कमजोर करने का आरोप है।
भारत के प्रधानमंत्री ने भूटान की यात्रा की ताकि भूटान के चौथे राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक (K4), जिन्हें स्नेहपूर्वक ‘बोधिसत्व राजा’ कहा जाता है, की 70वीं जयंती का सम्मान किया जा सके। यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और दोनों देशों के बीच गहरी एवं स्थायी मित्रता को उजागर करती है।
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के 30वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ (COP30) की शुरुआत ब्राज़ील के बेलेम में हुई। इसमें अमेरिका और चीन की अनुपस्थिति तथा भारत द्वारा निम्न-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने से कार्यवाही पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
सार्वभौमिक बुनियादी आय (UBI) का विचार अब एक व्यावहारिक नीतिगत आवश्यकता के रूप में उभर रहा है, क्योंकि भारत बढ़ती असमानता, तकनीकी व्यवधान और कल्याणकारी अक्षमताओं का सामना कर रहा है।
भारत को 2047 तक विकसित भारत बनने की आकांक्षा है। इसके लिए आर्थिक विकास और राष्ट्रीय प्रगति हेतु एक स्वच्छ, पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था की आवश्यकता है।