प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (PM-VGSY)
पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन
संदर्भ
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देशभर में जमीनी स्तर पर शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (PM-VGSY) को मंजूरी दी।
PM-VGSY के बारे में
- प्रकार: केंद्र प्रायोजित योजना।
- मंत्रालय: पंचायती राज मंत्रालय।
- कार्यान्वयन अवधि: इस योजना को सोलहवें वित्त आयोग की अवधि के अनुरूप वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक लागू किया जाएगा। इसके लिए कुल 7,395.55 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है।
- कवरेज: राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के उन्नत संस्करण के रूप में यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल करेगी। इसमें उन क्षेत्रों की पारंपरिक ग्रामीण स्थानीय शासन संस्थाएँ भी शामिल होंगी, जहाँ संविधान के भाग IX के अंतर्गत पंचायतें अस्तित्व में नहीं हैं।
- लाभार्थी: 2.55 लाख से अधिक पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों के लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी तथा अन्य हितधारक।

स्रोत: TH
खाद्य पदार्थों में अवैध रंगों का उपयोग
पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य/शासन
संदर्भ
- उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने खाद्य पदार्थों में प्रतिबंधित औद्योगिक रंगों के उपयोग को रोकने के लिए रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं हेतु दिशानिर्देश जारी किए हैं।
खाद्य रंग क्या हैं?
- खाद्य रंग ऐसे पदार्थ हैं, जिन्हें खाद्य पदार्थों का रंग अधिक चमकीला, आकर्षक या एकसमान बनाने के लिए मिलाया जाता है। ये दो प्रकार के होते हैं:
- प्राकृतिक: पौधों और खनिजों से प्राप्त होते हैं, जैसे चुकंदर, हल्दी और लाल शिमला मिर्च का अर्क।
- कृत्रिम: प्रयोगशालाओं में निर्मित योजक पदार्थ, जिनका उपयोग केवल कुछ निर्धारित खाद्य श्रेणियों में और कड़ी सीमाओं के अंदर ही अनुमत है।
- प्रतिबंधित औद्योगिक रंग (अवैध मिलावटकारी पदार्थ): रोडामाइन-बी, मेटानिल येलो, मैलाकाइट ग्रीन, सूडान रंग (I–IV), बटर येलो, ऑरामाइन और ऑरेंज-II।
- प्रतिबंधित रंगों का उपयोग वस्त्र, चमड़ा या कागज उद्योग में किया जाना चाहिए, न कि जलेबी या चटनी जैसे खाद्य पदार्थों में।
- अनुमत कृत्रिम रंग (निर्धारित सीमाओं के भीतर): टार्ट्राजीन, सनसेट येलो FCF, कार्मोइसिन, पोंसो 4R, एरिथ्रोसिन, ब्रिलियंट ब्लू FCF, फास्ट ग्रीन FCF और इंडिगो कारमाइन।
प्रमुख दिशानिर्देश
- प्रतिबंधित रंग: खाद्य पदार्थों में गैर-अनुमत औद्योगिक रंगों का उपयोग नहीं किया जा सकता।
- अनुमत कृत्रिम रंग: खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य उत्पाद मानक एवं खाद्य योजक) विनियम, 2011 के अंतर्गत कुछ निर्दिष्ट मिठाइयों एवं मिष्ठान्नों, केक, पेस्ट्री, बिस्कुट, आइसिंग, कुछ दुग्ध उत्पादों, प्रसंस्कृत फलों, पेय पदार्थों तथा नमकीन खाद्य पदार्थों में निर्धारित कृत्रिम रंगों के उपयोग की अनुमति है।
- सटीक माप: खाद्य कारोबारियों को चम्मच या चुटकी से रंग की मात्रा का अनुमान लगाने के बजाय उपयुक्त डिजिटल तौल मशीनों का उपयोग करना होगा।
- अभिलेखों का रखरखाव: कारोबारियों को अधिकृत स्रोतों से रंग खरीदने होंगे, उनके लेबल एवं आपूर्तिकर्ताओं के विवरण की पुष्टि करनी होगी तथा निरीक्षण के लिए खरीद की रसीदें और बैच नंबर सुरक्षित रखने होंगे।
कानूनी ढाँचा
- खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006: यह प्रमुख कानून है, जिसके अंतर्गत मिलावटी खाद्य पदार्थों के निर्माण, बिक्री या वितरण पर दंड का प्रावधान है।
- खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य उत्पाद मानक एवं खाद्य योजक) विनियम, 2011: इसमें विभिन्न खाद्य श्रेणियों में अनुमत रंगों की सूची दी गई है, अच्छी विनिर्माण प्रथाओं का निर्धारण किया गया है तथा सामान्यतः रंगों के उपयोग की अधिकतम सीमा 100 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई है। कुछ डिब्बाबंद फलों के लिए यह सीमा 200 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक है।
स्रोत: IE
लवणीय दलदल (Salt Marshes)
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
संदर्भ
- गुजरात भारत के सबसे बड़े तटीय लवणीय दलदलों का क्षेत्र है। इसके अतिरिक्त तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में भी इनके छोटे क्षेत्र पाए जाते हैं।
लवणीय दलदल
- लवणीय दलदल तटीय आर्द्रभूमियाँ हैं, जो ज्वार-भाटा के कारण आने वाले लवणीय जल से जलमग्न होती हैं और फिर जलमुक्त हो जाती हैं।
- इन क्षेत्रों की भूमि दलदली होती है, क्योंकि यहाँ की मृदा में अत्यंत पंक और पीट पाया जा सकता है।
- पीट अपघटित पादप पदार्थों से बनता है, जिसकी मोटाई प्रायः कई फीट तक हो सकती है।
- ये संरक्षित तटरेखाओं, नदीमुखों, खाड़ियों और ज्वारीय समतल क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
- निर्माण: इनका विकास तब होता है, जब उथले तटीय क्षेत्रों में तलछट जमा होती है और वहाँ लवण-सहिष्णु वनस्पतियों को पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ मिलती हैं।
पारिस्थितिक महत्त्व
- तटीय संरक्षण: लवणीय दलदलों की वनस्पतियाँ लहरों की ऊर्जा को कम करती हैं, तलछट को रोकती हैं तथा तटीय कटाव और बाढ़ को रोकने में सहायता करती हैं।
- जैव विविधता संरक्षण: ये मछलियों, क्रस्टेशियाई जीवों, मोलस्क तथा प्रवासी पक्षियों के लिए भोजन, प्रजनन और शिशु-विकास संबंधी आवास उपलब्ध कराते हैं।
- नीली कार्बन का अवशोषण एवं भंडारण: लवणीय दलदल पौधों की वृद्धि के माध्यम से वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और जल से संतृप्त मृदा में कार्बन का भंडारण करते हैं। ऐसी मृदा में अपघटन की प्रक्रिया प्रायः धीमी होती है।
- जल शुद्धीकरण: ये तलछट को रोकते हैं तथा तटीय जल में पहुँचने से पहले अपवाह जल से अतिरिक्त पोषक तत्त्वों और कुछ प्रदूषकों को हटाने में सहायता करते हैं।
स्रोत: TH
K9 वज्र
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
समाचारों में
- रक्षा मंत्रालय ने 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत पर 300 से अधिक अतिरिक्त K9 वज्र-T स्वचालित तोपों की खरीद के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है।
K9 वज्र क्या है?
- K9 वज्र-T स्वचालित तोप दक्षिण कोरिया की K9 थंडर तोप का भारतीय संस्करण है।
- यह 155 मिमी, 52 कैलिबर की ट्रैक-आधारित स्वचालित तोप है। इसका निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अंतर्गत गुजरात के हजीरा में लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा दक्षिण कोरिया की साझेदार कंपनी हनव्हा एयरोस्पेस के सहयोग से किया जाता है।
- होवित्जर एक प्रकार की तोप है, जो विस्फोटक गोले लंबी दूरी तक प्रक्षेपित करती है। यह ऊँचे कोण से भी गोले प्रक्षेपित कर सकती है, जिससे बाधाओं के पीछे स्थित लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सकता है।
- इसमें तोप को बख्तरबंद, ट्रैक-युक्त चेसिस पर लगाया जाता है।
- यह तोप को तोपखाना सैन्य टुकड़ियों के साथ आगे बढ़ने, शत्रु के ठिकानों पर गोले दागने तथा जवाबी हमले की चपेट में आने की आशंका कम करने के लिए शीघ्रता से अपना स्थान बदलने में सहायता करती है।
विशिष्टताएँ
- इस प्रणाली की बताई गई मारक क्षमता लगभग 40 किलोमीटर है, जिसे कुछ विशेष प्रकार के गोला-बारूद के उपयोग से लगभग 50 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है।

- यह सड़कों पर अधिकतम 67 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल सकती है तथा इसमें पाँच सदस्यों का चालक दल तैनात रहता है।
- यह 15 सेकंड से भी कम समय में तीन गोले दाग सकती है।
- इसका पूरी तरह वेल्ड किया गया इस्पात का ढाँचा चालक दल को गोले के टुकड़ों, बारूदी सुरंगों और छोटे हथियारों की गोलीबारी से सुरक्षा प्रदान करता है।
- यह ब्रेक-टॉर्किंग तकनीक का उपयोग करके अपने ही स्थान पर घूम सकती है, जिससे इसे सीमित स्थानों में भी आसानी से संचालित किया जा सकता है।
स्रोत: BS
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संक्षिप्त समाचार 29-10-2026