भारत का लक्ष्य: 2035 तक 60% गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा स्रोत
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
संदर्भ
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन और पेरिस समझौते के अंतर्गत भारत के अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) 2031–2035 को स्वीकृति दी है।
अद्यतन NDCs
- उत्सर्जन तीव्रता में कमी: भारत ने 2005 के स्तर से 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता (प्रति GDP इकाई CO₂) को 47% तक घटाने का संकल्प लिया है।
- 2005 से 2020 के बीच भारत पहले ही लगभग 36% उत्सर्जन तीव्रता घटा चुका है।
- गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का विस्तार: भारत ने 2035 तक अपनी स्थापित विद्युत क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।
- 2026 तक भारत ने पहले ही 52% से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल कर ली है।
- कार्बन सिंक का निर्माण: भारत ने 2035 तक वन एवं वृक्ष आवरण के माध्यम से 3.5 से 4 अरब टन CO₂ समतुल्य कार्बन सिंक बनाने का संकल्प लिया है।
राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC)
- पेरिस समझौते के हस्ताक्षरकर्ता के रूप में भारत को 2025 में अद्यतन NDC प्रस्तुत करना आवश्यक था।
- NDCs देश-विशिष्ट जलवायु कार्ययोजनाएँ हैं, जिनमें ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाने और जलवायु परिवर्तन के अनुरूप ढलने के लक्ष्य शामिल होते हैं।
- इन्हें समय-समय पर संशोधित कर महत्वाकांक्षा बढ़ाई जाती है।
- भारत के NDC के मार्गदर्शक सिद्धांत:
- भारत का NDC सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियाँ और संबंधित क्षमताएँ (CBDR-RC) सिद्धांत पर आधारित है। यह दृष्टिकोण समानता और जलवायु न्याय पर बल देता है।
- भारत का NDC विकासात्मक आवश्यकताओं, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन स्थापित करता है।
स्रोत: TH
यूथालिया ज़ुबीनगार्गी
पाठ्यक्रम: चर्चा में प्रजातियाँ
संदर्भ
- अरुणाचल प्रदेश के एक वन में दर्ज की गई तितली की नई प्रजाति का नाम असम के सांस्कृतिक प्रतीक गायक जुबीन गर्ग के नाम पर रखा गया है।
परिचय
- यूथालिया ज़ुबीनगार्गी का सामान्य नाम बसार ड्यूक प्रस्तावित किया गया है।
- यह तितली यूथेलिया वंश से संबंधित है, जो दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में सामान्यतः पाई जाती है।
- इस समूह की तितलियाँ प्रायः वनों में देखी जाती हैं और इनके भूरे पंखों पर हल्के धब्बे होते हैं।
- नई खोजी गई प्रजाति अपने विशिष्ट पंख पैटर्न और संरचनात्मक विशेषताओं के कारण अलग पहचानी गई।
- यह तितली ठंडे, छायादार वन आंतरिक क्षेत्रों को पसंद करती है।

- इसके जीवन चक्र, प्रजनन पैटर्न और होस्ट पौधों के बारे में अभी बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।
- यूथालिया ज़ुबीनगार्गी भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में दर्ज इस समूह की 80 से अधिक प्रजातियों में से एक है।
स्रोत: TH
आंध्र प्रदेश में ऑलिव रिडले कछुओं का संरक्षण
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
संदर्भ
- वन्यजीव प्रबंधन प्राधिकरण और कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य के अधिकारियों ने काकीनाडा खाड़ी के होप द्वीप पर ऑलिव रिडले कछुओं के लगभग 20,000 अंडों का संरक्षण किया है।
ऑलिव रिडले कछुए के बारे में
- नाम: इनके हृदयाकार कवच के जैतून-हरे रंग के कारण इन्हें ऑलिव रिडले कहा जाता है।
- आहार: ये मांसाहारी हैं और मुख्यतः जेलीफ़िश, झींगा आदि खाते हैं।
- वितरण: ये विश्वभर में मुख्यतः प्रशांत, हिंद और अटलांटिक महासागरों के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
- भारत में प्रमुख घोंसले बनाने के स्थल: ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तटीय क्षेत्र।
- रुशिकुल्या रूकेरी तट (ओडिशा)
- गाहिरमाथा बीच (भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान)
- विशेषता: ये अपनी अनोखी सामूहिक अंडे देने की प्रक्रिया अरिबाडा के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसमें हजारों मादा एक ही तट पर अंडे देती हैं।
- संरक्षण स्थिति
- IUCN रेड लिस्ट: Vulnerable
- CITES: परिशिष्ट I
- भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची I

कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य
- यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है, जो आंध्र प्रदेश के काकीनाडा के पास स्थित है।
- यह अभयारण्य गोदावरी नदी के मुहाने पर स्थित है, जहाँ नदी बंगाल की खाड़ी से मिलती है।
- प्रमुख प्रजातियाँ: फिशिंग कैट, स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव, और गोल्डन सियार।
होप द्वीप
- होप द्वीप (क्रच्छु लंका) काकीनाडा तट से दूर स्थित एक छोटे टैडपोल आकार का द्वीप है।
- यह गोदावरी की सहायक नदी कोरिंगा द्वारा लाए गए अवसाद से बना है।
- यह आंध्र प्रदेश में ऑलिव रिडले कछुओं के सुरक्षित घोंसले बनाने के स्थलों में से एक है।
स्रोत: TH
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
- खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) का प्रथम संस्करण छत्तीसगढ़ में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा तीन मेजबान शहर हैं।
- ये खेल दस दिनों तक आयोजित किए जा रहे हैं।
परिचय
- यह खेलो इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत आदिवासी खिलाड़ियों को समर्पित प्रथम राष्ट्रीय बहु-खेल आयोजन है।
- खेलों में सात पदक खेल शामिल हैं—एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, तीरंदाजी, तैराकी और कुश्ती—साथ ही प्रदर्शन खेल जैसे मल्लखंब और कबड्डी।
- 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 60,000 से अधिक खिलाड़ी 338 पदकों के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे।
- प्रतिभा पहचान हेतु प्रतिभा पहचान एवं विकास समिति(TIDC) नियुक्त की गई है, जो संभावित खिलाड़ियों को आगे प्रशिक्षण और विकास के लिए चुनेगी।
- मास्कॉट: आधिकारिक मास्कॉट मोरवीर है, जो छत्तीसगढ़ी शब्दों मोर (अपना) और वीर (वीरता) से लिया गया है।
खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएँ
- खेलो इंडिया यूथ गेम्स
- खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स
- खेलो इंडिया पैरा गेम्स
- खेलो इंडिया विंटर गेम्स
- खेलो इंडिया बीच गेम्स
स्रोत: PIB
तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
संदर्भ
- रक्षा मंत्रालय ने तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की खरीद के लिए अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं।
परिचय
- तुंगुस्का सोवियत मूल की (1980 के दशक की शुरुआत में शामिल) ट्रैक्ड, स्व-चालित वायु रक्षा प्रणाली है, जिसे जमीनी बलों को निम्न-उड़ान वाले हवाई खतरों से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है।
- उन्नत संस्करण: 2K22M, 2K22M1, जिनमें बेहतर फायर कंट्रोल और मिसाइल क्षमता है।
- NATO नामकरण: SA-19 “Grison.”
- यह प्रणाली अद्वितीय है क्योंकि इसमें मिसाइल और तोप दोनों एक ही प्लेटफॉर्म पर संयोजित हैं।
प्रमुख विशेषताएँ
- हाइब्रिड प्रणाली: सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को जुड़वां 30 मिमी ऑटो-कैनन के साथ एकीकृत करती है।
- मिसाइलें:
- 9M311 श्रृंखला
- रेंज: 8–10 किमी
- ऊँचाई: 3,500 मीटर तक
- मार्गदर्शन: रेडियो कमांड
- ऑटो-कैनन:
- फायर दर: 3,900–5,000 राउंड/मिनट
- रडार एवं ट्रैकिंग: 360° लक्ष्य अधिग्रहण रडार, जिसकी पहचान सीमा 18 किमी तक है।
स्रोत: ET
रेड-क्राउन्ड रूफ्ड टर्टल
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
संदर्भ
- कभी गंगा की शान रही रेड-क्राउन्ड रूफ्ड टर्टल अब तीव्रता से सिकड़ते आवास में जीवित है।
परिचय
- वैज्ञानिक नाम: बटागुर कचुगा
- वंश: बटागुर (भारत में पाई जाने वाली तीन बड़ी स्वच्छ जल की प्रजातियों में से एक)।
- आवास: भारत के अलावा बांग्लादेश और नेपाल में सीमित आवास है, लेकिन वहाँ कोई पुष्ट जंगली जनसंख्या नहीं है।
- आहार: मुख्यतः शाकाहारी; यह जलीय वनस्पति को नियंत्रित करने और पोषक चक्र बनाए रखने में सहायता करता है, जिससे संतुलित स्वच्छ जल का पारिस्थितिकी तंत्र कायम रहता है।
- खतरे: वयस्कों और अंडों का अत्यधिक शिकार, अवैध व्यापार और आवास का क्षरण।
- संरक्षण स्थिति:
- IUCN रेड लिस्ट: अत्यंत संकटग्रस्त (Critically Endangered)
- भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची I
- CITES: परिशिष्ट I
क्या आप जानते हैं?
- भारतीय कछुआ संरक्षण कार्यक्रम (Indian Turtle Conservation Program), नमामि गंगे तथा उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान वन विभागों के सहयोग से इस प्रजाति की पूर्व की महिमा को पुनर्स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।

स्रोत: DTE
Previous article
सऊदी अरब का भूमि पुनर्स्थापन मॉडल