खेलो इंडिया खेल सामग्री विनिर्माण योजना

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ 

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेलो इंडिया खेल सामग्री विनिर्माण योजना को स्वीकृति प्रदान की है।

खेलो इंडिया खेल सामग्री विनिर्माण योजना के बारे में

  • उद्देश्य : निवेश, विनिर्माण, नवाचार एवं निर्यात को प्रोत्साहित करना तथा वैश्विक खेल सामग्री क्षेत्र में भारत की स्थिति को सुदृढ़ बनाना।
  • समयावधि : वर्ष 2026 से 2033-34 तक।
  • पृष्ठभूमि: इस योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी। इसका उद्देश्य भारत के खेल सामग्री विनिर्माण क्षेत्र को सुदृढ़ बनाना है।
खेलो इंडिया खेल सामग्री विनिर्माण योजना के बारे में

खेल क्षेत्र में वैश्विक बाजार के अवसर

  • वैश्विक खेल सामग्री बाजार में खेल परिधान, जूते, उपकरण एवं सहायक सामग्री शामिल हैं। वर्ष 2024 में इसका अनुमानित मूल्य लगभग 700 अरब अमेरिकी डॉलर था तथा वर्ष 2036 तक इसके 1 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।
  • इस क्षेत्र में केवल खेल उपकरणों का बाजार लगभग 140 अरब अमेरिकी डॉलर का है। वर्ष 2036 तक इसकी वैश्विक मांग लगभग 283 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की संभावना है।
खेल क्षेत्र में वैश्विक बाजार के अवसर

खेल उपकरण विनिर्माण में भारत की स्थिति

  • घरेलू बाजार: भारत का घरेलू खेल सामग्री बाजार लगभग 2.5 अरब अमेरिकी डॉलर का अनुमानित है, जिसमें खेल उपकरणों का योगदान लगभग 0.5 अरब अमेरिकी डॉलर है। यह घरेलू उत्पादन एवं निर्यात दोनों क्षेत्रों में विस्तार की पर्याप्त संभावनाओं को दर्शाता है।
  • निर्यात में भारत की हिस्सेदारी:  भारत वर्तमान में प्रतिवर्ष लगभग 275 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के खेल उपकरणों का निर्यात करता है, जो वैश्विक निर्यात बाजार का लगभग 0.5 प्रतिशत है।
खेल उपकरण विनिर्माण में भारत की स्थिति
  • प्रमुख विनिर्माण केंद्र: भारत में खेल सामग्री का विनिर्माण मुख्यतः जालंधर (पंजाब) एवं मेरठ (उत्तर प्रदेश) जैसे स्थापित औद्योगिक समूहों में केंद्रित है।
    • इन केंद्रों को निर्यातकों, घरेलू विनिर्माण इकाइयों तथा हजारों सूक्ष्म उद्यमों के नेटवर्क का समर्थन प्राप्त है।
  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों पर आधारित क्षेत्र: यह क्षेत्र मुख्यतः सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर आधारित है। लगभग 90 प्रतिशत उत्पादन लघु एवं सूक्ष्म उद्यमों द्वारा किया जाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की उपस्थिति: भारत में क्रिकेट के बल्ले, सुरक्षा उपकरण, वायु से भरी जाने वाली गेंदें तथा व्यायामशाला एवं एथलेटिक प्रशिक्षण उपकरणों का विनिर्माण किया जाता है।
    • यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका एवं ऑस्ट्रेलिया को मिलाकर भारत के कुल खेल उपकरण निर्यात का आधे से अधिक हिस्सा प्राप्त होता है।
  • दीर्घकालिक विकास की व्यापक संभावनाएँ: वर्ष 2036 तक भारत का खेल उपकरण निर्यात लगभग 8.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है।
    • इससे लगभग 54 लाख अतिरिक्त प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
  • प्रमुख खेल आयोजनों का दशक: आगामी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन खेल उपकरणों की मांग बढ़ाने के व्यापक अवसर प्रदान करेंगे। इनमें शामिल हैं—
    • लॉस एंजिल्स ओलंपिक खेल, 2028।
    • अहमदाबाद में राष्ट्रमंडल खेल, 2030।
    • ब्रिस्बेन ओलंपिक खेल, 2032।
    • वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भारत की प्रस्तावित दावेदारी।
    • ये आयोजन आगामी दशक में खेल उपकरणों की मांग बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करने वाली प्रमुख चुनौतियाँ

  • कच्चे माल पर उच्च सीमा शुल्क: कार्बन फाइबर, EVA फोम एवं पॉलीयूरेथेन जैसी महत्त्वपूर्ण कच्ची सामग्रियों पर उच्च सीमा शुल्क के कारण उत्पादन लागत बढ़ जाती है।
  • उच्च प्रमाणन लागत: अंतरराष्ट्रीय खेल मानकों के अनुरूप उत्पादों को प्रमाणित कराने की लागत अधिक है।
  • परिवहन एवं आपूर्ति शृंखला संबंधी अक्षमताएँ: परिवहन एवं आपूर्ति शृंखला की कमियों के कारण उत्पादन लागत और निर्यात व्यय में वृद्धि होती है।
  • उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकी तक सीमित पहुँच: भारतीय विनिर्माताओं की आधुनिक एवं उन्नत विनिर्माण तकनीकों तक पहुँच सीमित है।
  • वैश्विक खेल ब्रांडों के साथ कमजोर संबंध: भारतीय विनिर्माताओं का वैश्विक खेल ब्रांडों तथा उनकी खरीद एवं आपूर्ति प्रणालियों के साथ पर्याप्त जुड़ाव नहीं है।
  • वैश्विक पहचान एवं ब्रांड निर्माण का अभाव: अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय खेल उपकरणों की दृश्यता, पहचान एवं ब्रांड निर्माण सीमित है।

सरकारी पहलें 

  • भाव्या (BHAVYA): भारत औद्योगिक विकास योजना के अंतर्गत 100 ऐसी औद्योगिक पार्कों के विकास का प्रावधान किया गया है, जहाँ उद्योगों को उत्पादन प्रारंभ करने के लिए आवश्यक सुविधाएँ पहले से उपलब्ध होंगी।
    • पहले से निर्मित कारखाना भवन, परीक्षण प्रयोगशालाएँ एवं भंडारण सुविधाएँ विनिर्माताओं को आवश्यक आधारभूत संरचना उपलब्ध कराएँगी।
  • राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम लिमिटेड (NICDC): यह निगम विनिर्माताओं के लिए भूमि, सड़क, विद्युत, जल एवं परिवहन संपर्क सुविधाओं से युक्त औद्योगिक शहरों के विकास में सहायता करता है।
    • इसके औद्योगिक गलियारा कार्यक्रम के अंतर्गत 13 राज्यों में 20 औद्योगिक स्मार्ट शहर विकसित किए जा रहे हैं।
    • सितंबर 2026 तक इनमें से चार औद्योगिक स्मार्ट शहरों का विकास पूरा हो चुका है।
  • अनुसंधान एवं नवाचार: अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों एवं उद्योगों के बीच अनुसंधान तथा सहयोग को प्रोत्साहित करता है।
  • खेलो इंडिया एवं फिट इंडिया: 
    • खेलो इंडिया: खेलों में भागीदारी, प्रतिभा विकास, प्रशिक्षण एवं खेल संबंधी आधारभूत संरचना को प्रोत्साहित करता है।
    • फिट इंडिया: शारीरिक स्वास्थ्य, तंदुरुस्ती एवं सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देता है।

खेल उपकरणों के निर्यात को बढ़ावा देने हेतु नीतिगत सुझाव

  • लागत प्रतिस्पर्धात्मकता: कार्बन फाइबर, EVA फोम एवं पॉलीयूरेथेन जैसी महत्त्वपूर्ण कच्ची सामग्रियों पर आयात शुल्क को तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए, ताकि उत्पादन लागत में कमी लाई जा सके।
  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाना: इन उद्यमों के लिए लक्षित वित्तीय सहायता, ऋण की उपलब्धता तथा प्रौद्योगिकी उन्नयन योजनाओं का विस्तार किया जाना चाहिए।
  • औद्योगिक समूह आधारित विनिर्माण का विकास: परिवहन लागत कम करने तथा निर्यात दक्षता में सुधार करने के लिए बंदरगाहों के निकट नए हरितक्षेत्र विनिर्माण समूहों का विकास किया जाना चाहिए।
  • गुणवत्ता मानक: अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विश्वस्तरीय परीक्षण एवं प्रमाणन सुविधाएँ स्थापित की जानी चाहिए।
  • खेल प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्रों की स्थापना: शैक्षणिक संस्थानों एवं उद्योगों के सहयोग से समर्पित खेल प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए, ताकि अनुसंधान, तकनीकी विकास एवं उत्पादों की गुणवत्ता को बढ़ावा मिल सके।

निष्कर्ष 

  • भारत के खेल उपकरण विनिर्माण क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए लागत प्रतिस्पर्धात्मकता, गुणवत्ता संवर्धन तथा वैश्विक एकीकरण को सम्मिलित करते हुए एक समग्र पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना आवश्यक है।
  • निरंतर नीतिगत समर्थन एवं प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से भारत कम वैश्विक हिस्सेदारी वाले निर्यातक देश से खेल उपकरण विनिर्माण के क्षेत्र में एक वैश्विक अग्रणी देश के रूप में उभर सकता है।

स्रोत: PIB

 

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