पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- जैसा कि भारत 2047 तक स्वयं को एक विकसित राष्ट्र (विकसित भारत) के रूप में देखता है, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की भूमिका आधारभूत एवं परिवर्तनकारी दोनों रूपों में उभरकर सामने आई है, जो रोजगार के इंजन, नवाचार के महत्वपूर्ण चालक, निर्यात तथा समावेशी विकास के साधन के रूप में कार्य करते हैं।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) के बारे में
- MSMEs औद्योगिकीकरण और समावेशी विकास की रीढ़ हैं, जिन्हें वैश्विक स्तर पर नवाचार, रोजगार सृजन एवं न्यायसंगत विकास के इंजन के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- MSMEs घरेलू और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में आवश्यक नोड्स के रूप में कार्य करते हैं, जो आपूर्तिकर्ताओं, वितरकों एवं सेवा प्रदाताओं को जोड़ते हैं, साथ ही तकनीकी नवाचार और हरित विकास को आगे बढ़ाते हैं।
- विश्व बैंक के अनुसार, MSMEs लगभग 90% औपचारिक व्यवसायों और लगभग 50% वैश्विक रोजगार का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो लचीली एवं विविधीकृत अर्थव्यवस्थाओं को आकार देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
भारतीय MSMEs परिदृश्य
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MoMSME) के अनुसार, MSMEs को उनके संयंत्र और मशीनरी या उपकरणों में निवेश एवं वार्षिक कारोबार के आधार पर वर्गीकृत किया गया है:
- सूक्ष्म उद्यम: निवेश ≤ ₹1 करोड़ और कारोबार ≤ ₹5 करोड़
- लघु उद्यम: निवेश ≤ ₹10 करोड़ और कारोबार ≤ ₹50 करोड़
- मध्यम उद्यम: निवेश ≤ ₹50 करोड़ और कारोबार ≤ ₹250 करोड़
- यह वर्गीकरण 2020 में एक अधिक समावेशी और विकासोन्मुखी ढांचे को प्रदान करने के लिए संशोधित किया गया था।
- भारत का MSMEs क्षेत्र विश्व के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है, जिसमें 74 मिलियन से अधिक पंजीकृत उद्यम शामिल हैं, जिनमें 29 मिलियन महिला-नेतृत्व वाले व्यवसाय हैं, और यह 320 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
- MSMEs भारत के जीडीपी (लगभग 30%), विनिर्माण उत्पादन (लगभग 45%) और निर्यात (लगभग 40%) में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, जिससे राष्ट्र एक वैश्विक विनिर्माण एवं नवाचार केंद्र के रूप में उभर रहा है।
MSMEs के सामने प्रमुख चुनौतियाँ
- ऋण तक पहुँच: SIDBI अध्ययन में पाया गया कि MSMEs ‘समय पर और पर्याप्त’ ऋण के लिए संघर्ष करते हैं, विशेषकर सूक्ष्म और महिला-नेतृत्व वाले उद्यम।
- कई MSMEs कोलैटरल और क्रेडिट इतिहास की कमी के कारण अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर रहते हैं।
- कोयंबटूर जिला लघु उद्योग संघ के अनुसार, इस क्षेत्र को ₹30 लाख करोड़ की वित्तपोषण कमी का सामना करना पड़ता है।
- नियामक और अनुपालन भार: आर्थिक सर्वेक्षण 2025 ने बल दिया कि नियामक अनुपालन आवश्यकताएँ औपचारिकता को बाधित करती हैं, श्रम उत्पादकता को कम करती हैं तथा नवाचार को रोकती हैं।
- जटिल जीएसटी मानदंड और खरीदारों से विलंबित भुगतान कार्यशील पूंजी को एवं अधिक तनावग्रस्त करते हैं।
- कम औपचारिकता और डिजिटल अपनाना: MSMEs का एक बड़ा हिस्सा अपंजीकृत या असंविधिकृत रहता है, जिससे वे सरकारी योजनाओं से बाहर हो जाते हैं।
- डिजिटल तत्परता में सुधार हो रहा है, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में, लेकिन ग्रामीण MSMEs अभी भी बुनियादी ढाँचे और कौशल अंतराल के कारण पीछे हैं।
- बाज़ार दृश्यता और ब्रांडिंग: MSMEs अक्सर ब्रांडिंग, विपणन और उपभोक्ता पहुँच क्षमताओं की कमी का सामना करते हैं, जिससे उनकी घरेलू एवं वैश्विक बाज़ारों में प्रतिस्पर्धात्मकता सीमित हो जाती है।
- कमजोर बाज़ार खुफिया और ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों तक सीमित पहुँच उन्हें विकास के अवसरों से अलग करती है।
- श्रम और कौशल की कमी: MSMEs को जनशक्ति की कमी का सामना करना पड़ता है, विशेषकर कुशल श्रम की, जो उत्पादकता और विस्तार क्षमता को प्रभावित करता है।
- नीति जागरूकता और योजना उपयोग: सिर्फ़ लगभग 10% मीडियम एंटरप्राइज़ ने 18 केंद्र सरकार की योजनाओं में से किसी का भी लाभ उठाया है, जो पॉलिसी और उसे लागू करने के बीच सामंजस्य की कमी को दिखाता है।
- कई MSMEs PMEGP, CGT-MSE और RAMP जैसी पहलों से परिचित नहीं हैं।
नीति प्रोत्साहन: विकास इंजन को सशक्त बनाना
- प्रमुख MSMEs योजनाएँ:
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP): महत्वाकांक्षी उद्यमियों का समर्थन करके गैर-कृषि सूक्ष्म उद्यमों के निर्माण को सुविधाजनक बनाता है।
- पीएम विश्वकर्मा योजना: पारंपरिक कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आधुनिक उपकरणों की पहुँच के माध्यम से सशक्त बनाता है।
- RAMP (MSME प्रदर्शन को बढ़ाना और उसमें तीव्रता लाना): बाज़ार पहुँच, नवाचार और तकनीकी अपनाने को बढ़ाता है, साथ ही हरित पहलों एवं महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है।
- वित्तीय अंतराल को समाप्त करना और उद्यमियों को सशक्त बनाना:
- CGTMSE (क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज): एमएसई को कोलैटरल-फ्री क्रेडिट गारंटी प्रदान करता है।
- आत्मनिर्भर भारत फंड: उच्च विकास क्षमता वाले MSMEs में इक्विटी निवेश करता है।
- स्टैंड-अप इंडिया योजना: महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के उद्यमियों को नए उद्यम स्थापित करने के लिए ₹1 करोड़ तक का ऋण प्रदान करता है।
- औपचारिकता, डिजिटलीकरण और वैश्विक एकीकरण:
- उद्यम पंजीकरण और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म के माध्यम से 70 मिलियन से अधिक MSMEs का औपचारिककरण वित्तीय समावेशन एवं प्राथमिकता-क्षेत्र ऋण तक पहुँच का विस्तार करता है।
- यह MSMEs को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में प्रभावी ढंग से भाग लेने में सक्षम बनाता है।
- प्रौद्योगिकी और स्थिरता: ZED प्रमाणन, MSE ग्रीन इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंसिंग फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (GIFT), और SPICE जैसी पहलें हरित विनिर्माण, परिपत्र अर्थव्यवस्था प्रथाओं एवं तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा देती हैं।
- डिजिटल परिवर्तन: उद्यम, GeM और TReDS जैसे प्लेटफॉर्म पंजीकरण, खरीद एवं भुगतान को डिजिटाइज कर रहे हैं, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ रही है।
- कौशल विकास और क्लस्टर-आधारित विकास: भारत का क्लस्टर विकास कार्यक्रम उत्पादकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढाँचे एवं सामान्य सुविधा केंद्रों का समर्थन करता है।
- उन्नत प्रशिक्षण संस्थानों और उद्यमिता कौशल विकास कार्यक्रम (ESDP) के माध्यम से भारत मानव पूंजी का निर्माण कर रहा है।
- वैश्विक साझेदारी और भविष्य की दृष्टि: MSMEs को ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) और उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं पर सरकार के फोकस के साथ वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत किया जा रहा है।
- फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, इंजीनियरिंग सामान और आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारत के निर्यात उछाल में MSMEs अग्रणी हैं।
- भारत का बढ़ता हुआ MoUs और मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का नेटवर्क MSMEs की प्रतिस्पर्धात्मकता एवं वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकरण को मजबूत करता है।
- प्रौद्योगिकी केंद्र और सहकारी ढाँचे लचीलापन, नवाचार एवं सतत विकास को बढ़ावा देते हैं, जो 2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता के लिए केंद्रीय हैं।
निष्कर्ष
- भारत का MSMEs क्षेत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के सिद्धांत द्वारा निर्देशित समावेशी और परिवर्तनकारी आर्थिक नीति का प्रमाण है तथा औपचारिकता, डिजिटल सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन एवं लैंगिक-उत्तरदायी उद्यमिता के माध्यम से भारत को 2047 तक विकसित भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर अग्रसर करता रहता है।
- MSMEs क्षेत्र नवाचार, स्थिरता और सहयोग को प्रोत्साहित करके भारत की यात्रा को एक अधिक लचीली, न्यायसंगत एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने वाला आधारस्तंभ बना हुआ है।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए, जो भारत को 2047 तक विकसित भारत की आर्थिक रूपांतरण यात्रा में आकार दे रहे हैं। इसमें प्रमुख चुनौतियों को उजागर कीजिए तथा उनके प्रभाव को बढ़ाने के लिए आवश्यक नीतिगत उपायों पर प्रकाश डालिए। |