पाठ्यक्रम: GS2/राजनीति एवं शासन; सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
संदर्भ
- भारत की आगामी जनगणना 2027 आर्थिक योजना और प्रशासन के लिए एक महत्त्वपूर्ण आधारशिला है, जिसका उद्देश्य महत्त्वपूर्ण डेटा प्रदान करना है, जो मुद्रास्फीति नियंत्रण से लेकर शहरी विकास तक हर चीज़ को प्रभावित करता है।
भारत में जनगणना
- यह किसी क्षेत्र की जनसंख्या का सर्वेक्षण है, जिसमें आयु, लिंग और व्यवसाय सहित देश की जनसांख्यिकी से संबंधित जानकारी एकत्र की जाती है।
- यह भारत में सभी सर्वेक्षणों और नीति निर्माण के लिए सांख्यिकीय आधार के रूप में कार्य करता है।
- इसे आमतौर पर प्रत्येक दस वर्ष (दशकीय) में आयोजित किया जाता है, जिससे राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट किया जाता है।
इतिहास
- प्रथम दशकीय जनगणना: 1881 में WC प्लाउडेन (भारत के जनगणना आयुक्त) के अंतर्गत आयोजित।
- स्वतंत्र भारत की प्रथम जनगणना: 1951 में।
संवैधानिक और कानूनी प्रावधान
- अनुच्छेद 246 (सातवीं अनुसूची – संघ सूची): जनगणना केंद्र सरकार का विषय है।
- भारत के जनगणना अधिनियम, 1948 में इसके समय और आवधिकता (periodicity) का उल्लेख नहीं है।
- गृह मंत्रालय के अंतर्गत रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा जनगणना आयोजित की जाती है।
जनगणना 2027
- पहले 2021 में जनगणना आयोजित होनी थी, लेकिन कोविड महामारी के कारण इसे स्थगित करना पड़ा।
- अब जनगणना 2027 भारत की प्रथम डिजिटल जनगणना होगी और 1931 के बाद प्रथम बार इसमें विस्तृत जातिगत डेटा दर्ज किया जाएगा, जिसमें SCs और STs से आगे की श्रेणियाँ शामिल होंगी।
- लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन आगामी जनगणना के आधार पर किया जाना है।
- परिसीमन अधिनियम पारित करने की आवश्यकता है, जिससे परिसीमन आयोग का गठन किया जा सके।
- संविधान का अनुच्छेद 82 प्रत्येक जनगणना के बाद सीटों के पुन: समायोजन को अनिवार्य करता है।
जनगणना का महत्त्व
- सांख्यिकीय आधार: जनगणना आयु, लिंग, रोजगार, शिक्षा, प्रवासन और आर्थिक स्थिति से जुड़े विस्तृत डेटा एकत्र करती है, जिससे देश का व्यापक चित्रण प्राप्त होता है।
- मुद्रास्फीति नियंत्रण और मौद्रिक नीति:उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI), जो मुद्रास्फीति को ट्रैक करता है, जनगणना-आधारित उपभोग पैटर्न पर निर्भर करता है।
- पुराना जनगणना डेटा मुद्रास्फीति की गलत गणना का कारण बन सकता है, जिससे ब्याज दर और आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
- शहरी नियोजन, प्रवासन और बुनियादी ढाँचा विकास:
- जनगणना प्रवासन प्रवृत्तियों को स्पष्ट करती है और सरकारों को आवास, परिवहन, और रोजगार नीतियों की योजना बनाने में सहायता करती है।
- उदाहरण: यदि किसी गाँव में जल आपूर्ति पाइपलाइन नहीं है या विद्युत् की व्यवस्था खराब है, तो इस डेटा के आधार पर उसे ‘जल जीवन मिशन’ या ‘सौभाग्य योजना’ में प्राथमिकता दी जा सकती है।
- कल्याणकारी और सामाजिक कार्यक्रम:
- खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा सब्सिडी जैसी सरकारी योजनाएँ जनगणना डेटा पर निर्भर करती हैं, ताकि योग्य लाभार्थियों की पहचान की जा सके।
- जनगणना में देरी होने पर संसाधनों का गलत आवंटन और पात्र लोगों की अनदेखी हो सकती है।
- सटीक जनसंख्या डेटा सुनिश्चित करता है कि PM-KISAN, MGNREGS और ग्रामीण आवास योजनाएँ सही लाभार्थियों तक पहुँचें।
- रोजगार और श्रम बाजार प्रवृत्तियाँ:
- श्रम बल वितरण, बेरोजगारी दर और कौशल अंतर को समझने में जनगणना सहायता करती है, जिससे रोजगार सृजन और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की नीति निर्माण में सहायता मिलती है।
- राजनीतिक और आर्थिक प्रतिनिधित्व:
- जनगणना परिसीमन को प्रभावित करती है, जो जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर संसदीय सीटों के वितरण को निर्धारित करता है।
- इससे क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और आर्थिक संसाधनों के आवंटन पर प्रभाव पड़ता है।
- निजी क्षेत्र और निवेश निर्णय:
- व्यवसाय बाजार की माँग, उपभोक्ता व्यवहार और श्रमिक उपलब्धता का आकलन करने के लिए जनगणना डेटा पर निर्भर करते हैं, जिससे निवेश रणनीति और विस्तार योजनाएँ बनती हैं।
चुनौतियाँ और बाधाएँ
- विलंब या पुराना डेटा:
- अगली जनगणना में देरी डेटा की कमी पैदा कर रही है, जिससे शहरी प्रवासन, परिवार संरचना और आर्थिक बदलावों को सही तरीके से समझना कठिन हो रहा है।
- राजनीतिक प्रभाव और डेटा की विश्वसनीयता:
- जनगणना डेटा राजनीतिक रूप से प्रभावित हो सकता है, विशेषकर जाति या धर्म जैसे संवेदनशील विषयों पर।
- प्रश्नों की संरचना या चयनात्मक डेटा रिलीज से सार्वजनिक दृष्टिकोण और नीति प्राथमिकताओं पर प्रभाव पड़ सकता है।
- गिनती में कमी और गैर-जवाब:
- प्रवासी श्रमिक, बेघर लोग और हाशिए पर रहने वाले समुदाय अक्सर गिनती में छूट जाते हैं, जिससे असमान संसाधन आवंटन होता है।
- डेटा की गुणवत्ता और सटीकता:
- डेटा संग्रह, प्रोसेसिंग या स्वयं-घोषित जानकारी में त्रुटियों से जनगणना परिणामों की सटीकता प्रभावित हो सकती है।
- गोपनीयता संबंधी चिंताएँ:
- डिजिटल युग में लोग निजी जानकारी साझा करने से हिचकिचा सकते हैं, जिससे अधूरी या गलत प्रतिक्रियाएँ मिल सकती हैं और डेटा की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
- सूचना की अधिकता:
- बहुत अधिक डेटा कभी-कभी नीति निर्माताओं के लिए चुनौती बन सकता है, यदि यह अच्छे तरीके से संगठित न हो या विभिन्न विभागों में सामंजस्य न हो।
आगे की राह
- डिजिटल डेटा संग्रह और उन्नत तकनीक के साथ, जनगणना पिछले संस्करणों की तुलना में अधिक कुशल और सटीक होने का लक्ष्य रखती है।
- यदि सही ढंग से आयोजित की जाए, तो यह अगले दशक में भारत की आर्थिक नीतियों, मुद्रास्फीति नियंत्रण और शहरी विकास को आकार देने के लिए महत्त्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करेगी।
- जनगणना 2027 की सफलता यह निर्धारित करेगी कि भारत बदलती जनसंख्या संरचना और आर्थिक चुनौतियों के अनुरूप कैसे अनुकूलित होता है।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] चर्चा कीजिए कि आगामी जनगणना भारत की आर्थिक योजना और विकास को किस प्रकार प्रभावित कर सकती है, विशेष रूप से बदलते जनसांख्यिकीय रुझानों और तकनीकी प्रगति के संदर्भ में। |
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