वैश्विक स्तर पर विद्यालय से बाहर रहने वाली जनसंख्या बढ़कर 273 मिलियन तक पहुँची

पाठ्यक्रम: GS2/ शिक्षा

संदर्भ

  • यूनेस्को की नवीनतम रिपोर्ट “2026 जीईएम रिपोर्ट — पहुँच और समानता: 2030 की ओर उलटी गिनती” के अनुसार, वर्ष 2024 में विद्यालय से बाहर रहने वाली वैश्विक जनसंख्या 273 मिलियन तक पहुँच गई है।

रिपोर्ट की प्रमुख बातें

  • कम प्रतिधारण और पूर्णता: रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व स्तर पर केवल दो-तिहाई छात्र ही माध्यमिक शिक्षा पूरी करते हैं।
  • शिक्षा से वंचित बच्चे: प्रत्येक छह में से एक विद्यालय-आयु वर्ग का बच्चा शिक्षा से बाहर है, जो सार्वभौमिक शिक्षा प्राप्त करने में बड़ी चुनौती को दर्शाता है।
  • प्रवेश से सीख सुनिश्चित नहीं होती: रिपोर्ट इस बात पर बल देती है कि विद्यालयों में नामांकन बढ़ने का अर्थ सार्थक सीखने के परिणाम नहीं है।
  • गुणवत्ता शिक्षा की बाधाएँ: भीड़भाड़ वाले कक्ष, प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी और अपर्याप्त शिक्षण सामग्री प्रमुख अवरोध हैं।
  • अपर्याप्त वित्तपोषण: रिपोर्ट इंगित करती है कि अपर्याप्त और गलत लक्षित सार्वजनिक वित्तपोषण सार्वभौमिक शिक्षा प्राप्त करने में बड़ी बाधा है।

विद्यालय शिक्षा में सकारात्मक प्रवृत्तियाँ

  • रिपोर्ट में उल्लेख है कि 2000 से कई देशों ने विद्यालय से बाहर रहने वाली जनसंख्या में उल्लेखनीय कमी की है।
  • मेडागास्कर और टोगो ने बच्चों में विद्यालय से बाहर रहने की दर 80 प्रतिशत से अधिक घटाई है।
  • मोरक्को और वियतनाम ने किशोरों में इसी तरह की प्रगति की है, जबकि जॉर्जिया और तुर्किये ने युवाओं में परिणाम सुधारे हैं।
  • कोट डी’आइवोर ने सभी आयु वर्गों में विद्यालय से बाहर रहने की दर आधी कर दी है।

भारत में विद्यालय शिक्षा

  • भारत विश्व की सबसे बड़ी विद्यालय प्रणाली संचालित करता है, जिसमें 24.69 करोड़ छात्र, 14.71 लाख विद्यालय और 1.01 करोड़ से अधिक शिक्षक शामिल हैं (UDISE+ 2024-25)।
  • सकल नामांकन अनुपात (GER) के अनुसार:
    • प्रारंभिक स्तर (कक्षा III से V): 95.4
    • मध्य स्तर (कक्षा VI से VIII): 90.3
    • माध्यमिक स्तर (कक्षा IX से XII): 68.5

भारत में सरकारी पहल

  • समग्र शिक्षा अभियान (SSA): पूर्व-प्राथमिक से कक्षा XII तक विद्यालय शिक्षा क्षेत्र की व्यापक योजना। इसमें पूर्ववर्ती योजनाएँ — सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और शिक्षक शिक्षा — सम्मिलित हैं।
  • पीएम श्री विद्यालय: 14,500 विद्यालयों का विकास आधुनिक अधोसंरचना और शिक्षण पद्धति के साथ आदर्श संस्थानों के रूप में।
  • मध्याह्न भोजन योजना: सरकारी विद्यालयों में छात्रों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराना ताकि उपस्थिति बढ़े, पोषण सुधरे और ड्रॉपआउट दर घटे।
  • शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009: 6-14 आयु वर्ग के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी।
  • माध्यमिक शिक्षा हेतु कन्या प्रोत्साहन योजना: ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों को शिक्षा जारी रखने हेतु वित्तीय प्रोत्साहन।
  • नई शिक्षा नीति 2020:
    • प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) पर बल।
    • 5+3+3+4 विद्यालय संरचना का परिचय।
    • रटने के बजाय आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता और समस्या-समाधान पर ध्यान।

निष्कर्ष

  • यूनेस्को के निष्कर्ष बताते हैं कि वैश्विक शिक्षा संकट केवल पहुँच तक सीमित नहीं है, बल्कि समानता और सीखने की गुणवत्ता से भी जुड़ा है।
  • सतत विकास लक्ष्य 4 की 2030 की समयसीमा निकट है, इसलिए त्वरित और केंद्रित कार्रवाई की आवश्यकता है।
  • यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक बच्चा न केवल विद्यालय जाए बल्कि प्रभावी ढंग से सीखे भी, सर्वसमावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है।

स्रोत: DTE

 

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