पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी; बुनियादी ढांचा
संदर्भ
- आर्कटिक और बाल्टिक क्षेत्रों में हाल में सब-सी केबलों को क्षतिग्रस्त किए जाने की संदिग्ध घटनाओं ने इन केबलों की संवेदनशीलता की ओर पुनः ध्यान आकर्षित किया है। ये केबल वैश्विक डिजिटल संपर्क की भौतिक आधारभूत संरचना के रूप में कार्य करती हैं।
सब-सी केबलें एवं उनका वितरण
- सब-सी केबलें प्रकाश-तंतु वाली केबलें हैं, जिन्हें समुद्र की तलहटी में बिछाया जाता है और जो विभिन्न देशों तथा महाद्वीपों को आपस में जोड़ती हैं।
- ये अंतरराष्ट्रीय आँकड़ा यातायात के 99 प्रतिशत से अधिक हिस्से को वहन करती हैं, जिससे वे वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था के संचालन के लिए अपरिहार्य हो जाती हैं।
- परंपरागत रूप से इनका जाल दूरसंचार कंपनियों, केबल संचालकों और प्रौद्योगिकी कंपनियों के समूहों द्वारा विकसित किया जाता रहा है।
- हालाँकि, आँकड़ों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित बढ़ती बैंडविड्थ आवश्यकताओं के कारण बड़ी प्रौद्योगिकी एवं बादल-आधारित सेवा कंपनियाँ अब सीधे केबल प्रणालियों में निवेश कर रही हैं।
- आपूर्ति का पक्ष भी कुछ कंपनियों तक सीमित है। फ्रांस की अल्काटेल सबमरीन नेटवर्क्स, अमेरिका की सबकॉम और जापान की एनईसी प्रमुख निर्माता कंपनियाँ हैं तथा संयुक्त रूप से विश्व में स्थापित सबमरीन केबलों के बहुत बड़े हिस्से में इनकी भूमिका है।

सब-सी केबलों का महत्त्व
- डिजिटल अर्थव्यवस्था की आधारभूत संरचना: अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, वित्तीय लेन-देन, बादल-आधारित सेवाएँ, इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य, सरकारी संचार तथा दैनिक डिजिटल सेवाएँ सबमरीन केबलों पर अत्यधिक निर्भर हैं।
- सामरिक आधारभूत संरचना: किसी केबल के क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय संपर्क व्यवस्था बाधित या सीमित हो सकती है, जिसका प्रभाव व्यवसायों, सरकारों और नागरिकों पर पड़ सकता है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं आँकड़ा अर्थव्यवस्था के लिए सहायक: बादल-आधारित संगणना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आँकड़ा केंद्रों के विस्तार से उच्च क्षमता तथा कम विलंबता वाले अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की माँग बढ़ रही है।
- छोटे द्वीपीय देशों के लिए महत्त्व: अनेक छोटे द्वीपीय और भौगोलिक रूप से पृथक देशों की अर्थव्यवस्थाएँ कुछ ही केबल संपर्कों पर निर्भर हैं। इससे किसी एक संपर्क के विफल होने पर संपूर्ण व्यवस्था के प्रभावित होने का जोखिम बढ़ जाता है।
- अतः केबल व्यवस्था की सुदृढ़ता आर्थिक और सामाजिक सुदृढ़ता से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है।
प्रकाश-तंतु वाली केबलें
- ये संचार केबलें काँच या प्लास्टिक के अत्यंत महीन तंतुओं के माध्यम से सूचना का संचार करती हैं।
- आँकड़ों को प्रकाश स्पंदनों में परिवर्तित किया जाता है और पूर्ण आंतरिक परावर्तन के सिद्धांत के माध्यम से उन्हें केबल के भीतर आगे भेजा जाता है।
- प्रकाश-तंतु तकनीक प्रकाश के माध्यम से आँकड़ों का संचार करती है, जिससे अत्यधिक उच्च गति और व्यापक बैंडविड्थ प्राप्त होती है। यही कारण है कि यह इंटरनेट और दूरभाष सेवाओं के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
- प्रकाश-तंतु में संकेत क्षीणन कम होता है, इसलिए संकेतों को लंबी दूरी तक भेजा जा सकता है। अंडरसी लंबी दूरी की केबलों में संकेतों को सुदृढ़ करने के लिए प्रकाशीय प्रवर्धक अथवा पुनरावर्तक लगाए जाते हैं।

सब-सी केबलें असुरक्षित क्यों हैं?
- भौतिक क्षति: केबलों को होने वाली अधिकांश क्षति मछली पकड़ने की गतिविधियों, जहाजों के लंगर, भूकंप, भूस्खलन तथा अन्य समुद्री गतिविधियों के कारण होती है।
- तोड़फोड़ एवं मिश्रित खतरे: बाल्टिक सागर तथा उसके आसपास के जलक्षेत्रों में हाल की घटनाओं ने जानबूझकर किए गए हस्तक्षेप की आशंकाओं को बढ़ाया है।
- जिम्मेदारी निर्धारित करने में कठिनाई के कारण समुद्र के अंदर स्थित आधारभूत संरचना सीमित स्तर के संघर्ष अथवा मिश्रित गतिविधियों के लिए आकर्षक लक्ष्य बन जाती है।
- मरम्मत क्षमता का संकेंद्रण: अंडर-सी केबल की मरम्मत के लिए विशेष प्रकार के जहाजों, उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता होती है।
- विश्व स्तर पर सीमित मरम्मत क्षमता किसी घटना के बाद सेवा बाधित रहने की अवधि को बढ़ा सकती है।
- आपूर्ति शृंखला का संकेंद्रण: कुछ ही निर्माताओं और विशेष सेवा प्रदाताओं पर निर्भरता सामरिक जोखिम उत्पन्न करती है।
- डिजिटल संप्रभुता: केबलों के तटवर्ती केंद्रों और स्वयं नेटवर्क की आधारभूत संरचना का डिजिटल संप्रभुता तथा सामरिक स्वायत्तता पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। सामान्यतः केबलों में प्रवाहित सामग्री अपने-आप पढ़ने योग्य नहीं होती, चाहे वह कूटबद्ध या सुरक्षित क्यों न हो; फिर भी उनके मार्गों का प्रबंधन महत्त्वपूर्ण है।
भारत: सब-सी केबलें एवं सुदृढ़ता का निर्माण
- भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सबमरीन केबलों के तंत्र में एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है। अंतरराष्ट्रीय केबलें भारत के पश्चिमी और पूर्वी दोनों तटों पर आकर जुड़ती हैं।
- समुद्र के भीतर स्थित नेटवर्क संबंधी आँकड़ा-भंडार भारत की केबल प्रणालियों और तटवर्ती केंद्रों का विवरण उपलब्ध कराता है।
- भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के कारण निर्बाध अंतरराष्ट्रीय संपर्क सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण हो गया है।
- साथ ही, केबलों के तट पर पहुँचने वाले केंद्रों का संकेंद्रण, विदेशी विशेष उपकरणों पर निर्भरता तथा सीमित घरेलू मरम्मत क्षमता कमजोरियाँ उत्पन्न करती हैं।
- अतः भारत को स्वदेशी केबल मरम्मत और रखरखाव क्षमता विकसित करनी चाहिए।
- विशेष रूप से, नियामकीय स्वीकृतियों में तीव्रता लाना भी आवश्यक है, क्योंकि अनुमति प्राप्त करने में होने वाली देरी विशेष मरम्मत संबंधी आधारभूत संरचना में निवेश को हतोत्साहित कर सकती है।

आगे की राह
- भारत को ‘वैकल्पिक व्यवस्था–सुदृढ़ता–त्वरित मरम्मत’ की रणनीति अपनाने की आवश्यकता है, ताकि:
- केबल मार्गों और उनके तटवर्ती जुड़ाव स्थलों में विविधता लाई जा सके;
- घरेलू मरम्मत जहाजों और कुशल मानव संसाधन को सुदृढ़ किया जा सके;
- केबलों की निगरानी और घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया के लिए समन्वित राष्ट्रीय तंत्र स्थापित किया जा सके;
- नौसेना, तटरक्षक बल, दूरसंचार प्राधिकरणों और निजी संचालकों के बीच सहयोग को मजबूत किया जा सके;
- केबल आधारभूत संरचना में सार्वजनिक-निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जा सके; तथा
- हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझेदार देशों के साथ सहयोग को अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
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