कृत्रिम बुद्धिमत्ता और लैंगिक सशक्तिकरण पर केसबुक

पाठ्यक्रम: GS1/महिला सशक्तिकरण; GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और लैंगिक सशक्तिकरण पर केसबुक का शुभारंभ इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में किया गया।

परिचय

  • विकसित किया गया द्वारा: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत इंडियाएआई मिशन द्वारा, यूएन विमेन  के सहयोग से तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MoWCD) के समर्थन से।
  • यह केसबुक ग्लोबल साउथ से 23 वास्तविक AI समाधानों को एक साथ प्रस्तुत करता है, जो लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण पर मापनीय प्रभाव प्रदर्शित करते हैं।
  • प्रमुख क्षेत्र जिनमें समाधान शामिल हैं:
    • स्वास्थ्य सेवा, जिसमें मासिक धर्म स्वास्थ्य भी सम्मिलित है।
    • आर्थिक सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन।
    • डिजिटल सुरक्षा और प्रौद्योगिकी-सुविधायुक्त लैंगिक-आधारित हिंसा की रोकथाम।
    • जलवायु लचीलापन और सतत कृषि।
    • न्याय तक पहुँच और कानूनी सेवाएँ।
    • शिक्षा और कौशल विकास।

प्रमुख पहलें

  • NyayaSakhi-SWATI: भारत का प्रथम बड़ा भाषा मॉडल और पुनर्प्राप्ति-संवर्धित पीढ़ी आधारित निर्णय-सहायक तंत्र, जो घरेलू हिंसा पीड़ितों के लिए बनाया गया है।
    • यह संभावित वैधानिक राहतों और अनुमानित मामले की अवधि का आकलन प्रदान करता है, जिससे सुरक्षित, सूचित एवं वित्तीय रूप से यथार्थवादी निर्णय लिए जा सकें।
    • यह पीड़ितों को मामला दर्ज करने से पहले संभावित कानूनी परिणामों को समझने में सहायता करता है।
    • वर्तमान में महाराष्ट्र में लागू, विशेष रूप से निम्न-आय और हाशिए पर रहने वाली महिलाओं की सेवा करता है।
  • HELPSTiR: एक AI-संचालित प्लेटफ़ॉर्म जो नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं को असुरक्षित महिलाओं और बच्चों की ओर से हाइपरलोकल सहायता अनुरोध दर्ज करने एवं उन्हें स्वचालित रूप से निकटवर्ती NGOs, आश्रयों, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं तथा कल्याण संगठनों से जोड़ने में सक्षम बनाता है।
    • डिजिटल पहुँच बाधाओं को हटाकर यह प्रणाली लैंगिक-संवेदनशील लाभ वितरण को तेज़ करती है।
    • वर्तमान में दिल्ली में पायलट चरण में लागू है, और भविष्य में टियर 1, टियर 2 और टियर 3 शहरों में विस्तार की संभावना है।
  • YASHODA AI: एक मानव-केंद्रित, मिश्रित AI समाधान जो सुलभ AI उपकरणों को प्रत्यक्ष शिक्षण के साथ जोड़ता है, ताकि महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा और AI-सक्षम जोखिमों की समझ को बढ़ाया जा सके।
    • यह मुख्यतः एक शिक्षण और निर्णय-सहायक तंत्र के रूप में कार्य करता है, जिसका उद्देश्य जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ाना है, न कि निर्णय-निर्धारण या प्रवर्तन को स्वचालित करना।
    • पायलट विकास के बाद, 12 भारतीय राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के 29 शहरों में 5,500 महिलाओं को YASHODA AI द्वारा सेवा प्रदान की गई।

ऐसी पहलों की आवश्यकता

  • लैंगिक डिजिटल विभाजन का समापन: महिलाओं को डिजिटल पहुँच, कौशल और ऑनलाइन सुरक्षा में कम अवसर मिलते हैं। YASHODA AI जैसे उपकरण डिजिटल साक्षरता एवं साइबर-जोखिम जागरूकता की खाई को भरते हैं।
  • न्याय और कल्याण तक पहुँच में सुधार: घरेलू हिंसा पीड़ित और असुरक्षित महिलाएँ प्रायः कानूनी स्पष्टता और सेवाओं तक पहुँच से वंचित रहती हैं। NyayaSakhi–SWATI और HELPSTiR जैसे उपकरण सूचना विषमता एवं अंतिम स्तर पर बहिष्करण को कम करते हैं।
  • एल्गोरिथ्मिक पक्षपात का समाधान: AI प्रणालियाँ लैंगिक पक्षपात उत्पन्न कर सकती हैं। निष्पक्षता और समावेशन सुनिश्चित करने हेतु लैंगिक-संवेदनशील डिज़ाइन और पक्षपात ऑडिट आवश्यक हैं।
  • सार्वजनिक सेवा वितरण को सुदृढ़ करना: AI लक्षित स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और कल्याण हस्तक्षेपों को सक्षम बनाता है, विशेषकर संसाधन-सीमित परिस्थितियों में।

महत्त्व

  • महिला-नेतृत्व वाले विकास का क्रियान्वयन: भारत की विकास दृष्टि के अनुरूप महिलाओं को AI निर्माता, नेता और लाभार्थी के रूप में स्थापित करता है।
  • नैतिक AI में ग्लोबल साउथ नेतृत्व: MeitY और इंडियाएआई मिशन द्वारा संचालित पहलों के माध्यम से भारत जिम्मेदार एवं विस्तार योग्य AI मॉडलों का प्रदर्शन करता है।
  • SDG 5 (लैंगिक समानता) को आगे बढ़ाना: नीति-आधारित वक्तव्यों से आगे बढ़कर न्याय, स्वास्थ्य, वित्त और डिजिटल सुरक्षा में मापनीय प्रभाव उत्पन्न करता है।
  • विस्तार योग्य और पुनरुत्पादक शासन ढाँचे: ऐसे परीक्षण किए गए परिनियोजन मॉडल प्रदान करता है जिन्हें नीति-निर्माता विभिन्न क्षेत्रों और राज्यों में दोहरा सकते हैं।
  • AI पारिस्थितिकी तंत्र में नैतिकता का समावेश: यह प्रदर्शित करता है कि समावेशन, पारदर्शिता और मानवीय पर्यवेक्षण नवाचार एवं विस्तार के साथ सह-अस्तित्व में रह सकते हैं।

स्रोत: PIB

 

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